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Damoh News: सरकार बेपरवाह, कबड्डी का नेशनल खिलाड़ी मजदूरी कर पाल रहा परिवार

Tue, 30 May 2023 01:41 PM IST
रवींद्र भजनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह

सार

मध्य प्रदेश में कबड्डी का नेशनल खिलाड़ी ईंट-गारे का काम कर परिवार को पालने के लिए मजबूर है। शासन के पास कोई योजना ही नहीं है, जिससे खिलाड़ियों को करियर बनाने में मदद कर सके। 
 
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दमोह में राष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी विजय अब मजदूरी कर रहा है। - फोटो : अमर उजाला
खेलों को बढ़ावा देने के लिए शासन कई घोषणाएं करता है लेकिन उनके करियर के प्रति बेपरवाह बना हुआ है। दमोह जिले के तेजगढ़ में कबड्डी का एक नेशनल खिलाड़ी मजदूरी करने को मजबूर है। ईंट-गारे का काम कर नेशनल खिलाड़ी अपने परिवार को दो वक्त की रोटी मुहैया करा पा रहा है। शासन और खेल विभाग के अधिकारियों ने ऐसी प्रतिभा की ओर ध्यान हीं नहीं दिया जिससे यह गुमनामी में चला गया। शासन के पास कोई योजना है ही नहीं कि ऐसे खिलाड़ियों को लाभ मिल सके।  

हम बात कर रहे हैं तेंदूखेड़ा ब्लॉक के तेजगढ़ में रहने वाले 35 वर्षीय कबड्डी खिलाड़ी विजय पिता सुखदयाल बसोर की। उन्होंने कबड्डी को नेशनल लेवल पर खेला है। तेजगढ़ हाईस्कूल में बायोलॉजी विषय से बारहवी तक पढ़ाई की। कक्षा-6 से कबड्डी खेलना शुरू किया था। उस समय के खेल शिक्षक आमीन खान ने उन्हें मदद की। विजय ने पन्ना में 1999 में पहली राज्य स्तरीय प्रतियोगिता खेली। उसके बाद 2000 में बिलासुपर, 2001 में ग्वालियर उसके बाद 2003 में दमोह में आयोजित राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में उनकी टीम विजेता रही। 2004 में वह नेशनल खेलने रायपुर गए। वहां टीम तीसरे स्थान पर रही। 2008 में भी राज्य स्तरीय प्रतियोगिता खेली। पारिवारिक स्थति ठीक नहीं होने की वजह से विजय को खेल से दूर होना पड़ा।
 

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विजय - फोटो : अमर उजाला
रोजगार नहीं मिला तो कर रहा मजदूरी
विजय बसोर ने कहा कि उसने नेशनल लेवल तक कबड्डी खेली है। परिवार की हालत खराब होने से वह खेल से दूर हो गए। आज तक उन्हें कोई रोजगार नहीं मिला। परिवार में पत्नी और बच्चे हैं। उनके भरण पोषण के लिए मजदूरी ही विकल्प है। 2004 में दमोह के तत्कालीन कलेक्टर संदीप सक्सेना ने 26 जनवरी पर उन्हें मेडल और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया था। उसके बाद किसी ने सुध नहीं ली। विजय का कहना है कि यदि कहीं उसे ट्रेनर के पद पर नियुक्त कर दिया जाए तो वह कई खिलाड़ी तैयार कर सकते हैं। 

 
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अपने प्रमाण पत्र दिखाते विजय - फोटो : अमर उजाला
दूसरे खिलाड़ी नहीं दिखा पाते थे अपनी प्रतिभा
नेशनल खिलाड़ी विजय को पढ़ाने वाले तेजगढ़ हाईस्कूल में पदस्थ शिक्षक संतोष प्रधान बताते हैं कि विजय टीम में खेलते थे तो पूरे संभाग में टीम का दबदबा रहा था। अन्य टीमों के खिलाड़ी डरते थे। अपना हुनर नहीं दिखा पाते थे। विजय को हमेशा टीम में रखा गया। इसके बाद भी वह मजदूरी करने को मजबूर है। दुख होता है कि उसे रोजगार उपलब्ध नहीं हो सका। शासन की किसी योजना का लाभ भी उसे नहीं मिला। दमोह कलेक्टर मयंक अग्रवाल ने कहा कि मैं इसकी जानकारी मंगवाता हूं। जो भी हो सकेगा, मदद की जाएगी। वहीं, जिला खेल अधिकारी सैफुल्लाह खान ने कहा कि हमारा विभाग युवा खिलाड़ियों को आगे बढ़ाता है। विजय अब 35 वर्ष के हैं। विभाग से उनकी मदद नहीं हो सकती।

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