आशीष चंद्रा
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बेटियों की शिक्षा को दी एक राह
- आशीष चंद्र, साइंस टीचर, प्राथमिक विद्यालय हसनापुर, माल
हसनापुर मुस्लिम बाहुल्य घनी आबादी वाला गांव है, जिसमें जरदोजी ही जीवकोपार्जन का साधन है। यहां घर-घर काम होता है, इसलिए बच्चों को खासकर बेटियों को स्कूल लाना एक बड़ी चुनौती थी। घंटी-बजाओ, हाजिरी बढ़ाओ जैसे अभियान चलाने वाले इस विद्यालय के टीचर आशीष चंद्र ने इस गांव में बेटियों की शिक्षा को एक नई राह दी। नाजरीन नामक एक बच्ची के दाखिले के साथ ही उन्होंने धीरे-धीरे सबको प्रेरित किया और आज इस विद्यालय की संख्या 103 पहुंच गई। इतना ही नहीं हसनापुर की बेटियां स्नातक तक की डिग्री ले रही हैं। अपने विद्यालय को स्मार्ट स्कूल बनाने वाले आशीष कहते हैं कि हमारे यहां स्मार्ट क्लास है, जहां विज्ञान के कठिन हिस्से को फिल्म के माध्यम से समझाते हैं। प्रश्नोत्तरी को पीपीटी के जरिए रोचक बनाया है। कम्प्यूटर लैब के साथ-साथ हम एलुमिनी मीट भी करते हैं।
मेरा विश्वासः एक अच्छा शिक्षक आशा को जगाता है कल्पना को प्रज्जवलित करता है और सीखने का प्यार बढ़ाता है।