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लामार्ट के छात्र की मौत के साढ़े चार साल बाद सीन रीक्रिएशन, 60 फीट ऊंचे छज्जे से पांच बार फेंकी डमी

Fri, 04 Oct 2019 04:51 PM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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राहुल (फाइल फोटो).लामार्ट स्कूल पुहंची टीम ने बारीकी से घटनाक्रम की पड़ताल की - फोटो : amar ujala
लामार्ट में साढ़े चार साल पहले कक्षा नौ के छात्र राहुल श्रीधरन की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले में बृहस्पतिवार को फोरेंसिक टीम ने घटनाक्रम का री-कंस्ट्रक्शन किया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर री-कंस्ट्रक्शन करने स्कूल पहुंची फोरेंसिक टीम ने पांच घंटे तक एक-एक बिंदु पर गहराई से पड़ताल की। इस दौरान लामार्ट स्कूल के प्रिंसिपल कार्लाइल मैकफॉरलैंड समेत मौके पर मौजूद कर्मचारियों से घटना की जानकारी ली गई। राहुल जिस कांस्टेंशिया स्मारक से गिरा था, वहां से पांच बार डमी गिराकर यह जानने की कोशिश की गई कि उसने खुदकुशी की, किसी ने धक्का दिया या फिर वह असंतुलित होकर गिरा था। टीम के प्रभारी वरिष्ठ भौतिक विज्ञानी डॉ. एके तिवारी ने सात दिन में रिपोर्ट तैयार होने की बात कही है।
 
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सीन रीक्रिएशन - फोटो : amar ujala
 टीम दोपहर करीब एक बजे राहुल के पिता वी. श्रीधरन, मां अनम्मा श्रीधरन और गौतमपल्ली थाने के इंस्पेक्टर सत्यप्रकाश के साथ स्कूल पहुंची। डॉ. एके तिवारी ने सबसे पहले राहुल को अस्पताल ले जाने कर्मचारी मेराज, जफर व शकील से पूछताछ की। राहुल कांस्टेंशिया स्मारक के बाहर किस जगह और किस मुद्रा में पड़ा था, डमी की मदद से इस बारे में जानकारी ली। इसके बाद फोरेंसिक विशेषज्ञों ने घटना के वक्त मौजूद रहे दरोगा अवधेश कुमार त्रिपाठी के साथ कांस्टेंशिया स्मारक की पहली मंजिल पर स्थित वार्डन के कमरे की छानबीन की। इसी कमरे में राहुल का बैग मिला था और उसने दीवार पर कुछ शब्द लिखे थे। पुलिस का कहना है कि इसी कमरे से राहुल कांस्टेंशिया स्मारक के खुले छज्जे पर पहुंचा था।
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सीन रीक्रिएशन - फोटो : amar ujala
 टीम दोपहर करीब एक बजे राहुल के पिता वी. श्रीधरन, मां अनम्मा श्रीधरन और गौतमपल्ली थाने के इंस्पेक्टर सत्यप्रकाश के साथ स्कूल पहुंची। डॉ. एके तिवारी ने सबसे पहले राहुल को अस्पताल ले जाने कर्मचारी मेराज, जफर व शकील से पूछताछ की। राहुल कांस्टेंशिया स्मारक के बाहर किस जगह और किस मुद्रा में पड़ा था, डमी की मदद से इस बारे में जानकारी ली। इसके बाद फोरेंसिक विशेषज्ञों ने घटना के वक्त मौजूद रहे दरोगा अवधेश कुमार त्रिपाठी के साथ कांस्टेंशिया स्मारक की पहली मंजिल पर स्थित वार्डन के कमरे की छानबीन की। इसी कमरे में राहुल का बैग मिला था और उसने दीवार पर कुछ शब्द लिखे थे। पुलिस का कहना है कि इसी कमरे से राहुल कांस्टेंशिया स्मारक के खुले छज्जे पर पहुंचा था।

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सीन रीक्रिएशन - फोटो : amar ujala
वीडियो रिकॉडिंग के अध्ययन के बाद बनेगी रिपोर्ट
फोरेंसिक टीम ने कांस्टेंशिया स्मारक के करीब 60 फीट ऊंचे छज्जे से पांच बार डमी नीचे फेंकी। डॉ. एके तिवारी ने बताया कि राहुल के छज्जे पर बैठकर नीचे कूदने की आशंका से तीन बार डमी को बैठाकर गिराया गया। एक बार खड़े होकर कूदने की आशंका में डमी को खड़ी अवस्था में नीचे फेंका गया जबकि एक बार धक्का देकर गिराया गया। पांचों बार डमी किस जगह और किस पोजीशन में गिरी, इस पूरे घटनाक्रम की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की गई। डॉ. तिवारी ने बताया कि डमी गिरने के स्थान, उसकी पोजीशन और वीडियो रिकॉर्डिंग का बारीकी से अध्ययन के बाद रिपोर्ट बनाई जाएगी।
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सीन रीक्रिएशन - फोटो : amar ujala
जानिए क्या था मामला
एसजीपीजीआई परिसर निवासी व वहां नेफ्रोलॉजी विभाग में टेक्निकल अफसर वी. श्रीधरन के बेटे राहुल की 10 अप्रैल 2015 की सुबह स्कूल के सौ फीट ऊंचे कांस्टेंशिया स्मारक के छज्जे से संदिग्ध हालात में गिरकर मौत हो गई थी। राहुल की मां अनम्मा ने गौतमपल्ली थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ बेटे की हत्या का केस दर्ज कराया था। इस मामले में पुलिस पर पक्षपात व सतही विवेचना करने तथा कॉलेज प्रशासन को बचाने का आरोप लगाते हुए मृतक के भाई एस. रोहित ने विवेचना की निगरानी के लिए कोर्ट में अर्जी दी थी। बाद में राहुल की पोस्टमार्टम रिपोर्ट की हैदराबाद की एक निजी लैब और इंग्लैंड के फोरेंसिक एक्सपर्ट डॉ. जेसन पेन जेम्स से जांच कराई गई। इसमें कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आई थीं। गौतमपल्ली पुलिस ने इस केस में फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी, जिस पर कोर्ट ने पुनर्विवेचना के आदेश दिए। इस मामले में पुलिस अधिकारियों के लचर रवैये के कारण फोरेंसिक टीम ने न ही घटनास्थल का निरीक्षण किया न री-कंस्ट्रक्शन कराया। राहुल के परिवारीजनों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। इस पर विधि विज्ञान प्रयोगशाला को री-कंस्ट्रक्शन करने का आदेश दिया।
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