कोरोना ने अपनों को छीना। दर्द दिया। जख्म अभी भर ही रहे थे कि दूसरे जख्म उभर आए। ये कहानी है उन महिलाओं की जिन्होंने कोरोना महामारी के दौरान पति को खोया। उनकी दुनिया उजड़ गई। धीरे-धीरे गम से वो उबर रही थीं। जिंदगी भी फिर से पटरी पर लौटने लगी थी। पर...? चुनौतियों का पहाड़ फिर से सामने आकर खड़ा हो गया। वो चेहरे जो अपने थे, जिन्हें अपना माना था, वही विरोध में आकर खड़े हो गए। संपत्ति को लेकर एक-दूसरे के प्रति भरोसे का ऐसा संकट खड़ा हो गया कि मामला घर की दहलीज लांघने लगा। सास-ससुर जो कभी उसे बेटी जैसा दर्जा देते थे, वो सामने आकर खड़े हो गए कि कहीं वह उनके बेटे की सारी संपत्ति न हथिया ले। ऐसे कई मामले वन स्टॉप सेंटर और जिला प्रोबेशन अधिकारी के यहां आए।
कोविड का दूसरा चरण थमने के बाद जहां घरेलू हिंसा बढ़ी थी, बेटे की मौत के बाद बहू को बेघर करने के कई मामले भी सामने आए थे। वहीं बीते दिनों 23 ऐसे मामले 181 वन स्टॉप सेंटर में रिपोर्ट हुए हैं, जिनमें से 6 मामलों में तो विवाद इस कदर बढ़ा कि घर वालों ने बहू के बाहर निकलने तक पर रोक लगा दी। इन सामले में 181 की रेस्क्यू टीम को दखल देना पड़ा। दो मामले फिलहाल अदालत में हैं। बाकी मामलों में काउंसिलिंग के जरिए सुलह का रास्ता निकाला गया। इसके अलावा चार मामले जिला प्रोबेशन अधिकारी के यहां रिपोर्ट हुए हैं।