ये लखनऊ में हो क्या रहा था। तस्वीर देखकर चकरा गए ना आप? दरअसल ऐसा कुछ नहीं है जैसा कि आप सोच रहे हैं।
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ओह! लखनऊ में आखिर ये हो क्या रहा था?
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आईटी कॉलेज में आयोजित एनुअल फेस्ट ‘औरा’ के दूसरे दिन तरह-तरह की प्रतियोगिताएं हुईं। इन प्रतियोगिताओं में मनोरंजन के साथ सरप्राइजिंग एलीमेंट का भी ख्याल रखा गया। यह सभी दृश्य यहां पर हुए नाटक मंचन के हैं। इन दृश्यों में ऑनर किलिंग जैसे जघन्य अपराध को कुछ इस तरह से पेश किया गया।
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कार्यक्रम में विद्यांत हिंदू पीजी कॉलेज के शकेब, सौम्या, पूजा के ग्रुप ने देशभक्ति तो एमिटी यूनिवर्सिटी से शिवांगी, तनुश्री, प्रिंस के समूह ने फ्यूजन की प्रस्तुति दी। दूसरे दिन के कार्यक्रमों की शुरुआत पाश्चात्य एकल गायन से हुई।
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इसमें आईटी कॉलेज की सईदा ने ‘व्रेकिंग बॉल’ गीत सुनाकर समां बांधा तो अन्य प्रतिभागियों ने भी बेहतरीन प्रस्तुति दी। इसके बाद ‘मृत्युदंड प्रतिबंधित होना चाहिए या नहीं?’ विषय पर हिंदी वाद-विवाद प्रतियोगिता आयोजित हुई जिसमें आईटी कॉलेज को पहला पुरस्कार मिला।
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इसके अलावा अवध गर्ल्स डिग्री कॉलेज की राशिदा ने ‘गुलाल में रंग नहीं जिंदगी है...’ कविता सुनाई तो आईआईएलएम की प्रीति ने ‘मैंने देखा है गुलाल लोगों की मुस्कुराहटों से गिरते...’ कविता से सभी का दिल जीता। एलयू के विशाल ने ‘गुलाल तेरी लाली से खेलते भीड़ को देखा है...’ कविता सुनाई।
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‘महफिल-ए-समां’ नाम से आयोजित कव्वाली प्रतियोगिता में भी प्रतिभागियों ने शानदार प्रस्तुतियों से कार्यक्रम में समां बांधा। सरस्वती डेंटल कॉलेज के स्वतंत्र, श्रेष्ठा, शिवम व उनके ग्रुप ने ‘दमादम मस्त कलंदर...’ और ‘कजरा मोहब्बत वाला...’ से सभी को मंत्रमुग्ध किया तो एलयू के अंबुज, ऋद्घि के समूह ने बजरंगी भाईजान फिल्म की ‘भर दो झोली...’ कव्वाली सुनाकर तालियां बटोरीं।
‘ऑनर किलिंग’ थीम पर आधारित नाटक में सभी टीमों ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों झंझोड़ कर रख दिया और सामाज का आईना दिखाया। एलयू से मिनाक्षी व हितिशा की टीम ने दिखाया कि कैसे एक परिवार में किन्नर का जन्म होता है और परिवार के सदस्य लोगों के ताने सुनकर आखिर में उसे मार देते हैं।