राम मंदिर चढ़ावा चोरी में एक और खुलासा हुआ है। चार्जशीट में आरोपी अविनाश शुक्ला फुटेज में कुल 85 बार रकम चोरी करते दिखाई दिया है। चार्जशीट में 25 से 30 जुलाई के फुटेज में भी चोरी का उल्लेख किया गया है। अनुकल्प मिश्रा के मोबाइल से अविनाश शुक्ला उर्फ शनि और लवकुश मिश्र के साथ चढ़ावे की रकम को लेकर किए गए टेक्स्ट संदेश मिले।
अयोध्या में राम मंदिर में चढ़ावे की रकम की कथित चोरी के मामले में पुलिस की ओर से अदालत में दाखिल चार्जशीट में सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल डाटा और कॉल डिटेल रिकॉड (सीडीआर) के आधार पर अभियुक्तों की भूमिका का विस्तृत ब्योरा दिया गया है। चार्जशीट के मुताबिक, अविनाश शुक्ला उर्फ शनि सीसीटीवी फुटेज में कुल 85 बार चढ़ावे की रकम चोरी करते और चार बार अन्य अभियुक्तों को चोरी में सहयोग करते दिखाई दिया।
चार्जशीट में करुणेश पांडेय दो बार चोरी करते और 68 बार सह-अभियुक्तों की मदद करते दिखाई दिया। मनीष कुमार यादव 16 बार चढ़ावे की रकम अपने पास रखते और 19 बार अन्य अभियुक्तों का सहयोग करते दिखाई दिया।
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राम मंदिर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
रमाशंकर मिश्र एक बार चढ़ावे की रकम हटाकर अपने पास रखते, जबकि लवकुश मिश्रा एक बार चोरी करते और 52 बार अन्य सह-अभियुक्तों की मदद करते दिखाई दिया। वहीं, अनुकल्प मिश्र 56 बार अन्य सह-अभियुक्तों को चढ़ावे की रकम हटाने में सहयोग करते सीसीटीवी में दिखाई दिया।
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राम मंदिर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सीडीआर में लगातार संपर्क, षड्यंत्र का आरोप
सीडीआर के विश्लेषण में संबंधित अवधि के दौरान अभियुक्तों के बीच लगातार संपर्क पाए जाने का दावा किया गया है। चार्जशीट में सीसीटीवी, डिजिटल, मौखिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर आपसी समन्वय और आपराधिक षड्यंत्र के साक्ष्य मिलने की बात कही गई है।
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राम मंदिर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पुलिस ने आरोप लगाया है कि अभियुक्तों ने सुविचारित और सुनियोजित तरीके से गणना कक्ष से चढ़ावे की रकम की चोरी और आपराधिक न्यासभंग किया। हालांकि, ये अभियोजन के आरोप हैं और अंतिम निर्धारण अदालत में साक्ष्यों के परीक्षण के बाद होगा।
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राममंदिर का परिसर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
25 से 30 जुलाई के फुटेज में भी चोरी का उल्लेख
चार्जशीट में 25 से 30 जुलाई 2026 के सीसीटीवी फुटेज का भी उल्लेख है। इसमें सुभाष श्रीवास्तव की मौजूदगी में गणना कक्ष में चढ़ावे की रकम की गिनती के दौरान अविनाश शुक्ला उर्फ शनि रकम हटाकर अपने पास रखते दिखाई दिया। मोबाइल चैट में कैश के बंडलों का जिक्र पुलिस ने मोबाइल डाटा के विश्लेषण को भी महत्वपूर्ण साक्ष्य बताया है।
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Ram Mandir
- फोटो : अमर उजाला
चार्जशीट के अनुसार, अनुकल्प मिश्रा के मोबाइल से अविनाश शुक्ला उर्फ शनि और लवकुश मिश्र के साथ चढ़ावे की रकम को लेकर किए गए टेक्स्ट संदेश मिले। इनमें कैश के बंडलों को रखने, छिपाने, अदला-बदली करने और इधर-उधर ले जाने से संबंधित बातचीत का उल्लेख है।
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चंपत राय
700 खाते खंगाले, चंपत के नाम एक भी नहीं
राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण की जांच में पुलिस ने करीब 700 बैंक खातों की पड़ताल की। ट्रस्टियों, आरोपितों, संदिग्धों, गणना कर्मियों और ट्रस्ट से जुड़े कर्मचारियों के खातों का लेनदेन खंगाला गया। ट्रस्ट के बैंक खातों को भी जांच के दायरे में रखा गया। हालांकि, इस पूरी जांच में एक तथ्य सामने आया कि चंपत राय के नाम कोई निजी बैंक खाता नहीं मिला।
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चंपत राय
- फोटो : अमर उजाला
अदालत में दाखिल चार्जशीट में विवेचना से जुड़े इस तथ्य का उल्लेख है। पुलिस ने संदिग्धों के खातों में रकम की आवाजाही की भी पड़ताल की। यह देखा गया कि रकम किन खातों से होकर गुजरी और उसका आरोपितों से कोई संभावित संबंध था या नहीं।
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चंपत राय और अनिल मिश्रा
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव के खातों के लेनदेन को भी अन्य आरोपितों और संदिग्धों के खातों से मिलाकर देखा गया। वहीं, चंपत राय के नाम कोई बैंक खाता नहीं मिलने की बात चार्जशीट में दर्ज है।
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अयोध्या का राम मंदिर।
- फोटो : amar ujala
कोर्ट में अधिवक्ता संघ ने भी उठाए सवाल
चार्जशीट दाखिल होने के बाद बुधवार को कोर्ट में अधिवक्ता संघ की ओर से विवेचना पर सवाल उठाए गए। संघ की ओर से कहा गया कि साक्ष्य के रूप में दस अधिवक्ताओं के शपथपत्र दिए गए थे, लेकिन विवेचक ने उन पर कोई कार्रवाई नहीं की।
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अयोध्या का राम मंदिर।
- फोटो : amar ujala
यह भी आरोप लगाया गया कि एसआईटी के गठन से पहले आरोपितों से बरामद रुपये जिस व्यक्ति के पास रखे गए थे, उसके खिलाफ भी कार्रवाई नहीं की गई। अधिवक्ता संघ ने आरोप लगाया कि चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव को अभियुक्त बनाने के बजाय गवाह बना दिया गया, जबकि ट्रस्ट सदस्य कृष्ण मोहन को अभियुक्त नहीं बनाया गया।
संघ के अनुसार, प्रार्थनापत्र के माध्यम से इनके खिलाफ साक्ष्य भी दिए गए थे, लेकिन विवेचक ने संज्ञान नहीं लिया। संघ ने इनके खिलाफ भी आरोपपत्र दाखिल किए जाने की मांग की। इसके अलावा बरामदगी के समय और नक्शे को लेकर भी चार्जशीट पर सवाल उठाए गए।