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तस्वीरों में देखिए,रैगिंग की इस हकीकत को...

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‘सर,सीनियर्स के मिलने पर हमें नब्बे डिग्री झुककर सलाम करना होता है। अगर भूल से बगैर नमस्कार किए आगे निकल गए तो जमकर पीटा जाता है।’हीवेट पॉलीटेक्निक में फर्स्ट ईयर के स्टूडेंट्स ने शुक्रवार को एसीएम पंचम कुंवर पंकज को आपबीती सुनाई।
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हीवेट पॉलीटेक्निक में हर साल रैगिंग आम बात बन चुकी है। सीनियर स्टूडेंट्स की कक्षाएं भले ही अभी शुरू नहीं हुई हैं पर रैगिंग का माहौल शुरू हो गया है। रैगिंग से डरकर इस साल हीवेट पॉलीटेक्निक ने फर्स्ट ईयर के स्टूडेंट्स को हॉस्टल आवंटित नहीं किए हैं।
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लिहाजा जूनियर छात्र किराए पर कमरा लेकर रहते हैं। रैगिंग की शिकायतों पर ही एसीएम कुंवर पंकज हीवेट पॉलीटेक्निक पहुंचे थे। जूनियर्स की पीड़ा सुनने और कैंपस का निरीक्षण करने के बाद वे हॉस्टलों में गए। एसीएम पंचम की जांच में जूनियर स्टूडेंट्स ने बताया कि उन्हें स्पष्ट निर्देश गए हैं कि वे क्लास के बाद थर्ड बटन पर निगाह रखेंगे। यानी सिर झुकाकर रखेंगे। लाइन बनाकर बाहर निकलेंगे।

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फर्स्ट ईयर के छात्रों ने बताया कि सीनियर्स अपनी पहचान के लिए मुंह पर रूमाल बांधे रहते हैं। जिससे उन्हें आसानी से पहचाना जा सके। जो भी रूमाल बांधे दिखे उसे नब्बे डिग्री झुककर सलाम ठोकने के सीनियर्स के निर्देश हैं। सिर झुकाए रखने के कारण अगर रूमाल न दिखा तो वे आदेश की नाफरमानी मानते हुए पिटाई करते हैं।
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पॉलीटेक्निक के आसपास के इलाकों में जूनियर स्टूडेंट्स किराए पर कमरा लेकर रहते हैं। उन्होंने बताया कि रात में उनके कमरों में अपने को सीनियर बताने वाले स्टूडेंट्स घुस आते हैं। इसके बाद उनकी रैगिंग की जाती है। रैगिंग करने वाले स्टूडेंट्स गुट में होते हैं इसलिए उनसे भिड़ा भी नहीं जा सकता है। जिनके घरों में वो रहते हैं वो भी कुछ नहीं कर पाते हैं।
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पॉलीटेक्निक  प्रशासन से जवाब तलब,पुलिस को निर्देश
एसीएम पंचम ने जांच पूरी करने के बाद हीवेट पॉलीटेक्निक को नोटिस जारी किया है। नोटिस में पॉलीटेक्निक प्रशासन से पूछा गया है कि उन्होंने रैगिंग रोकने के लिए क्या इंतजाम किए हैं? इसके साथ ही उन्होंने क्षेत्रीय पुलिस को भी रैगिंग के लिए दोषी माना है। उनके अनुसार क्षेत्रीय पुलिस को कैंपस के आसपास गश्त करनी चाहिए। विशेषकर पॉलीटेक्निक खुलने और कक्षाएं समाप्त होने पर ताकि रैगिंग पर रोक लगाई जा सके। हीवेट  प्रशासन को 10 अगस्त तक अपना जवाब देना होगा।

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प्रिंसिपल कुंदन सिंह के मुताबिक संस्थान में रैगिंग रोकने के लिए आसपास के इलाकों के लिए बारी-बारी से तीन-तीन शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है। ये शिक्षक स्टूडेंट्स को मोहल्लों तक छोड़ने जाते हैं। इसके बाद भी ये शिक्षक उन इलाकों का भ्रमण करते हैं। जूनियर स्टूडेंट्स भले ही सीनियर्स को नहीं पहचानते हैं पर ये शिक्षक सीनियर्स को पहचानते हैं। ऐसे में कक्षाएं शुरू न होने के बावजूद वहां पर मिलने पर उनसे पूछताछ की जा सकती है।
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