धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री
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यह कहा था बाबा ने, जिससे लोग हैं नाराज
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा था कि यहां पर बहुत से बुद्धि और तर्क के लोग ब्राह्मण और क्षत्रियों में आपस में टकराने के लिए उपाय करते रहते हैं। कहा जाता है कि 21 बार क्षत्रियों से भूमि विहिन कर दी गई थी। बात मजाक और हंसी की यह है कि अगर एक बार क्षत्रियों को मार दिया गया तो 20 बार क्षत्रिय कहां से आए? 21वीं बार की जरूरत क्यों पड़ी? ये क्षत्रिय अचानक से प्रकट कहां से हो जाते थे? सहस्रबाहु जिस वंश से था, उस वंश का नाम था हैहयवंश> हैहयवंश के विनाश के लिए भगवान परशुराम ने फरसा अपने हाथ में उठाया था> हैहयवंश का राजा बड़ा ही कुकर्मी, साधुओं पर अत्याचार करने वाला, स्त्रियों से बलात्कार करने वाला था> जितने भी क्षत्रिय वंश के राजा थे, ऐसे अत्याचारियों के खिलाफ ही भगवान परशुराम ने फरसा उठाया था। शास्त्रों में कहा है कि साधु का काम ही है कि दुष्टों को ठिकाने लगाते रहना। इस वजह से उन्होंने हैहयवंश के राजाओं को मारना प्रारंभ किया। उन्होंने शास्त्र की मर्यादाओं का पालन करते हुए कभी भी न तो स्त्रियों पर फरसा उठाया और न बच्चों पर। ये बच्चे युवा हुए और उन्होंने भी अत्याचार प्रारंभ किया। उन्होंने भी अपने पिता का बदला लेने के लिए भगवान परशुराम पर आक्रमण किया। इसके बाद भगवान परशुराम ने उन अताताइयों का वध किया। उनकी भी संतानें थीं, उनका भी वध किया। इस तरह 21 बार पृथ्वी को क्षत्रिय विहिन किया।'