शाम के चार बजे थे। बृहस्पतिवार को लखनऊ में रिवर फ्रंट पर मार्कोस कमांडो के रेस्क्यू ऑपरेशन के प्रदर्शन को देखने के लिए सैकड़ों लोगों का हुजूम उमड़ा था। तभी आसमान में गड़गड़ाते हुए हेलीकॉप्टर गोमती नगर के ऊपर पहुंचे। सभी की निगाहें वहीं टिक गईं। लोग मोबाइल से वीडियो बनाने लगे।
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डिफेंस एक्सपो
- फोटो : अमर उजाला
जैसे ही मार्कोस कमांडों ने रस्सी के सहारे गोमती नदी में छलांग लगाई तो मौजूद सभी दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनकी हौसला अफजाई की। लोगों ने भारत माता की जय के उद्घोष कर उनका उत्साहवर्धन किया। रिवर फ्रंट पर क्या बुजुर्ग, क्या युवा। परिवार समेत लोग प्रदर्शन देखने पहुंचे।
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डिफेंस एक्सपो
- फोटो : अमर उजाला
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान सेना के जवानों का शौर्य देखकर सभी दंग रह गए। प्रदर्शन खत्म होने के बाद भी लोग पहुंचते रहे। प्रदर्शन देखने के बाद लोगों ने जवानों की जमकर तारीफ की। प्रतिक्रिया में उन्होंने बताया कि वे ऐसे ही जांबाज जवानों के हाथों सुरक्षित हैं।
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विशाल श्रीवास्तव
- फोटो : अमर उजाला
पहली बार इस तरह का प्रदर्शन देखने को मिला। जवानों का शौर्य देखकर काफी गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं। समय-समय पर जवानों के इस तरह केप्रदर्शन होने चाहिए। ताकि हम सभी को भी पता चल सके कि उनको किसी तरह का प्रशिक्षण दिया जाता है। - विशाल श्रीवास्तव
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सौरभ तिवारी
- फोटो : अमर उजाला
कमांडो का पराक्रम किसी रोमांच से कम नहीं था। अब तक इस तरह के ऑपरेशन केवल फिल्मों में ही देखने को मिलते थे। पहली बार लाइव प्रदर्शन देखने को मिला। हम युवाओं के लिए यह गर्व की बात है। युवा इनकेप्रदर्शन से प्रेरणा लेंगे और देश हित में सोचेंगे। - सौरभ तिवारी
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रवि शंकर जायसवाल
- फोटो : अमर उजाला
मेरे लिए यह सौभाग्य से कम नहीं है कि अपने देश के जांबांज कमांडों का प्रदर्शन लाइव देखने को मिला। इनका प्रदर्शन देख मैं खुद को कॉलेज के दिनों की भांति युवा महसूस करने लगा। जोश से भर गया। इनका प्रदर्शन देख लगता है कि हर परिवार से एक सदस्य को तो सेना में भर्ती होना ही चाहिए। - रवि शंकर जायसवाल
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अजय गौतम
- फोटो : अमर उजाला
कमांडो के शौर्य का लाइव प्रदर्शन देख यह पक्का हो गया कि हमारी भारतीय सेना जैसी किसी भी देश की सेना नहीं होगी। जो प्रदर्शन में इस तरह की कठिन परिस्थितियों में पराक्रम दिखा सकते हैं असल में किस हद तक जा सकते हैं इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। - अजय गौतम
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पीके मुखर्जी
- फोटो : अमर उजाला
सेना के शौर्य का प्रदर्शन मैंने पहले भी देखा है। लखनऊ में दूसरी बार देख रहा हूं। बार-बार देखने को मन करता है। मैं चाहता हूं कि समय-समय पर सेना के जवानों के शौर्य का प्रदर्शन होना चाहिए। ताकि आम जनता को यह मालूम चले कि वे कितने कठिन प्रशिक्षण से गुजरते हैं। इतना आसान नहीं है सेना में जाना। - पीके मुखर्जी
मेरा बेटा भी सेना में है और वह बॉर्डर पर तैनात है। मैं चाहती हूं कि सेना के जवानों का इस तरह का प्रदर्शन बार-बार हो। ताकि युवा प्रेरणा ले सकें और देश की रक्षा के लिए सेना में भर्ती होने के लिए उनमें जज्बा पैदा हो सके। उनके कठिन जीवन शैली के बारे में जान सकें। - रीता मुखर्जी