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ये कारगिल शहीद परमवीर चक्र हासिल करने के लिए जॉइन करना चाहते थे फौज

Fri, 27 Jul 2018 01:13 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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मनोज पांडेय - फोटो : amarujala
विजय दिवस यानी 26 जुलाई, 1999 का दिन भारतीय इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में अंकित है। इसी दिन कारगिल चोटी को भारतीय सेना के जांबाजों ने पाकिस्तानी घुसपैठियों को खदेड़कर मुक्त कराया था। ऑपरेशन विजय की 19वीं वर्षगांठ शुक्रवार को मनाई जाएगी। शहीद जवानों की शहादत को याद किया जाएगा। कारगिल युद्ध में अदम्य शौर्य और साहस का परिचय देने वाले ऐसे ही जांबाज को नमन करतीं ‘अमर उजाला’ की खास रिपोर्ट...। 
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मनोज पांडेय - फोटो : amarujala
सीतापुर के कमलापुर में जन्मे कैप्टन मनोज पांडेय कारगिल युद्ध के मुख्य नायकों में शामिल हैं। उन्हें 4 मई, 1999 को कारगिल में भारतीय चौकियों को घुसपैठियों से खाली कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। वह पांच नंबर प्लाटून का नेतृत्व कर रहे थे। कैप्टन पांडेय बटालिक सेक्टर में दुश्मनों पर जीत हासिल करते हुए आगे बढ़ रहे थे। उन्हें खालूबार तक हर पोस्ट को जीतने के ऑर्डर थे। इस दौरान उन्हें भयंकर गोलीबारी का सामना करना पड़ा, पर वह आगे बढ़ते गए। उन्होंने दुश्मनों के चार बंकरों को नेस्तनाबूद कर दिया। इसी दौरान वह दुश्मन की गोली का शिकार हो गए।
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मनोज पांडेय - फोटो : amarujala
कैप्टन मनोज पांडेय लखनऊ के एकलौते सैन्य अधिकारी रहे, जिन्हें परमवीर चक्र से नवाजा गया। कैप्टन मनोज उत्तर प्रदेश सैनिक स्कूल से पढ़ाई पूरी करने के बाद राष्ट्रीय रक्षा अकादमी से 1997 में गोरखा राइफल्स में कमीशंड हुए। पिता गोपीचंद पांडेय बताते हैं कि बेटे की शहादत पर कैप्टन मनोज पांडेय चौराहा बनाया गया है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि चौराहे पर विजय दिवस के मुख्य आयोजन के दौरान जाम लग जाता है। वहां ऐसी व्यवस्था की जाए कि आसानी से प्रोग्राम कराए जा सकें।

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मनोज पांडेय - फोटो : amarujala
‘हासिल करना है परमवीर चक्र’
सर्विस सेलेक्शन बोर्ड का साक्षात्कार था। कैप्टन मनोज पांडेय से साक्षात्कार कर्ता ने पूछा कि आप फौज क्यों जॉइन करना चाहते हैं। इस पर मनोज ने तपाक से जवाब दिया था कि मुझे परमवीर चक्र हासिल करना है और उन्होंने ऐसा कर दिखा। दुर्भाग्यवश वह इस सर्वोच्च पुरस्कार को खुद ग्रहण नहीं कर सके। इससे पूर्व ही कारगिल युद्ध में शहीद हो गए।
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मनोज पांडेय - फोटो : amarujala
‘अगर अपनी बहादुरी साबित करने से पहले मेरे सामने मौत भी आ गई तो मैं उसे खत्म कर दूंगा। यह सौगंध है मेरी।’
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