सेना पुलिस भर्ती रैली में शुक्रवार को बेटियों के हौसले बारिश पर भारी पड़े। दरअसल, बृहस्पतिवार को झमाझम बारिश के चलते एएमसी स्टेडियम के ट्रैक पर भरे पानी के कारण बालिकाओं को रोड पर दौड़ लगानी पड़ी।
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सेना पुलिस भर्ती रैली
- फोटो : अमर उजाला
वहीं, मिट्टी गीली होने से उन्हें लॉन्ग और हाईजंप में भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा, लेकिन इन सभी बाधाओं को पार कर उन्होंने अगले राउंड की तरफ बढ़ती गईं।
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देश में पहली बार मध्य कमान के छावनी स्थित सेना चिकित्सा कोर केंद्र एवं कॉलेज (एएमसी) के स्टेडियम में सैनिक जीडी के पदों के लिए भर्ती चल रही है। रैली के दूसरे दिन 1,505 बालिकाओं को ऑनलाइन प्रवेश पत्र जारी किए गए, जिसमें से 448 ही शामिल होने पहुंचीं।
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एकेडमिक दस्तावेज जांचने के बाद उन्हें टोकन नंबर दिए गए। रनिंग ट्रैक पर पानी भरने से बालिकाओं को बाहर बने होल्डिंग एरिया में ले जाया गया।
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यहां उन्हें दो ग्रुप में एएमसी के अंदर बनी सड़क पर दौड़ाया गया। सेना भर्ती कार्यालय लखनऊ के निदेशक भर्ती कर्नल आशुतोष मेहता ने बताया कि बारिश के कारण सड़क पर 1600 मीटर की दौड़ कराई गई।
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नियमों से कोई समझौता नहीं किया गया है। सफल होनी वाली बालिकाओं का बॉयोमेट्रिक पंजीकरण कर उन्हें अगले राउंड के लिए भेजा गया।
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दूसरे दिन इन जिलों की बालिकाओं ने दिखाया दम
शुक्रवार को बागपत, बिजनौर, मेरठ, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली, अमरोहा, बुलंदशहर, गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, रामपुर, हापुड़, मैनपुरी, एटा, इटावा, झांसी, जालौन, ललितपुर, आगरा, अलीगढ़, फिरोजाबाद, हाथरस, कासगंज और मथुरा की बालिकाएं रैली में शामिल हुईं।
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‘कोई नहीं, हौसला बनाए रखिए’
दौड़ में सफल बालिकाएं जब लॉन्ग जंप के लिए पहुंची तो मिट्टी गीली होने से उन्हें कुछ असुविधाएं हुईं। एक बालिका स्लिप हो गई तो वहां जूट का मैट बिछाया गया। समस्या का समाधान न होने पर पोल व गद्दों को दूसरी जगह शिफ्ट करवा दिया गया। इस दौरान फेल होने वाली बालिकाओं से सैन्य अधिकारी ‘कोई नहीं, हौसला बनाए रखिए’ कहकर आत्मविश्वास बढ़ा रहे थे। सभी को तीन-तीन मौके दिए गए, जिसमें सफल होने पर उन्हें ऊंची कूद के लिए भेजा गया।
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गेट से ही बैरंग लौटाया
शुक्रवार सुबह तय समय पर नहीं पहुंचने वाली बालिकाओं को गेट से ही बैरंग लौटा दिया गया। वहीं को प्रवेश पत्र जारी नहीं होने से रैली में शामिल नहीं हो सकीं। इस पर भर्ती निदेशक कर्नल आशुतोष मेहता ने बताया कि 86 प्रतिशत का कटआउट रखा गया था। इस अर्हता को पूरा करने वाली 4458 अभ्यर्थियों को प्रवेशपत्र जारी किए हैं।
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आज उत्तराखंड की बेटियां भी होंगी शामिल
शनिवार को यूपी के जौनपुर, सोनभद्र, वाराणसी, गाजीपुर, संत रविदास नगर, मिर्जापुर, चंदौली, आजमगढ़, गोरखपुर, मऊ, देवरिया, बलिया के साथ उत्तराखंड के अल्मोड़ा, बागेश्वर, नैनीताल, ऊधमसिंह नगर, चंपावत, पिथौरागढ़, चमोली, देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी-गढ़वाल, रुद्रप्रयाग, टिहरी-गढ़वाल व उत्तरकाशी की बालिकाएं अपना कौशल दिखाएंगी।
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4458 बालिकाओं को जारी किए गए प्रवेश पत्र
सेना पुलिस में सौ पदों के लिए देशभर से करीब ढाई लाख बालिकाओं ने आवेदन किए हैं। इनमें से एक लाख आवेदन सिर्फ यूपी व उत्तराखंड से हैं। इसमें से 4458 को ही ऑनलाइन प्रवेश पत्र जारी किए गए।
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रेसलिंग से मिली मदद
मेरठ में रेसलिंग करती हूं। राष्ट्रीय स्तर तक शामिल हो चुकी हूं। इसीलिए सेना भर्ती का फॉर्म भर दिया। पापा भी आर्मी में हैं, उन्होंने मेरा हौसला बढ़ाया। फिजिकल ट्रेनिंग में खास दिक्कतें नहीं आईं। पिता ने मानसिक रूप से मुझे हर परिस्थिति से निपटने के लिए मजबूत बनाया है। - अंजलि, मेरठ पिता के सपने को पूरा करने का लक्ष्य
तीन बहनें और एक भाई है। पिता राकेश सिंह पाल किसान हैं। मुफलिसी में गुजारा होता है पर, पिता ने अपना हिस्सा काट-काटकर हमें पाला है। सेना पुलिस में भर्ती होकर पिता का नाम रोशन करना चाहती हूं। इसके लिए मैं जीजान लगा दूंगी। -अर्चना कुमारी, मैनपुरी
सेना की वर्दी में हैं आकर्षण
आर्मी की ड्रेस मुझे हमेशा से आकर्षित करती रही है। पापा देवेंद्र कुमार भी सेना में हैं और जब वह वर्दी पहनकर घर आते हैं तो उन्हें देखकर छाती चौड़ी हो जाती है। मेरी भी ख्वाहिश है वर्दी पहनकर पिता के सामने जाऊं और उनका सीना मुझे देखकर चौड़ा हो जाए। -अंजलि, आगरा
देश सेवा के जज्बे से आई हूं
पिता मांगीलाल मथुरा के थिरावली गांव में किसान हैं। उनकी प्रेरणा से आज यहां पर हूं। उन्होंने कभी भी हम भाई-बहनों में भेदभाव नहीं किया। देश सेवा का जज्बे लेकर भर्ती होने आई हूं। सफलता मिली तो अपनी ड्यूटी निभाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ूंगी। -कमला, मथुरा