फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

MP: केन-बेतवा परियोजना पर टकराव, आदिवासी महिलाएं चिता पर लेटीं, कहा- न्याय या मौत, हम पीछे नहीं हटेंगे

Thu, 09 Apr 2026 01:26 PM IST
छतरपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छतरपुर

सार

छतरपुर के केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में आदिवासी किसान और महिलाएं प्रशासन के दमन के बावजूद चिता आंदोलन तक पहुंच गए हैं। आंदोलन का नेतृत्व अमित भटनागर कर रहे हैं।
विज्ञापन
1 of 3
प्रदर्शन करते हुए लोग - फोटो : अमर उजाला
केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में चल रहा आंदोलन अब निर्णायक और संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया है। प्रशासन द्वारा आंदोलन को दबाने की हर कोशिश के बावजूद हजारों आदिवासी किसान, विशेष रूप से महिलाएं, हिम्मत हारने के बजाय चिता आंदोलन तक पहुंच गई हैं। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे आदिवासी महिलाओं और जय किसान संगठन के नेता सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने सरकार के दमन के सामने आक्रामक रुख अपनाया है।

रोक-टोक और धारा 163 लागू

आंदोलनकारियों का कहना है कि उन्हें दिल्ली जाकर अपनी बात रखने से रोका गया, रास्तों में कई जगह रोका गया, राशन और पानी तक रोक दिया गया और धमकियां दी गई। अब प्रशासन ने अपने ही गाँव और जंगल में धारा 163 लागू कर उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की है। आंदोलनकारियों ने इसे दमन की पराकाष्ठा बताया है।

पन्ना और छतरपुर जिलों की सीमाओं को अलग करने और बाहरी व्यक्तियों की आवाजाही रोकने के प्रशासनिक आदेश पर अमित भटनागर ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जब परियोजना एक ही है तो लोगों को इस तरह बांटना अन्यायपूर्ण और गैर-तार्किक है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन अपने अत्याचार और भ्रष्टाचार को छुपाने के लिए ऐसे आदेश जारी कर रहा है।


ये भी पढ़ें-  MP News: भोपाल समेत चार संभागों में गेहूं खरीदी आज से, BJP नेता करेंगे किसानों का स्वागत, कांग्रेस का प्रदर्शन
विज्ञापन

2 of 3
प्रदर्शन करते हुए लोग - फोटो : अमर उजाला
केन नदी में अनोखा आंदोलन

धारा 163 के बावजूद आंदोलनकारियों ने केन नदी के बीचो-बीच आंदोलन शुरू किया। पन्ना जिले के किसान अपनी सीमा में और छतरपुर जिले के किसान अपनी सीमा में रहते हुए भी संयुक्त रूप से विरोध कर रहे हैं। यह आंदोलन अब और अधिक मजबूत और प्रतीकात्मक बन गया है। वर्तमान में हजारों आदिवासी महिलाएं छोटे-छोटे बच्चों के साथ प्रतीकात्मक चिताओं पर लेटकर विरोध कर रही हैं। उनका कहना है कि या तो उन्हें न्याय मिलेगा या मौत। यह दृश्य अत्यंत मार्मिक और चिंताजनक बताया जा रहा है।

प्रशासन का दबाव और झड़पें

आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि पुलिस और वन विभाग ने सभी रास्तों पर पहरा लगा दिया है। राशन, पानी और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बाधित की जा रही है। स्थानीय दुकानदारों को धमकाकर हटा दिया गया और गांवों पर दबाव बनाया गया कि वे आंदोलनकारियों की मदद न करें। जब प्रशासन ने आंदोलन को खत्म करने का दबाव बनाया, तो महिलाओं और पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई। इस दौरान महिलाओं के आक्रोश के सामने पुलिस को पीछे हटना पड़ा।

विज्ञापन
विज्ञापन

3 of 3
चिता पर लेटकर प्रदर्शन करती महिलाएं - फोटो : अमर उजाला
अमित भटनागर ने लगाए गंभीर आरोप

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमित भटनागर ने कहा कि गांव-गांव में प्रशासन, पुलिस और सत्ता से जुड़े लोगों का गठजोड़ है, जिसके कारण भ्रष्टाचार बढ़ रहा है और आम ग्रामीणों का शोषण हो रहा है। उन्होंने कहा कि जब तक आंदोलनकारियों को न्याय नहीं मिलेगा, वे पीछे नहीं हटेंगे। यह आर-पार की लड़ाई है और संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल मुआवजे की लड़ाई नहीं है, बल्कि जल, जंगल, जमीन, संस्कृति और भविष्य को बचाने की लड़ाई है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें