बेटियों ने रोशन किया हमारा नाम
जब बेटियों ने जन्म लिया तो वे लम्हें कितने सुखद थे। छोटी-छोटी अंगुलियां, रुई सी त्वचा और हिरण सी आंखें। उनकी खिलखिलाहट और शैतानियां सारी थकान मिटा देती थी। आज भी जब बेटियां सामने होती हैं तो वही यादें ताजा जो जाती है। कभी महसूस ही नहीं हुआ कि मैं बेटों नहीं तीन बेटियों का पिता हूं। मेरी बेटियों ने वह कर दिखाया, जो बेटे भी नहीं कर सकते थे। दुनियाभर में मेरा नाम रोशन किया।
यह कहना है पूर्वोत्तर रेलवे के पूर्व मंडल परिचालन प्रबंधक एमपी सिंह का। उन्होंने बताया कि बेटियों को लेकर समाज की सोच जैसी भी हो, पर हमारे यहां जब बेटियों ने जन्म लिया तो मैंने उसी पल निर्णय कर लिया था कि बेटियों की पढ़ाई में कोई कमी नहीं छोडूंगा जबकि मां लगातार हमेशा बेटे के लिए प्रार्थना करती थी। इसी का नतीजा है कि एक बेटी डॉ. रश्मि सिंह गोरखपुर में चिकित्सक है। वहीं, दूसरी बेटी इंजीनियर नेहा सिंह पोलैंड में पोस्टेड है और तीसरी बेटी पूजा सिंह डॉक्टर है। (एमपी सिंह बेटी डॉ. रश्मि, नेहा व पूजा के साथ।)