एमपी कांग्रेस : राजनीतिक जानकार बताते हैं कि कांग्रेस इन दिनों कई चुनौतियों का सामना कर रही है।
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कई बड़े नेता खुद को समेटकर बैठे
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की सक्रियता भी अब कम हो गई है। वे भोपाल के बजाय छिंदवाड़ा और दिल्ली में ज्यादा सक्रिय रहते हैं। प्रदेश के मामलों में उनके बयान भी काफी कम आते हैं। पटवारी को प्रदेशाध्यक्ष बनाए जाने के बाद से ही कमलनाथ ने खुद की भूमिका पार्टी में सीमित कर दी थी। वे कांग्रेस नेता राहुल गांधी की गुड लिस्ट में हैं, लेकिन फिर भी वे प्रदेश की राजनीति में हस्तक्षेप नहीं कर रहे हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहे अरुण यादव और कांतिलाल भूरिया की निमाड़ और आदिवासी अंचल में मैदानी पकड़ है, लेकिन उन्होंने भी पार्टी में अपनी भूमिका सीमित कर ली है। आक्रामक रणनीति बनाने में मदद करने के बजाय दोनों नेता सिर्फ कांग्रेस के आयोजनों में नजर आते हैं। पटवारी भी भूरिया को ज्यादा महत्व देने के बजाय आदिवासी अंचल से नाता रखने वाले नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के साथ तालमेल बनाकर चल रहे हैं।
अंदरखाने हो रही वरिष्ठ नेताओं की खिलाफत भी चर्चा में
हाल ही में उज्जैन के वीर भारत न्यास पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के बीच दिखी अलग बयानबाजी पर संगठन के भीतर भी खुली खिलाफत दिखने लगी। कांग्रेस की प्रदेश महासचिव निधि सत्यव्रत चतुर्वेदी ने फेसबुक पोस्ट के जरिए दिग्विजय सिंह पर तीखा हमला बोलते हुए पार्टी नेतृत्व से उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग कर डाली। पूर्व सांसद सत्यव्रत चतुर्वेदी की बेटी निधि ने अपनी पोस्ट में कहा कि किसी भी वरिष्ठ नेता को प्रदेश अध्यक्ष के खिलाफ सार्वजनिक मंच से बयान देकर पार्टी की छवि को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए। उनका कहना है कि यदि किसी मुद्दे पर असहमति थी तो उसे संगठन के भीतर उठाया जाना चाहिए था, न कि मीडिया के सामने। निधि चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि दिग्विजय सिंह व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा और पुत्र-मोह के कारण संगठन को कमजोर कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि अपने बेटे जयवर्धन सिंह को आगे बढ़ाने की राजनीति में पार्टी अनुशासन की अनदेखी की जा रही है।
निधि ने अपनी पोस्ट में 2020 में कांग्रेस सरकार गिरने, 2023 विधानसभा चुनाव, 2024 लोकसभा चुनाव और हालिया राज्यसभा चुनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि लगातार अंदरूनी खींचतान से पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा है। हालांकि कांग्रेस संगठन ने इस पर एक्शन लिया है और निधि को नोटिस थमा दिया गया। दूसरी तरफ, महिला उत्पीड़न प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष प्रियंका किरार को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। आरोप है कि उन्होंने अपने जिला कांग्रेस अध्यक्ष के खिलाफ सोशल मीडिया पर पोस्ट की, जो पार्टी अनुशासन के खिलाफ माना गया। उनसे भी सात दिन के भीतर जवाब देने को कहा गया है। प्रदेश कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि यदि दोनों नेताओं का जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो संगठनात्मक अनुशासन के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।
विधायक-पूर्व विधायक भी उतरे विरोध में
विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भूमि आवंटन का गंभीर मुद्दा उठाया, लेकिन दिग्विजय सिंह के बयान के बाद कार्यकर्ताओं में भ्रम की स्थिति बन गई है। उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस जनता के बीच जाएगी तो लोग पूछेंगे कि आखिर सही कौन है, जीतू पटवारी या दिग्विजय सिंह। पहले पार्टी के भीतर एक राय बननी चाहिए, तभी आंदोलन प्रभावी होगा। पूर्व विधायक प्रवीण पाठक ने भी नाराजगी जताते हुए कहा कि मैदान में पार्टी कार्यकर्ता संघर्ष कर रहा है, लेकिन यदि वरिष्ठ नेता ही प्रदेश अध्यक्ष के रुख को कमजोर करेंगे तो जनता के सामने जवाब देना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान पार्टी की पूरी मुहिम को नुकसान पहुंचा सकते हैं और कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटेगा।
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