अलग अंदाज में नजर आए शिवराज
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साहूकारों के शोषण से मुक्ति
मध्यप्रदेश में अनुसूचित जनजाति साहूकार विनियम 1972 को अब और प्रभावी बनाया गया है। जनजातीय क्षेत्रों में साहूकारी का धंधा करने वालों के लिए पंजीयन शुल्क में वृद्धि की गई है। साहूकारों द्वारा वसूले जाने वाले ब्याज की दरों को भी अब नियंत्रित किया गया है। निर्धारित दर से अधिक ब्याज वसूलने वाले साहूकारों को कड़ा दण्ड दिया जाएगा।
जन-जन की जुबान पर जनजातीय नायकों की गाथाएं
मध्यप्रदेश की प्रमुख जनजातियों में भील, भिलाला, बारेला, गोंड, कोल, कोरकू, सहरिया भारिया, बैगा, सोर, पटेलिया, मवासी, पनिका, कंवर, हल्बी, मुंडा, खरिया हैं। प्रमुख जनजाति बोलियाँ भीली, भिलाली, बारेली, गोंडी, मवासी, कोरकू आदि हैं। मध्यप्रदेश में जनजातियों के प्रमुख जननायक टंट्या भील, भीमा नायक, ख्वाजा नायक, संग्राम सिंह, शंकर शाह, रघुनाथ शाह, रानी दुर्गावती, बादल भोई, राजा भभूत सिंह, रघुनाथ मंडलोई भिलाला, राजा ढिल्लन शाह गोंड, राजा गंगाधर गोंड, सरदार विष्णु सिंह उईके आदि हुए हैं, जिनकी गौरव गाथाएं आज भी जन-जन की जुबान पर हैं। इन सभी जनजातीय नायकों को समुचित सम्मान राज्य शासन की ओर से प्रदान किया जा रहा है।