सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव
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दरअसल, इन नतीजों ने हालात से समझौता करके बैठी सपा की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। ये उम्मीदें इसलिए और बढ़ गई हैं, क्योंकि सपा के पक्ष में जो नतीजे आए हैं, उनमें सपा नेतृत्व की बहुत मेहनत नहीं है। सिवाय इसके कि इटावा, मैनपुरी, एटा जैसे इलाके में सपा और प्रसपा के उम्मीदवार मुलायम, अखिलेश तथा शिवपाल के नाम व झंडे को एक साथ लेकर चुनाव लड़े।
इनको बड़े पैमाने पर मिली जीत और अन्य स्थानों से आए नतीजों ने यह संदेश दिया है कि जनता उन्हें विकल्प मानती है। अखिलेश-शिवपाल मिलकर लड़ें तो अब भी उनकी संभावनाएं बरकरार हैं। यह संदेश नए राजनीतिक समीकरणों को जन्म दे सकता है।