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वैलेंटाइन वीक: आपको प्यार करना सिखा देंगी प्रेम की ये सच्ची कहानियां

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प्यार पहले भी होता था और आज भी। बदला है तो सिर्फ इजहार-ए-इश्क का तरीका पढ़ें ये प्रेम कहानियां...
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वैलेंटाइन वीक: इनसे सीखें कैसे करें प्यार का इजहार

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प्यार पहले भी होता था और आज भी। बदला है तो सिर्फ इजहार-ए-इश्क का तरीका। एक दौर था जब लोगों को अपने दिल की बात कहने में सालों बीत जाया करते थे या शादी तो हो जाती लेकिन लफ्जों में दिल की बात नहीं कह पाते, लेकिन अब समय के साथ बहुत कुछ बदला है। हमने जाना कि समय के साथ कैसे बदला प्रपोज करने का तरीका।
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वैलेंटाइन वीक: इनसे सीखें कैसे करें प्यार का इजहार

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एम्स दिल्ली में वार्षिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की तैयारी जोरों पर थी। डॉ. अनिल भी साथियों के साथ तैयारी में जुटे थे। सोचा न था कि आने वाले चार दिन उनकी पूरी लाइफ बदल देंगे। हुआ यूं कि डांस परफॉर्मेंस शुरू हुआ तो डॉ. अनिल ने डॉ. पल्लवी को परफॉर्म करते देखा और बस देखते ही रह गए।

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प्रोग्राम खत्म हुआ तो मौका देखकर बातचीत शुरू हुई। चार दिनों के कार्यक्रम के दौरान डॉ. पल्लवी एक बार डॉ. अनिल के विभाग पहुंची तो देखा कि उनके काम करने की सादगी और मरीजों के इलाज का तरीका देखकर प्रभावित हो गई। दोनों ने एक -दूसरे से मोबाइल नंबर बदला और फिर फोन पर बातें शुरू हो गई। कुछ ही समय के अंदर डॉ. अनिल को लगा कि उन्हें देर नहीं करनी चाहिए और एक माह के अंदर ही डॉ. पल्लवी को प्रपोज कर दिया, जिसे उन्होंने स्वीकार किया।
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यह कहानी है केजीएमयू के फिजिकल मेडिसिन एंड रिहेबिलिटेशन विभाग के एचओडी डॉ. अनिल कुमार गुप्ता की। डॉ. अनिल ने बताया कि पहली मुलाकात और सगाई के बीच उन्हें कभी मिलने मौका नहीं मिला। उन्होंने कोरियर से डॉ. पल्लवी को पीच कलर का एक टेडी बियर भेजा, जो आज भी उन्होंने संभाल कर रखा हुआ है।
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ब्वॉयज इंटर कॉलेज में पढ़ने वाले विमलेश राय (सरकारी अधिकारी) ने कभी सोचा भी नहीं था कि उन्हें कभी किसी लड़की से प्यार भी हो सकता है। लगभग 25 साल पहले घर का माहौल भी ऐसा नहीं था कि किसी लड़की से बात भी की जा सके। एक ग्रीटिंग कार्ड भी देना हो तो एक महीना पहले से योजना बनानी पड़ती थी कि कैसे पहुंचाया जाए कि पकड़े न जाएं।
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विमलेश इंटरमीडिएट में थे जब अपने एक दोस्त के घर पार्टी में गए तो उसकी बहन की दोस्त मिनाक्षी को पहली बार देखा। ज्यादा बात तो नहीं हुई लेकिन फिर भी उनकी सादगी विमलेश को भा गई। अचानक एक दिन साथ में पढ़ने वाले दोस्त ने कहा कि वह अपनी बहन से मिलने उसके कॉलेज जा रहा है तो विमलेश भी साथ हो लिए और एक बार फिर मिनाक्षी से सामना हो गया।

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धीरे-धीरे दोनों में बातें होने लगी और कॉमन फ्रेंड्स के यहां पार्टी में कभी मुलाकात हो जाती, लेकिन इतनी हिम्मत न हुई कि दिल की बात कह सकें। पहली मुलाकात के लगभग चार साल के बाद विमलेश ने 1995 में मिनाक्षी को इतना ही पूछा कि क्या वह उनके साथ अपनी जिंदगी गुजारना पसंद करेंगी। मिनाक्षी ने सिर्फ मुस्कुराया और विमलेश को जवाब मिल गया।

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प्रो. मनीष गौड़ को 1995 का आज भी वह दिन याद है जब बहन की गोद भराई की रस्म में पहली बार पूजा को देखा। पैरेंट्स तो एक-दूसरे को पहले से जानते थे लेकिन उनकी यह पहली मुलाकात थी। वैसे तो उस समय लड़का-लड़की का बात करना ही बड़ी बात मान लिया जाता था, लेकिन डॉ. मनीष ने हिम्मत करके पूजा से उनके घर का लैंडलाइन नंबर मांगा। पूजा ने भी बिना इन्कार किए नंबर दे दिया।

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धीरे-धीरे फोन पर बात होने लगी यह कहानी है इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के कम्प्यूटर साइंस विभाग के अध्यक्ष प्रो. मनीष गौड़ और स्पेशल खास तौर से मंदबुद्घि व डिस्लेक्सिया से ग्रसित बच्चों की काउंसलिंग करके उन्हें मुख्य धारा से जोड़ने के लिए प्रयासरत पूजा गौड़ की। डॉ. मनीष ने बताया कि उनके घर में एक ही नंबर से दो लैंडलाइन फोन पैरेलेल लगे हुए थे।
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एक बार पूजा का कॉल आने पर वह बात कर रहे थे तो पैरेंट्स ने दूसरे रिसीवर पर दोनों की बातें सुन ली और पोल खुल गई। हालांकि घर पर बहुत अधिक समस्या नहीं आई और दोनों के पैरेंट्स ने आपस में बात करके इस लव को अरेंज मैरिज में बदल दिया। उन्होंने बताया कि पूजा को रिस्ट वॉच बहुत पसंद है इसलिए पहला गिफ्ट भी एक ब्रांडेड रिस्ट वॉच ही दी थी। वह गिफ्ट देने का सिलसिला आज तक जारी है और वह अभी तक पूजा को ढेरों रिस्ट वॉच गिफ्ट कर चुके हैं।
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