बहुत से लोगों को शायद यह पढ़कर आज भरोसा न हो कि आजादी मिलने के एक दशक बाद तक लखनऊ के कई इलाके सिर्फ रईसों और साहब लोगों की मोटर कारों के लिए ही रिजर्व थे। इन इलाकों में साधन से जाने के लिए मोटर कार जरूरी थी। मोटर कार नहीं है तो सिर्फ पैदल जाने का विकल्प था और वह भी किनारे-किनारे। चारबाग स्टेशन के लिए भी यही नियम लागू था।
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मुख्यमार्ग (आज जहां आरक्षण केंद्र है) से स्टेशन तक रिक्शों के जाने पर प्रतिबंध था। बात 1956-57 की होगी। समाजवादी नेता राजनारायण को यह बात मालूम हुई तो एक दिन वे रिक्शा से ही चारबाग जा पहुंचे। उनका रिक्शा मुख्यमार्ग से जैसे ही स्टेशन की तरफ मुड़ा पुलिस वालों ने रोक दिया। राजनारायण के तेवर गरम।
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तुरंत उसी रिक्शे पर खड़े हो गए और शुरू कर दिया भाषण। समाजवादी नेता डॉ. सी.पी. राय बताते हैं, ‘ राजनारायण बोले, ‘देश आजाद हो गया। अंग्रेज चले गए लिकिन अंग्रेजों का कानून अब भी लागू है। मैं विधायक हूं। फिर भी मेरा रिक्शा स्टेशन तक नहीं जा सकता।
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डॉ. राय बताते हैं कि कुछ ही देर में वहां हजार से ऊपर लोग एकत्र हो गए। शुरू हो गई तत्कालीन सरकार के खिलाफ नारेबाजी।