यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा 2021 में राजधानी लखनऊ के कई मेधावियों ने सफलता का स्वाद चखा है। ज्योति मिश्रा, मोहम्मद साकिब इकबाल, चैतन्य, अंकिता मिश्रा समेत कई अभ्यर्थियों ने परीक्षा में सफलता के झंडे गाड़े हैं। इनमें अधिकतर इंजीनियरिंग बैकग्राउंड वाले हैं। अमर उजाला से बातचीत में मेधावियों ने सफलता का एक ही मूल मंत्र बताया कि सिलेबस को ध्यान में रखकर तैयारी करें और पेपर से जमकर अभ्यास करें।
पुलिस चौकी प्रभारी की बिटिया बनी अफसर
यूपीएससी की परीक्षा में 432वीं रैंक पाने वाली ज्योति मिश्रा का कहना है कि मैं वर्तमान में दिल्ली स्थित गृह मंत्रालय में कार्यरत हूं। लखनऊ में स्कूलिंग के बाद बीकॉम की पढ़ाई के लिए दिल्ली यूनिवर्सिटी चली गई। वहां पढ़ाई के साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगी और दूसरे प्रयास में ही सफलता हासिल की है। पिता सुरेश नारायण मिश्रा कोतवाली काकोरी के समदा पुलिस चौकी के प्रभारी हैं। उन्होंने वीडियो कॉल से बात की तो उनकी आंखों से खुशी के आंसू झलक आए। मैंने अपने लक्ष्य को लेकर फोकस पढ़ाई की। मेरी सलाह है कि अभ्यर्थी केवल फोकस सिलेबस की ही पढ़ाई करें और जमकर अभ्यास करें। ज्यादा से ज्यादा पेपर सॉल्व करें।
रैंक -- 432
मेरा आईएएस बनने का सपना साकार हुआ
यशार्थ शेखर का कहना है कि शुरू से ही आईएएस बनने का सपना देखा था। तीसरे अटेंप्ट में यह साकार होने जा रहा है। सीएमएस गोमती नगर से हाईस्कूल और लामार्टिनियर से इंटर की पढ़ाई पूरी करने के बाद दिल्ली के सेंट स्टीफन कॉलेज से इकोनॉमिक्स में ऑनर्स की पढ़ाई वर्ष 2018 में पूरी की। इसके बाद से यूपीएससी की तैयारी में जुट गया। मैंने रिवीजन और टेस्ट में सबसे ज्यादा फोकस किया। परीक्षा से पहले 26 टेस्ट दिए। दूसरे अभ्यर्थियों को मेरी सलाह है कि वे रिविजन पर ज्यादा फोकस करें। सिलेबस को कम रखें व फोकस पढ़ाई करें। ज्यादा से ज्यादा टेस्ट दें। मूलरूप से हमीरपुर निवासी पिता लल्लू सिंह वर्तमान में बलरामपुर में जिला जज है और मूलरूप से बांदा निवासी मां शांति सिंह गृहिणी हैं। मेरी उत्तर प्रदेश में काम करने की चाह है।
रैंक -- 12