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MP News: भोपाल का 90 डिग्री मोड़ वाला ब्रिज बना सेल्फी स्पॉट, देखने पहुंच रहे लोग, अब PWD करेगा री-डिजाइन

Thu, 19 Jun 2025 08:22 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

भोपाल के ऐशबाग स्थित 90 डिग्री मोड़ वाले ओवरब्रिज की टर्निंग अब बदली जाएगी। सोशल मीडिया पर चर्चा में आने के बाद सरकार ने री-डिजाइन का निर्णय लिया। जांच रिपोर्ट के अनुसार ब्रिज सुरक्षित है, लेकिन सुरक्षा बढ़ाने और चौड़ीकरण के सुझावों पर काम शुरू होगा। अभियंता दोषी नहीं माने गए।
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भोपाल के 90 डिग्री वाला ब्रिज लगातार चर्चा में बना हुआ है। - फोटो : अमर उजाला
राजधानी भोपाल के ऐशबाग में बना 90 डिग्री मोड वाला ओवर ब्रिज देश भर में चर्चाओं में आने के बाद शासन इसमें बदलाव करेगा। ओवरब्रिज का टर्निंग वाला हिस्सा फिर से बनेगा। पीडब्ल्यूडी रेलवे के साथ मिलकर ब्रिज को री-डिजाइन करेगा। खास बात है कि यह ब्रिज सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद अब सेल्फी स्पॉट बन गया है। इस ब्रिज को देखने के लिए लोग दूर-दूर से पहुंच रहे हैं और सेल्फी ले रहे हैं। 



ब्रिज पर पहुंचे लोगों ने बताया कि सोशल मीडिया द्वारा उन्हें यह ब्रिज देखने को मिला, जिसके बाद से वह इस ब्रिज को देखना चाहते थे। आपको बता दें कि अपने टर्निंग को लेकर यह ब्रिज पूरे देश में सुर्खियों में बना हुआ है। इसकी डिजाइन सोशल मीडिया पर भी जमकर ट्रोल हो रही है और इसके मीम्स भी बन रहे हैं। हालांकि जानकारी के मुताबिक यह ब्रिज टूटेगा नहीं, सिर्फ इसकी टर्निंग सही की जाएगी, ताकि टकराकर वाहनों के गिरने का खतरा न रहे। इसके अलावा ब्रिज की डिजाइन तैयार करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।

 
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भोपाल के 90 डिग्री वाले ब्रिज पर लोग अब फोटो खिंचवाने पहुंच रहे हैं। - फोटो : अमर उजाला
अतिरिक्त टर्निंग स्पेस बनाई जाएगी
फ्लाईओवर अब रिडिजाइन किया जाएगा। इस फ्लाईओवर के फुटपाथ को तोड़कर करीब तीन फीट अतिरिक्त टर्निंग स्पेस बनाई जाएगी। साथ ही रेलवे ने ब्रिज को 10 फीट और चौड़ा करने की अनुमति भी दे दी है, जिससे इसमें चार फीट और चौड़ा किया जाएगा। इसका निर्माण ठेकेदार अपने खर्च पर करेगा। फ्लाईओवर पर इलेक्ट्रिक सिग्नल, स्पीड ब्रेकर, रैलिंग और रोड साइन जैसी आवश्यक सुरक्षा सुविधाएं भी लगाई जाएंगी। सरकार द्वारा इस ब्रिज की जांच करवा ली गई है और यह स्पष्ट किया गया है कि इसका ड्राइंग, डिजाइन और निर्माण एक सामूहिक सहमति का परिणाम था। इस फ्लाईओवर को प्रशासकीय स्वीकृति वर्ष 2018 में मिली थी, लेकिन तत्कालीन सरकार की असहमति के कारण निर्माण 2022 में शुरू हुआ। डिजाइन की अनुमति रेलवे से प्राप्त हुई थी। निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सहमति से हुआ।

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भोपाल के 90 डिग्री वाले ब्रिज पर लोग अब फोटो खिंचवाने पहुंच रहे हैं। - फोटो : अमर उजाला
तीन जांच टीमों की रिपोर्ट में दिए सुझाव
सरकार ने तीन टीमों से फ्लाईओवर की सुरक्षा जांच कराई। एनएचएआई अधिकारी आरओ एसके सिंह ने सुझाव दिया कि इस ब्रिज पर 30 किमी/घंटा से अधिक रफ्तार की अनुमति न हो। ब्रिज की दीवार ऊंची की जाए। सटीक संकेत और पर्याप्त लाइटिंग व्यवस्था हो। फुटपाथ को तोड़कर ब्रिज में शामिल किया जाए। वहीं, एमपीआरडीसी इंजीनियर ने सुझाव दिए कि बड़े वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित किया जाए। जब तक चौड़ीकरण नहीं हो जाता, ब्रिज पर यातायात सीमित रखा जाए। तेज गति को रोकने के लिए रोड डिजाइन में परिवर्तन किया जाए। जहां सड़कों का मिलन बिंदु है, वहां दीवार मोटी और ऊंची हो। विचार चल रहा है कि इस ब्रिज से सिर्फ दोपहिया वाहनों को ही गुजरने दिया जाए।

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भोपाल के 90 डिग्री वाले ब्रिज पर लोग अब फोटो खिंचवाने पहुंच रहे हैं। - फोटो : अमर उजाला
निर्माण में आई तकनीकी चुनौतियां
ब्रिज के निर्माण में तकनीकी चुनौतियां थीं। एक ओर मेट्रो लाइन, दूसरी तरफ रेलवे लाइन और तीसरी तरफ स्टेडियम है। यह ब्रिज करीब पांच लाख की आबादी की आवाजाही का मुख्य जरिया है। वर्ष 2022 में रेलवे ने बिना राज्य सरकार से परामर्श लिए फाटक बंद कर दिया, जिससे आवागमन बाधित हुआ। इस परिस्थिति में ब्रिज निर्माण का निर्णय लेना आवश्यक हो गया।

अभियंता का कोई दोष नहीं 
लोक निर्माण विभाग के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई ने बताया कि जांच दलों ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। इसमें कहा गया कि फ्लाईओवर का निर्णय सामूहिक था, इसलिए किसी एक अभियंता की गलती नहीं मानी जा सकती। रेलवे ने निर्माण की विधिवत अनुमति दी थी। ब्रिज का निर्माण सामूहिक सहमति से हुआ है। इसकी अनुमति रेलवे ने दी थी, अभियंता का कोई दोष नहीं है।
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