‘ठाकुर’ के बारे में जानने का क्रेज सिर्फ दर्शकों में ही नहीं, बल्कि जू के स्टाफ में भी रहा। रविवार को जू का स्टाफ भी रेस्क्यू टीम से तेंदुए को पकड़े जाने के आठ घंटे के दौरान के किस्से को सुनता रहा।
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जू में लगा दर्शकों का मेला
- फोटो : amar ujala
लखनऊ में शनिवार को आठ घंटे तक दहशत फैलाए रखने वाले तेंदुए ‘ठाकुर’ का नया ठिकाना चित्रकूट के जंगल हो सकते हैं। लखनऊ से करीब ढाई सौ किलोमीटर दूर उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश के जंगलों में उसे आजाद करने की योजना बना रहा है वन विभाग। रविवार को नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान और वन विभाग मुख्यालय के आला अधिकारियों ने उसके लिए ‘सिक्योर रिलीफ प्लान’ पर दिनभर चर्चा की।
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लखनऊ जू
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यूपी के प्रमुख वन संरक्षक, वन्यजीव एसके उपाध्याय ने रविवार को बताया कि पकड़ा गया तेंदुआ पूरी तरह से वयस्क है और स्वस्थ है। वह आगे चलकर तेंदुओं का कुनबा बढ़ा सकता है। चिकित्सकों से परामर्श कर उसे हम चित्रकूट केजंगलों में रानीपुर रेंज के आसपास छोड़ने की तैयारी कर रहे हैं। यूपी के अलावा मध्य प्रदेश बॉर्डर केजंगलों में उसे पनाह मिलेगी, वहां का प्राकृतिक परिस्थितियां उसके अनुकूल रहेंगी। उन्होंने बताया कि विभाग एक और लोकेशन पर भी विचार कर रहा है।
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तेंदुआ
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आठ घंटे की मशक्कत के बाद पकड़ में आए तेंदुए ने रविवार को भी अपना हिंसक रवैया अपनाये रखा। सुबह से न उसने चिकित्सकों को ही पास आने दिया न ही कीपरों को। बमुश्किल जू स्टाफ ने उसे तीन किलो मुर्गे का गोश्त दिया, जिसे दोपहर तक उसने चट कर डाला। उपनिदेशक और वरिष्ठ वन्यजीव चिकित्सक डॉ. उत्कर्ष ने बताया कि एक व्यस्क तेंदुए ने अपना शिकार खुद कर खाया हो और उसे कुछ देर बाद ही पकड़ लिया जाए, तो ऐसे में उसका गुस्सा बढ़ जाना स्वाभाविक है।
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तेंदुआ
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इसके साथ भी ऐसा ही हुआ है। आमतौर पर एक तेंदुआ सात से आठ किलो बकरे का गोश्त खाता है। चूंकि अभी यह हिंसक है और स्थिर नहीं है, इसलिए इसे भरपूर नाश्ता दे दिया गया है। अभी इंतजार किया जा रहा है कि यह शांत हो जाए।
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दर्शकों का मेला
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ठाकुर कहां है? ठाकुरगंज के स्कूल में घुस आए तेंदुए को पकड़ कर कहां रखा गया है? क्या तुमने ठाकुर को देखा? अरे, ठाकुर तो कहीं दिख ही नहीं रहा...। इस जैसे कई-कई सवाल और सबके केंद्र में था शनिवार को पकड़ कर लाया गया तेंदुआ। रविवार छुट्टी का दिन, खिली गुनगुनी धूप में दस हजार दर्शक नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान पहुंचे। जू के स्टाफ मणि, इजहार ने बताया कि प्राणि उद्यान आने वाला हर तीसरा दर्शक ठाकुरगंज से पकड़ कर लाये गये तेंदुए का पता पूछ रहा था। जू में अब 13 तेंदुए हो गए हैं।
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जू में दर्शकों का मेला
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‘ठाकुर’ के बारे में जानने का क्रेज सिर्फ दर्शकों में ही नहीं, बल्कि जू के स्टाफ में भी रहा। जू का स्टाफ भी मजमा लगाए रेस्क्यू टीम से तेंदुए को पकड़े जाने के आठ घंटे के दौरान के किस्से को सुनता रहा। निदेशक जू, आरके सिंह ने बताया कि कोरेनटाइन में होने के चलते डॉक्टरों व अस्पताल स्टाफ के अलावा कोई उसे देख नहीं सका। एहतियातन किसी को वहां जाने भी नहीं दिया गया। जू में रविवार शाम तक लगभग 10 हजार से अधिक दर्शकों ने सैर की।
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लखनऊ जू
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ठाकुरगंज के स्कूल में घुसने से पहले तेंदुआ कहां था और कितने दिन था? वह किस रास्ते से होकर स्कूल तक पहुंचा? इसका पता लगाने में जुटे हैं वन विभाग के आला अधिकारी। अफसरों का कहना है कि यह पता लगाने के लिए स्कूल के पीछे के जंगली इलाकों, गोमती के किनारे बसे क्षेत्र की पड़ताल की जाएगी।
डीएफओ अवध, मनोज सोनकर ने बताया कि इसके लिए फील्ड स्टाफ को अलर्ट किया गया है कि वो बराबर नजर रखें। साथ ही कॉम्बिंग कर तेंदुए की रिहाइश या उसके पद चिन्हों के निशान ढूंढें। ताकि विशेषज्ञों की मदद से उसके बारे में जानकारी जुटाई जा सके।