ये लखनऊ विधानसभा में बुधवार के नजारे हैं। विधानसभा सत्र के पहले ही दिन कामकाज तो छोड़िए राज्यपाल का अभिभाषण भी नहीं हो सका।
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ये विधानसभा के नजारे हैं, चकरा गए ना आप?
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ये तो पहले से ही तय था कि विधानसभा का पहला दिन हंगामेदार होगा लेकिन इसकी उम्मीद शायद किसी को भी नहीं रही होगी कि हंगामा इस तरह का होगा कि राज्यपाल अपना अभिभाषण ही न पढ़ पाएं।
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विधानसभा में जैसे ही राज्यपाल राम नाईक ने अपनी स्पीच शुरु की सदन में हंगामा शुरू हो गया। राज्यपाल राम नाईक ने कोशिश की कि वह अपना भाषण पढ़ सकें, लेकिन वह ऐसा नहीं कर पाए।
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बसपा, कांग्रेस और रालोद के सदस्यों ने सरकार विरोधी नारे लिखी टोपियों और बैनरों के साथ जमकर नारेबाजी की। विपक्ष ने 'राज्यपाल वापस जाओ’ के नारे भी लगाए। राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान भाजपा के सदस्य नदारद रहे। यह शायद उनकी प्लानिंग थी वह राज्यपाल का विरोध नहीं करना चाह रहे थे।
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बाद में विधानसभा और विधान परिषद की अलग-अलग कार्यवाही शुरू होने पर भी विपक्ष ने जमकर हंगामा किया। हंगामे और शोर-शराबे के बीच दोनों सदनों में आज का एजेंडा निपटाकर सदन की कार्यवाही बृहस्पतिवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।
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हंगामे के बीच में बसपा के सदस्यों ने नारे लिखी टोपियां पहनकर बैनर लहराना शुरू कर दिया। बैनरों पर सरकार विरोधी नारे लिखे थे। भाजपा के सदस्य अपनी सीटों से गायब थे जबकि कांग्रेस और रालोद के सदस्यों ने भी बैनर और नारे लिखी तख्तियां लहराते हुए राज्यपाल के अभिभाषण का विरोध किया।
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इस हंगामे के बीच राज्यपाल और आजम खां के बीच चल रहे विवाद का भी मुद्दा सामने आया। नेता प्रतिपक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय द्वारा अभिभाषण पढ़े जाने का यह कहते हुए विरोध किया कि जब सरकार और राज्यपाल के बीच नोकझोंक व 'लेटर वॉर’ चल रहा है और दोनों में सामंजस्य ही नहीं है तो अभिभाषण पढऩे का क्या औचित्य है? बाद में बीएसपी ने इस पर प्रेस वार्ता भी की।
जब राज्यपाल अभिभाषण नहीं पढ़ पाए तो अब इसे नहीं पढ़ा जाना चाहिए। मौर्य ने अभिभाषण को सरकारी दस्तावेज और असत्य का पुलिंदा बताते हुए कहा कि इसे पढ़कर सदन का वक्त जाया न किया जाए। हंगामे के बाद बीजेपी ने भी प्रेस से बात की। सभी तस्वीरें अर्जुन साहू