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UPSC: काकोरी में चौकी प्रभारी की बेटी बनी आईएएस अफसर, जिला जज के बेटे को 12वीं रैंक, इन मेधावियों ने लखनऊ का नाम किया रोशन

Tue, 31 May 2022 06:44 PM IST
ishwar ashish अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
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ज्योति मिश्रा व अपने माता-पिता के साथ यशार्थ शेखर। - फोटो : amar ujala
यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा 2021 में राजधानी लखनऊ के कई मेधावियों ने सफलता का स्वाद चखा है। ज्योति मिश्रा, मोहम्मद साकिब इकबाल, चैतन्य, अंकिता मिश्रा समेत कई अभ्यर्थियों ने परीक्षा में सफलता के झंडे गाड़े हैं। इनमें अधिकतर इंजीनियरिंग बैकग्राउंड वाले हैं। अमर उजाला से बातचीत में मेधावियों ने सफलता का एक ही मूल मंत्र बताया कि सिलेबस को ध्यान में रखकर तैयारी करें और पेपर से जमकर अभ्यास करें।

पुलिस चौकी प्रभारी की बिटिया बनी अफसर
यूपीएससी की परीक्षा में 432वीं रैंक पाने वाली ज्योति मिश्रा का कहना है कि मैं वर्तमान में दिल्ली स्थित गृह मंत्रालय में कार्यरत हूं। लखनऊ में स्कूलिंग के बाद बीकॉम की पढ़ाई के लिए दिल्ली यूनिवर्सिटी चली गई। वहां पढ़ाई के साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगी और दूसरे प्रयास में ही सफलता हासिल की है। पिता सुरेश नारायण मिश्रा कोतवाली काकोरी के समदा पुलिस चौकी के प्रभारी हैं। उन्होंने वीडियो कॉल से बात की तो उनकी आंखों से खुशी के आंसू झलक आए। मैंने अपने लक्ष्य को लेकर फोकस पढ़ाई की। मेरी सलाह है कि अभ्यर्थी केवल फोकस सिलेबस की ही पढ़ाई करें और जमकर अभ्यास करें। ज्यादा से ज्यादा पेपर सॉल्व करें।
रैंक -- 432

मेरा आईएएस बनने का सपना साकार हुआ
यशार्थ शेखर का कहना है कि शुरू से ही आईएएस बनने का सपना देखा था। तीसरे अटेंप्ट में यह साकार होने जा रहा है। सीएमएस गोमती नगर से हाईस्कूल और लामार्टिनियर से इंटर की पढ़ाई पूरी करने के बाद दिल्ली के सेंट स्टीफन कॉलेज से इकोनॉमिक्स में ऑनर्स की पढ़ाई वर्ष 2018 में पूरी की। इसके बाद से यूपीएससी की तैयारी में जुट गया। मैंने रिवीजन और टेस्ट में सबसे ज्यादा फोकस किया। परीक्षा से पहले 26 टेस्ट दिए। दूसरे अभ्यर्थियों को मेरी सलाह है कि वे रिविजन पर ज्यादा फोकस करें। सिलेबस को कम रखें व फोकस पढ़ाई करें। ज्यादा से ज्यादा टेस्ट दें। मूलरूप से हमीरपुर निवासी पिता लल्लू सिंह वर्तमान में बलरामपुर में जिला जज है और मूलरूप से बांदा निवासी मां शांति सिंह गृहिणी हैं। मेरी उत्तर प्रदेश में काम करने की चाह है।
रैंक -- 12

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अपने माता-पिता के साथ आशुतोष कुमार। - फोटो : amar ujala
पढ़ाई के दौरान दोस्तों से मिली प्रेरणा
आशुतोष कुमार का कहना है कि सेंट फिडेलिस से इंटर खत्म करने के बाद मैंने आईआईटी कानपुर से इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग से वर्ष 2017 में बीटेक किया। दोस्तों को यूपीएससी की तैयारी करते देखा तो मुझे भी तैयारी करने की प्रेरणा मिली। माता-पिता ने इसमें मेरा साथ दिया और इंजीनियरिंग खत्म करने के बाद तैयारी के लिए लखनऊ लौट आया। चौथे अटेंप्ट में सफलता हासिल की। तैयारी के दौरान जो विषय कमजोर थे उन पर ज्यादा फोकस किया। पिता अजय कुमार मिश्रा जेएनपीजी के केमेस्ट्री विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं और मां प्रवीणा मिश्रा जूनियर हाईस्कूल में शिक्षिका हैं।
रैंक -- 77
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अंकिता मिश्रा - फोटो : amar ujala
महिला सुरक्षा के लिए करूंगी काम
अंकिता मिश्रा का कहना है कि एक महिला होने के नाते महिला सुरक्षा और सशक्तीकरण के लिए मुझसे जो भी बेहतर हो सकेगा करूंगी। सिविल की तैयारी में ऑप्सनल की बड़ी भूमिका होती है। इसके साथ-साथ मैंने जीएस पर काफी फोकस किया। अच्छी स्टैंडर्ड बुक्स से तैयारी करनी चाहिए और नोट्स तैयार कर रिवीजन करना चाहिए। मैंने आरएलबी सी ब्लॉक से 11वीं, 12वीं की और एमएनएनआईटी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया। एक साल पेप्सिको इंडिया में जॉब की और फिर असिस्टेंट कमिश्नर कॉमर्सियल टैक्स बनीं। इस बार रैंक और बेहतर मिली है। पिता डीसी मिश्रा पटना में डायरेक्टर नायलेट के पद पर तैनात हैं। मां इंदू मिश्रा गृहिणी हैं।
रैंक -- 169

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अपने परिवार के साथ मोहम्मद शाकिब इकबाल। - फोटो : amar ujala
मेरी गलतियों ने की तैयारी में मदद
मोहम्मद साकिब इकबाल का कहना है कि मेरा पहले से इस क्षेत्र में जाने का कोई प्लान नहीं था। अपनी जॉब के दौरान लगा कि इस प्रोफेशन को भी अपना सकता हूं। मोंटफोर्ट से स्कूली शिक्षा के बाद जामिया मिलिया से 2014 में मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। मल्टीनेशनल कंपनी में काम करने के बाद वर्ष 2018 में यूपीएससी की तैयारी के लिए जॉब छोड़ दी। इसकी तैयारी के लिए कोई कोचिंग नहीं की। छठे अटेंप्ट में मैंने यह सफलता प्राप्त की है। तैयारी के लिए गलतियों से सीखते हुए स्मार्ट वर्क की तरफ फोकस किया। पिता समशाद आलम सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी हैं और मां अफसर जहां गृहिणी हैं।
 रैंक -- 279
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अपने माता-पिता के साथ चैतन्य। - फोटो : amar ujala
मॉक टेस्ट से तैयारी में मिली सहूलियत
चैतन्य ने बताया कि मेरे पिता जी कैप्टन सुधांशु पेशे से एक शिक्षक हैं। उन्होंने मुझे हमेशा आईएएस बनने के लिए प्रेरित किया। मुझे अवसर मिलेगा तो महिलाओं और बुजुर्गों की बेहतरी के लिए काम करूंगा। मुझे तीसरे प्रयास में सफलता मिली है। मॉक टेस्ट से तैयारी में काफी सहूलियत मिली। पुराने पेपर सॉल्व करते रहना चाहिए और पूरे सिलेबस को कवर करना चाहिए, क्योंकि सवाल कहीं से भी पूछे जा सकते हैं। मूल रूप से इंदिरा नगर का रहने वाला हूं और आरएलबी सर्वोदय नगर से हाई स्कूल व इंटर और बीबीडी से बीटेक किया है। मां रीता गृहिणी हैं।
रैंक- 397
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