विजय दिवस यानी 26 जुलाई, 1999 का दिन भारतीय इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में अंकित है। इसी दिन कारगिल चोटी को भारतीय सेना के जांबाजों ने पाकिस्तानी घुसपैठियों को खदेड़कर मुक्त कराया था। ऑपरेशन विजय की 19वीं वर्षगांठ शुक्रवार को मनाई जाएगी। शहीद जवानों की शहादत को याद किया जाएगा। कारगिल युद्ध में अदम्य शौर्य और साहस का परिचय देने वाले ऐसे ही जांबाज को नमन करतीं ‘अमर उजाला’ की खास रिपोर्ट...
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मेजर विवेक गुप्ता
राष्ट्रीय राइफल्स रेजीमेंट मेजर विवेक गुप्ता भी कारगिल युद्ध में शहीद हुए। वह 1970 में देहरादून में जन्में थे। उनके पिता कर्नल बीआरएस गुप्ता फौज में थे। उन्होंने 11 जून, 1999 को तोलोलिंग चोटी पर हमलों के दौरान दुश्मनों के कई ठिकानों पर कब्जा कर लिया था। उन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र से नवाजा गया।
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मेजर विवेक गुप्ता
ऐसे ही कारगिल युद्ध के नायक थे बिग्रेडियर देवेंद्र सिंह। उन्होंने कारगिल में सैन्य टुकड़ियों का नेतृत्व किया, पर रक्षा मंत्रालय ने उनकी उपलब्धियों को हाशिए पर ही रखा और इसी बीच वह रिटायर हो गए। शहीद से जुड़ा एक वाकया है कि 1999 में भारत-पाकिस्तान के बीच कारगिल युद्ध चल रहा था।
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मेजर विवेक गुप्ता
उन्हीं दिनों क्रिकेट विश्वकप भी चल रहा था। नाजुक हालातों के बीच जब कारगिल शहीद मेजर विवेक गुप्ता का शव दिल्ली पहुंचा तो पूर्व कप्तान कपिल देव अपने आंसुओं को नहीं रोक पाए।
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मेजर विवेक गुप्ता
उनसे रहा नहीं गया और उनको पाकिस्तान की इस हरकत पर ऐसा गुस्सा आया कि उन्होंने भारत सरकार से कहा कि बहुत हुआ अब बंद करो पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलना, नहीं चाहिए हमें पाकिस्तान से खेल की कमाई। मेजर का शव पहुंचने पर परिवार के लोग भी पहुंचे थे। इसी बीच उनकी पत्नी जयश्री सेना की ड्रेस में पहुंची और सैल्यूट किया।
‘मैं मोजे और ट्राउजर्स गिनने के लिए पैदा नहीं हुआ हूं। मैं फौजी बनने के लिए आया हूं और सरहदों की रक्षा के लिए जान भी कुर्बान करनी पड़ी तो पीछे नहीं हटूंगा।’