अमौसी एयरपोर्ट पर डॉग स्क्वॉड में सीआईएसफ की शान रहे एकलिस और ओल्डो आठ साल की सेवा के बाद रिटायर हो गए। उनकी विदाई पर सीआईएसफ अधिकारियों की आंखें नम हो गई। दोनों श्वान लेब्राडोर नस्ल के थे।
एयरपोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी का प्रकरण हो या फिर मॉक ड्रिल में आतंकवादियों द्वारा प्लेन हाईजैक का मामला। सीआईएसएफ के डॉग स्क्वायड के खूंखार व जांबाज एकलिस व ओल्डो की फुर्ती हर किसी को दीवाना बना लेती थी।
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ये हैं मानक
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- फोटो : amar ujala
दोनों पैकेट में बंद विस्फोटक को भी दूर से सूंघने की क्षमता रखते थे। डॉग स्क्वॉयड में शामिल ये दोनों जांबाज किसी कमांडो से कम नहीं थे, लेकिन आठ साल की सेवा पूरी होने के बाद इन्हें रिटायर कर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि डॉग स्क्वायड में श्वानों को शामिल करने से पहले कठोर प्रशिक्षण दिया जाता है। वहीं, रिटायर करने से पहले भी लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इसमें उनके स्वास्थ्य का परीक्षण प्रमुख अंग है। दो के रिटायर होने के साथ तीसरी मौली भी जल्द रिटायर हो जाएगी। डॉक्टर उसकी जांच कर रहे हैं।
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डॉग स्क्वॉयड में शामिल श्वानों पर सीआईएसएफ के अधिकारी गर्व करते हैं। विस्फोटक के साथ साथ ड्रग्स भी पहचानने में माहिर हैं। वर्ष 2012 में अमौसी एयरपोर्ट पर केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल सीआईएसएफ में कुल छह श्वानों को भर्ती किया गया था। इसमें एकलिस व ओलडो सेवानिवृत्त हो गए हैं और तीसरी मौली जल्द ही रिटायर हो जाएगी। खास बात तो इन श्वानों की सात से आठ साल की ट्रेनिंग भी कराई जाती है।
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नए श्वान जल्द होंगे भर्ती
सीआईएसएफ के दो जांबाज श्वान रिटायर हो गए हैं और तीसरी रिटायर होने की प्रक्रिया में है। ऐसे में डॉग स्क्वायड में सिर्फ तीन श्वान ही बचेंगे, लिहाजा एयरपोर्ट की सुरक्षा के लिए नए श्वान जल्द ही भर्ती किए जाएंगे।
भावुक हुए अधिकारी
इकलिस और ओल्डो के रिटायरमेंट के अवसर पर सीआईएसएफ के अधिकारी भावुक भी हो गए। कुछ लोगों की आंखें भी नम हो गई। एयरपोर्ट सीआईएसएफ के सीनियर कमांडेंट पीपी सिंह को श्वान बहुत प्रिय रहे हैं।