अटल विहारी वाजपेयी की हाजिर जवाबी का तो जवाब ही नहीं था। किस सवाल का उत्तर देना है और पत्रकारों के किस सवाल को हवा में उड़ा देना है, इस शैली के वह मास्टर थे। प्रदेश में मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाली सरकार थी। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष थे केशरी नाथ त्रिपाठी। कानून-व्यवस्था को लेकर केशरी नाथ ने मुलायम सिंह यादव सरकार को बर्खास्त करने की मांग कर दी।
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अटल बिहारी वाजपेयी (फाइल फोटो)
केंद्र में डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार बन चुकी थी। अटल जी सिद्धांतत: निर्वाचित राज्य सरकारों को बर्खास्त करने के पक्षधर नहीं थे। उनका मत था कि बहुमत और अल्पमत का फैसला सदन में ही होना चाहिए।
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अटल बिहारी वाजपेयी (फाइल फोटो)
संयोग से वह लखनऊ आए हुए थे। भाजपा मुख्यालय पर उनकी पत्रकार वार्ता हुई। विधानसभा अध्यक्ष हृदयनारायण दीक्षित ने अपने संस्मरण में लिखा है, 'पत्रकारों ने सवाल किया। अटल जी ने बात घुमा दी। बोले, 'सीताराम केसरी कांग्रेस में हैं।
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अब मुझे उनकी बात पर जवाब देना होगा। पत्रकार हंस पड़े और फिर सवाल किया, 'सीताराम केसरी नहीं बल्कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष केशरी नाथ त्रिपाठी। वाजपेयी जी ने एक कान पर हाथ रखकर कहा, 'समझ में नहीं आया। बकौल दीक्षित, 'मैने अटल जी के कान में कहा, 'ये लोग अपने केशरी नाथ जी का उल्लेख कर रहे हैं।
पर, शायद अटल जी तय करके आए थे कि उन्हें इस सवाल पर कुछ नहीं बोलना है ताकि केशरी की बात भी न कटे और उनका अपना सिद्धांत भी न टूटे। ठहाका लगाते हुए बोले, 'अब जो बात केशरी ही कह दें, उस पर मैं क्यों बोलूं? पत्रकार भी हंसकर रह गए।