पिकअप में मजदूर
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मजदूरों ने बताया कि यदि उनको काम मिलता भी है तो पूरा दिन काम करने का 100 से 150, 200 रुपये ही मिलता है। चाहे वह नगरीय क्षेत्र हो या ग्रामीण क्षेत्र, इसलिए वह जबलपुर जिले निकल जाते हैं। वहां पर उनको मजदूरी अच्छी मिल जाती है, जिससे उनका भरण पोषण हो जाता है। अब रही बात जान जोखिम में डालने की तो उनका कहना है कि दूसरा कोई उपाय भी नहीं है, जिससे हम लोग प्रतिदिन आवागमन कर सके।
कई ग्रामीण हो गये अपाहिज
तेंदूखेड़ा ब्लॉक के ग्रामीण क्षेत्र से वर्षों से मजदूर जबलपुर के लिए प्रतिदिन पलायन करते हैं और लोडिंग वाहन पर जाना उनकी मजबूरी है। क्योंकि इसमें किराया कम लगता है। यदि पूर्व की घटना को देखा जाए इसी तरह आवागमन करने में कई वाहन पलटे भी हैं, जिनमें सवार लोगों को काफी गंभीर चोटे आई और कई तो ऐसे भी मजदूर हैं, जो शरीर से अपाहिज हो चुके हैं और दिव्यांगों की भांति जीवन जी रहे हैं। यदि शासन, प्रशासन इस पलायन को रोकना चाहती है तो पहले तो ग्रामीण क्षेत्रों में व्यवसाय शुरू करे या फिर क्षेत्र में कोई फैक्ट्री या बड़ा कारखाना लगवाए, जिससे पलायन करने वाले मजदूरों को वहां रोजगार मिल सके।
सभी थाना प्रभारी को दिए निर्देश
इस संबंध में एसपी सुनील तिवारी ने बताया कि वह सभी थाना प्रभारियों को निर्देशित करते हैं कि यदि लोडिंग वाहनों में सवारियां ले जाती हैं तो तत्काल कार्रवाई करें। जिला परिवहन अधिकारी क्षितिज सोनी ने कहा कि कार्रवाई में उन्हें पुलिस का सहयोग भी चाहिए, क्योंकि उनके पास स्टाफ में केवल दो लोग हैं।