Building collapsed in Lucknow: ट्रांसपोर्ट नगर में शनिवार शाम एक तीन मंजिला इमारत ढह गई। बिल्डिंग अभी दस साल पुरानी ही थी। इस हादसे में एक कारोबारी सहित आठ लोगों की मोत हो गई। शहर के लोकबंधु अस्पताल में लोगों का इलाज चल रहा है।
Building collapsed in Lucknow: ट्रांसपोर्ट नगर में शनिवार शाम एक तीन मंजिला इमारत ढह गई। बिल्डिंग अभी दस साल पुरानी ही थी। इस हादसे में एक कारोबारी सहित आठ लोगों की मोत हो गई। शहर के लोकबंधु अस्पताल में लोगों का इलाज चल रहा है।
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पूरी रात होती रही खुदाई।
- फोटो : अमर उजाला।
बिल्डिंग में मलबा इतना अधिक था कि रविवार की सुबह तक खुदाई का काम चल रहा है। राहत और बचाव की टीमें पूरी रात खुदाई करती रहीं।
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- फोटो : अमर उजाला
ट्रांसपोर्टनगर में शनिवार शाम बारिश के दौरान शहीद पथ किनारे स्थित एक तीन मंजिला इमारत भरभराकर गिर गई। हादसे में एक कारोबारी समेत आठ लोगों की मौत हो गई जबकि मलबे में दबे 24 लोगों को निकालकर राजधानी के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
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- फोटो : अमर उजाला
इनमें 3 लोगों की हालत गंभीर है, जिनका ट्रामा सेंटर में इलाज चल रहा है। मलबे में अभी कई और लोगों के दबे होने की आशंका है। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, दमकल और पुलिस की टीमें राहत-बचाव कार्य में देर रात तक जुटी रहीं।
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- फोटो : अमर उजाला
आशियाना निवासी राकेश सिंघल का हरमिलाप (ग्राउंड प्लस 2) टावर था। टावर के ग्राउंड फ्लोर पर आशियाना निवासी जसमीत साहनी का मोबिल ऑयल और दूसरी मंजिल पर दवा का गोदाम था। पहली मंजिल पर मनचंदा का गिफ्ट सेंटर का गोदाम था। शनिवार दोपहर करीब साढ़े तीन बजे तेज बारिश शुरू हुई। आधे घंटे बाद अचानक पूरी बिल्डिंग ढह गई।
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- फोटो : अमर उजाला
इससे आसपास भगदड़ मच गई। सबसे पहले पुलिस मौके पर पहुंची। इसके बाद दमकल, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें पहुंचीं और राहत-बचाव शुरू किया।
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एक-एक कर 32 लोगों को निकाला गया। इसमें से कारोबारी जसमीत सिंह साहनी (45) एल्डिको ग्रीन गोमतीनगर, पंकज तिवारी (40) रजनीखंड आशियाना, धीरज गुप्ता (48) बंथरा, अरुण सोनकर (28) व राकेश कुमार (32) कृष्णानगर, जगरूप (34) उन्नाव, इंजीनियर रूद्र यादव (25) साउथ सिटी, पीजीआई और राजकिशोर (27) की मौत हो गई। घायलों का इलाज जारी है।
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- फोटो : अमर उजाला
हादसे के वक्त एक कंटेनर से दवाओं की खेप उतारकर गोदाम में पहुंचाई जा रही थी। कंटेनर चालक राजेश कंटेनर की ड्राइविंग सीट पर बैठे थे। ट्रक का आधा से अधिक हिस्सा बिल्डिंग के भीतर था। बिल्डिंग ढहते ही कंटेनर का आधे से अधिक हिस्सा मलबे में दब गया। हर तरफ धूल का गुबार छा गया। राकेश केबिन के दरवाजे से कूदकर भाग गए, जिससे उनकी जान बच सकी।
टावर का जरा सा हिस्सा बचा
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- फोटो : अमर उजाला
टावर का करीब 90 फीसदी हिस्सा जमींदोज हुआ है। एक हिस्सा अब भी खड़ा है। जिसका छज्जा और सीढ़ी दायीं तरफ लटक रबी है। इससे रेस्क्यू करने में भी खतरा है। एहतियात बरतते हुए रेस्क्यू टीमें मलबा हटाकर लोगों को निकालने में जुटी रहीं।
बिल्डिंग ढहने के पीछे क्या वजह रही फिलहाल स्पष्ट नहीं हो सका। एलडीए के उपसचिव अतुल कृष्ण सिंह ने बताया कि भवन में बेसमेंट नहीं है। न ही बेसमेंट को लेकर किसी प्रकार की खोदाई या अन्य कार्य हो रहा था। बिल्डिंग के नक्शे की भी जांच की गई। नक्शा 31 अगस्त, 2010 को कुमकुम सिंघल द्वारा पास करवाया गया था।