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नोट बंदी से बढ़ रही समस्याओं का ऐसे हो सकता है समाधान, पढ़ें...

Thu, 17 Nov 2016 03:24 AM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
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डेमो - फोटो : amar ujala
नोट बंदी के सातवें दिन भी लोगों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। मंगलवार को शहर के कई बैंको में दोपहर तक पैसा खत्म हो गया तो आधे से अधिक एटीएम बंद हो गए। ऐसे में लोगों को लंबी कतारों में लगने के बावजूद राहत नहीं मिली। वहीं बैंकों और एटीएम के बाहर लंबी कतार में लगने के बावजूद पैसा नहीं मिलने से लोगों में गुस्सा बढ़ रहा है, जिसकी वजह से हंगामा और मारपीट की स्थितियां पैदा हो रही हैं। पेश है बढ़ रही मुश्किलों के समाधान पर एक रिपोर्ट....
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डेमो - फोटो : amar ujala
बैंक की ब्रांचों में खत्म हो रहा पैसा
जैसी कि उम्मीद थी मंगलवार को कई बार बैंक की शाखाओं में पैसा खत्म हुआ। एचडीएफसी विशालखंड के स्टाफ ने बताया कि सुबह करेंसी चेस्ट से 12 लाख रुपये कैश भेज गए थे। इनमें से 2 लाख रुपये के 100 रुपये के नोट तीन एटीएम में भेजे गए। दोपहर साढ़े बारह बजे तक बैंक में कैश खत्म हो चुका था तो ऑनसाइट एटीएम इससे पहले ही खाली हो गए।
समाधान : पैसा ज्यादा दिया जाए
हर शाखा को इस समय 30 से 60 लाख रुपये कैश की जरूरत है, जो उसे करेंसी चेस्ट से मिलना चाहिए। करेंसी चेस्ट से जुड़े स्टाफ का कहना है कि पैसा काफी है, लेकिन उसे सुरक्षित ढंग से शाखाओं में पहुंचाने के लिए वैन और स्टाफ उचित संख्या में नहीं है।
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डेमो - फोटो : अमर उजाला
20 फीसदी एटीएम खराब या बंद 
लखनऊ में किसी एटीएम में जाएंगे तो पहले से 40-60 लोगों की लाइन मिलेगी, यहां कुछ घंटे लगने की सोचें तो एटीएम से कैश खत्म होने की संभावना है। कई एटीएम खराब हैं। एक समय में 90 प्रतिशत एटीएम उपयोग में ही नहीं आ रहे हैं।
समाधान : एटीएम में पर्याप्त कैश भरा जाए, जो खराब हैं सुधारे जाएं 
500 और 1000 के नोट न रखने से एटीएम में 100 रुपये मूल्यवर्ग के अधिकतम 1000 नोट रखे जा रहे हैं। इनमें 40-50 लोगों को ही संतुष्ट किया जा सकता है। ऐसे में जरूरी है कि एटीएम खाली होते ही दोबारा उन्हें भरा जाए। राजधानी के 20 प्रतिशत एटीएम खराब हैं, या उपयोग में नहीं लाए जा सके हैं, उन्हें सुधारना होगा।

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डेमो - फोटो : Amar Ujala
 बैंक नहीं दे रहे पूरा पैसा 
केंद्र सरकार ने ग्राहकों को बैंकों से एक सप्ताह में 24 हजार और एक दफा में 12 हजार रुपये निकालने की अनुमति दी है। लेकिन कैश की कमी से कई बैंक ग्राहकों को पूरा पैसा नहीं दे रहे हैं। 10 हजार मांगने पर चार हजार ही दिए जा रहे हैं।
समाधान : जितना तय है, उतना तो दें
ग्राहकों को 12 हजार रुपये एक दफा में दिया जाएगा तो उनकी तात्कालिक जरूरतें पूरी हो सकेंगी। अगर चार हजार ही देंगे तो वे फिर से शाखाओं और एटीएम के चक्कर लगाने को मजबूर होंगे।
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डेमो - फोटो : अमर उजाला
बैंकों के बाहर तनाव, हुड़दंग
मंगलवार को राजधानी के कई बैंकों के बाहर तनाव और हुड़दंग की स्थितियां रहीं। कई जगह लाइन में बीच में घुसने को लेकर विवाद हुए और लोगों में हाथापाई भी हुई जिस पर पुलिस को  बल प्रयोग भी करना पड़ा।
समाधान : कतारों को बेहतर मैनेज करें
शाखाओं के बाहर लग रही कतारों को बैंक और पुलिस मिलकर मैनेज करें। टोकन बांटे जाएं जो पहले आए, उसका नंबर पहले हो और लाइन में खड़ा करने के बजाए 10-10 टोकन नंबरों को पुकार कर काम कराया जाए। हालांकि बैंक स्टाफ भीड़ को मैनेज करने में उत्सुक नहीं दिख रहा और कई पुलिसकर्मी अपने लोगों को काम पहले करवाने के लिए लाइन तुड़वाने में पीछे नहीं हट रहे।
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डेमो - फोटो : अमर उजाला
बड़े नोटों के चलते दिक्कत
बैंक स्टाफ द्वारा छोटे मूल्यवर्ग के नोट नहीं होने की वजह से ग्राहकों को 2000 के बडे़ नोट दिए जा रहे हैं, जिसकी वजह से न तो पहले से खुले रुपयों के संकट से जूझ रहे मार्केट में नागरिक इन्हें खर्च कर पा रहे हैं, और न ही अपने काम करवा पा रहे हैं।
समाधान : छोटे नोट की कमी खत्म हो
छोटे नोटों की कमी को लखनऊ में जल्द से जल्द खत्म करना होगा। आरबीआई को पांच सौ और सौ रुपयों के चार लाख पीस राजधानी की शाखाओं में उतारने की जरूरत है।
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डेमो
पुराने नोटों ने बढ़ाई मुश्किलें
आरबीआई ने अन-इश्यूएबल (ग्राहकों को जारी करने के आयोग्य) घोषित नोटों को भी करेंसी चेस्टों को वापस भेज दिया है। इन्हें मंगलवार को ग्राहकों को जारी किया गया। इन नोटों के मार्केट में पहुंचने पर ग्राहकों को काफी मुश्किलें पेश आ सकती हैं।
समाधान : पुराने नोट देना बंद करें
आरबीआई को इन नोटों को तत्काल बंद करने की जरूरत है। जिन करेंसी चेस्ट में इन्हें भेजा गया है वहां से इन्हें तत्काल वापस लिया जाए। अन्यथा नागरिकों के लिए करेंसी को लेकर नई तरह का संकट पैदा होगा।
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