लखनऊ के गोमतीनगर में एपल कंपनी के एरिया सेल्स मैनेजर न्यू हैदराबाद निवासी विवेक तिवारी की हत्या में खाकी की भूमिका सवालों में घिरी हुई है। गोमतीनगर थाने के सिपाही से लेकर आला अधिकारी तक इस जघन्य हत्याकांड में कठघरे में हैं। जिस तरह से वारदात के बाद से ही लखनऊ पुलिस के अधिकारी इस मामले में लीपापोती में जुट गए थे, उससे सवाल उठना लाजिमी भी है। यहां कुछ ऐसे सवाल उठाए जा रहे हैं जिन्हें पुलिस ने नजरअंदाज किया? कई सवाल ऐसे हैं जिससे पुलिस के इस हत्याकांड पर पर्दा डालने की कोशिश की पुष्टि भी हो रही है। पढ़िए एक नजर में----
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विवेक तिवारी हत्याकांड
अनसुलझे सवाल---
- वारदात हुई तब विवेक की कार सड़क किनारे खड़ी थी या चल रही थी? पूर्व सहकर्मी ने एफआईआर में कार खड़ी होने की बात लिखी, लेकिन मीडिया को बयान कार धीरे-धीरे चलने का दिया।
- विवेक की कार के पास सिपाही किस दिशा से आए थे। सिपाहियों का कहना था कि वह पीछे से आए, लेकिन कार में मौजूद विवेक की पूर्व सहकर्मी ने बताया कि वे सामने से आए।
- विवेक और सिपाहियों के बीच ऐसी कौन सी बात हुई जिससे मामला इतना बिगड़ गया कि सिपाही प्रशांत चौधरी को अपनी पिस्टल निकालकर गोली चलानी पड़ी।
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विवेक तिवारी हत्याकांड
- फोटो : amar ujala
- गोली कितनी दूरी और ऊंचाई से चलाई गई। फायर करते वक्त सिपाही और विवेक की कार की पोजीशन क्या थी। पूर्व सहकर्मी ने कहा था कि कार के शीशे से सटाकर गोली मारी गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी आठ से नौ फुट की दूरी की बात कही गई थी।
- सिपाही ने गोली चलाने के पहले चेतावनी क्यों नहीं दी, जबकि यह उनके प्रशिक्षण का हिस्सा होता है। उसने सीधे विवेक को निशाना बनाकर फायर क्यों कर दिया। हत्या का इरादा नहीं था तो कार के टायर या दाएं-बाएं फायर क्यों नहीं किया।
- अगर विवेक ने सिपाहियों को तीन बार कार से कुलचने की कोशिश की तो बाइक क्यों नहीं टूटी और सिपाहियों को चोटें क्यों नहीं आई?
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विवेक तिवारी हत्याकांड
- फोटो : amar ujala
- मौके पर पहुंची पुलिस ने घटनास्थल और क्षतिग्रस्त वाहनों की वीडियोग्राफी क्यों नहीं कराई। इससे विशेषज्ञ और जांच टीमें दोनों वाहनों की उस वक्त की स्थिति देख सकतीं।
- सिपाहियों का कहना था कि विवेक ने कार से कुचलने की कोशिश की तो पुलिस अधिकारियों ने तत्काल उनका मेडिकल परीक्षण क्यों नहीं कराया? आठ घंटे बाद सिपाहियों को अस्पताल क्यों भेजा।
- हत्याकांड की एकमात्र प्रत्यक्षदर्शी विवेक की पूर्व सहकर्मी को पुलिस ने वारदात के बाद उसके ही घर पर नजरबंद क्यों रखा? उससे किसी को मिलने-जुलने और बातचीत करने की इजाजत क्यों नहीं दी गई।
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विवेक हत्याकांड
- फोटो : amar ujala
- पूर्व सहकर्मी ने एफआईआर में लिखा गोली चलने जैसी आवाज सुनी। रीक्रिएशन में उसने बताया कि सिपाही ने सामने से गोली मारी। उसकी बातों में अंतर क्यों था? क्या कोई उस पर दबाव डाल रहा था। अगर हां तो क्यों।
- घटनास्थल की फॉरेंसिक जांच और क्राइम सीन के रीक्रिएशन के लिए एसआईटी ने 36 घंटे का वक्त क्यों लगाया? क्या एसआईटी घटनास्थल से साक्ष्य मिटने का इंतजार कर रही थी?
- वारदात रात करीब दो बजे हुई थी जबकि रीक्रिएशन भरी दोपहरी कराया गया? क्या इससे पूरी घटना के बारे में आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता था।
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विवेक हत्याकांड
- फोटो : amar ujala
- क्राइम सीन का रीक्रिएशन कराते वक्त विवेक की पूर्व सहकर्मी को कार में क्यों नहीं बैठाया गया? इससे पूर्व सहकर्मी वास्तविक स्थिति को बेहतर तरीके से नहीं बता सकी। क्या एसआईटी रीक्रिएशन की खानापूरी कर रही थी।
- रीक्रिएशन आधा-अधूरा क्यों किया गया? पुलिस ने गोली मारने वाले घटनास्थल पर ही पूरा ध्यान दिया जबकि विवेक वहां से कार लेकर भागे और अंडरपास के पिलर से टकराकर रुक गए थे। पुलिस ने वहां जाने की जरूरत क्यों नहीं समझी।
- क्राइम सीन के रीक्रिएशन के दौरान सिपाही के पिस्टल पकड़ने के तरीके पर ध्यान क्यों नहीं दिया गया? सिपाही ने पिस्टल दोनों हाथ से पकड़कर फायर किया या फिर एक हाथ से कलाई पकड़कर गोली चलाई? इस जांच से गोली चलने का एंगल साफ हो जाता।
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vivek murder case
- फोटो : amar ujala
- विवेक की एसयूवी का बंपर और हेडलाइट कैसे टूटी? घटना के ठीक बाद कार इतनी क्षतिग्रस्त नहीं दिख रही थी जितनी थाना पहुंचकर हो गई? कहीं पुलिस ने टक्कर मारने की थ्योरी मजबूत करने के लिए कार में कोई तोड़फोड़ तो नहीं की?
- कार के एयरबैग खुले होने की तकनीकी जांच क्यों नहीं हुई। कार के किस गति से टकराने पर एयरबैग खुलते हैं? इस बारे में तकनीकी विशेषज्ञों से संपर्क क्यों नहीं किया गया?
- क्या वजह थी जो पुलिस के आला अधिकारी शुरुआत से ही विवेक की हत्या को सेल्फ डिफेंस बताने में जुटे रहे। यह थ्योरी फेल होने पर उन्होंने विवेक के चरित्रहनन की कहानी गढ़ी।
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वारदात स्थल पर जांच टीम।
- फोटो : amar ujala
- डीजीपी से लेकर एसएसपी ने विवेक की हत्या के आरोपी सिपाहियों को गिरफ्तार करके जेल भेजने का झूठा दावा क्यों किया? किसे गुमराह करने की कोशिश कर रहे थे अफसर।
- वारदात की सुबह आरोपी सिपाही प्रशांत ने सेल्फ डिफेंस की आड़ में गोली चलाने की बात कही, लेकिन दोपहर बाद वह गलती से गोली चलने की बात क्यों कहने लगा।
- हत्याकांड के तीन दिन बाद तक आरोपी सिपाहियों की वर्दी कब्जे में क्यों नहीं ली गई?
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विवेक तिवारी हत्याकांड
- फोटो : amar ujala
- पोस्टमार्टम में विवेक को ऊंचाई से गोली मारे जाने की बात सामने आई थी जबकि प्रत्यक्षदर्शी का कहना था कि सिपाही ने कार के सामने खड़े होकर गोली चलाई। कौन झूठ बोल रहा है और क्यों।
- विवेक की कार दुर्घटनाग्रस्त हुई तो मौके पर पहुंची पुलिस ने उसे एक घंटे तक अस्पताल ले जाने की कोशिश क्यों नहीं की? क्या पुलिस विवेक की मौत का इंतजार कर रही थी?
- विवेक की पूर्व सहकर्मी को गोमतीनगर थाना से झूठ बोलकर कैसरबाग कोतवाली क्यों ले जाया गया? कहीं यह काम पूरे केस में लीपापोती के लिए तो नहीं किया गया था?
- विवेक को गोली लगने और उनकी मौत होने की सूचना पुलिस ने उनके परिवारीजनों को क्यों नहीं दी?
- पुलिस का तर्क था कि उनके पास विवेक के परिवारीजनों का नंबर नहीं था और उनके एपल के मोबाइल फोन पर लॉक लगा था इसलिए किसी को सूचना नहीं दे सके। पुलिस ने विवेक के साथ मौजूद पूर्व सहकर्मी से नंबर क्यों नहीं लिया? विवेक की पत्नी कल्पना उन्हें लगातार फोन कर रही थीं। पुलिस कॉल रिसीव कर लेती तो भी परिवारीजनों से सपंर्क हो जाता। पूर्व सहकर्मी को भी फोन करने नहीं दिया गया।
- लोहिया अस्पताल के डॉक्टर ने विवेक की पत्नी को हादसा होने की जानकारी क्यों दी, जबकि सबको मालूम था कि उन्हें गोली लगी है।
- विवेक की हत्या की एफआईआर दर्ज कराने में इतनी जल्दबाजी और आपाधापी क्यों की गई? पुलिन से उनके परिवारीजनों से संपर्क करने के बजाए पूर्व सहकर्मी से मनमानी तहरीर क्यों लिखाई?