प्रभा चतुर्वेदी
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वहीं प्रभा चतुर्वेदी का कहना है कि मेरी उम्र सात वर्ष रही होगी और उस वक्त मैं रायपुर में थी। अंग्रेजी शासन के दौरान मैं अपने पिताजी के साथ गांधी जी की प्रार्थना सभाओं में शामिल होती थी। मुझे गांधी जी का वो ओजस्वी चेहरा आज भी याद है। जिस दिन देश आजाद हुआ, उस वक्त मेरे घर में शादी जैसा माहौल था। बुआ, दादी और मां पकवान बनाने में जुटीं थीं।
प्रभा और रमाकांत चतुर्वेदी का कहना है कि पिछले 30-40 वर्षों में देश में तेजी से बदलाव हुआ। सुविधाओं के नाम पर विकास तो खूब विकास हुआ लेकिन मानसिक विकास में हम पिछड़ गए। खासकर संस्कार, नैतिकता और मूल्यों में गिरावट बढ़ती ही जा रही है।