मुशायरों के लोकप्रिय शायर राहत इंदौरी ने एक बार फिर लखनऊ की शाम अपनी शायरी से सजाई। कैसरबाग स्थित एक होटल में ‘अवध की शाम, शायरी के नाम’ में उन्होंने खचाखच भरे सभागार में देर तक अपनी गजलें सुनाईं।
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शायर राहत इंदौरी
- फोटो : amarujala
इंदौरी ने कहा कि जो गजलें 30 साल पहले लिखी थी, देश में आज के बदले हालात में उनकी मांग फिर होने लगी है।
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शायर राहत इंदौरी
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इन्हीं में एक गजल है- ‘अगर खिलाफ हैं होने दो जान थोड़ी है, ये सब धुआं है कोई आसमान थोड़ी है, लगेगी आग तो आएंगे घर कई जद में, यहां पे सिर्फ हमारा मकान थोड़ी है, जो आज साहिबे मसनद हैं कल नहीं होंगे, किराएदार हैं जाती मकान थोड़ी है, सभी का खून है शामिल यहां की मिट्टी में, किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है’।
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शायर राहत इंदौरी
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अपनी एक अन्य गजल में उन्होंने सुनाया- ‘अंगुलियां यूं न सब पर उठाया करो, खर्च करने से पहले कमाया करो, जिंदगी क्या है खुद ही समझ जाओगे, बारिशों में पतंगें उड़ाया करो, चांद सूरज कहां, अपनी मंजिल कहां, ऐसे वैसों को मुंह मत लगाया करो’।
देर तक चले इस कार्यक्रम में अपनी एक गजल में उन्होंने सुनाया- ‘चरागों को उछाला जा रहा है, हवा पर रोब डाला जा रहा है, न हार अपनी न अपनी जीत होगी, मगर सिक्का उछाला जा रहा है, वो देखो मयकदे के रास्ते में, कोई अल्ला हवाला जा रहा है, हमी बुनियाद का पत्थर हैं लेकिन, हमें घर से निकाला जा रहा है, जनाजे पर मेरे लिख देना यारो, मोहब्बत करने वाला जा रहा है’।