लखनऊ के महानगर के निशातगंज स्थित मेट्रो सिटी के सामने गोमती में युवक का शव निकालने के लिए पुलिस ने संवेदनहीनता की हदें पार कर दीं। पहले तो मेट्रो सिटी चौकी इंचार्ज ने शव निकालने की आड़ में उसे आगे खिसका दिया। पानी के बहाव के साथ शव कुछ आगे चला गया। इलाकाई लोगों ने बताया कि यह क्षेत्र पेपरमिल कॉलोनी चौकी के अंतर्गत आता है। इसके बाद महानगर थाने की पुलिस में ही सीमा विवाद शुरू हो गया।
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अधिकारियों को जानकारी मिली तो उन्होंने पुलिसकर्मियों के पेंच कसे। पुलिस ने करीब तीन घंटे बाद पौने एक बजे शव को बाहर निकलावाया। लोगों का कहना था कि युवक के हाथ-पैर रस्सी से बंधे हुए थे। जबकि एएसपी ट्रांस गोमती जय प्रकाश ने इससे इन्कार किया। नदी में अज्ञात युवक का शव मिलने की सूचना सुबह करीब दस बजे तकिया निशातगंज निवासी अकील अख्तर ने दी थी। अकील ने बताया कि वह घर से बाहर टहलते हुए नदी की तरफ गए तभी पानी में शव उतराता देखा था।
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निशातगंज चौकी इंचार्ज सहित महानगर थाने की फोर्स मौके पर आ गई और शव आगे निकलवाने की आड़ में शव आगे बहाकर कार्रवाई से बचने की कोशिश की। यह देखकर मौके पर जुटे लोगों ने इसकी सूचना पेपरमिल कॉलोनी चौकी पर दी। मौके पर पहुंचे पुलिस चौकी इंचार्ज ने गोताखोरों को बुलवाया और शव की गर्दन पर रस्सी बांधकर उसे खींचा गया। शव तीन से चार दिन पुराना लग रहा है।
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मृतक की उम्र करीब 38 वर्ष बताई जा रही है। शरीर पर नीले रंग की जींस और बेल्ट थी। सिर के अगले हिस्से में बाल नहीं हैं। बायीं कलाई पर चमड़े के पट्टे वाली घड़ी और चेहरे, कंधे, सीने व पेट पर चोटों के निशान थे। शरीर पर कुछ निशान ऐसे भी थे जिससे गोलियां मारने की आशंका लग रही थी। एएसपी ट्रांस गोमती का कहना है कि हत्या के बाद शव नदी में फेंका गया है। फिलहाल शव को 72 घंटे तक मॉच्युरी में रखा जाएगा।
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हाथ-पैर बांधकर शव फेंकने की अफवाह उड़ी
सुबह करीब साढ़े दस बजे तक मौके पर सैकड़ों लोगों की भीड़ जुट चुकी थी। शहर के बीचों-बीच युवक की हत्या कर हाथ-पैर बांधकर शव नदी में फेंकने की अफवाह फैल गई। पुलिस ने शव निकलवाया तो शरीर पर कहीं भी रस्सी या किसी अन्य साधन से हाथ-पैर बांधने के निशान नहीं मिले। एएसपी ट्रांस गोमती ने बताया कि शव अकड़ चुका था।
पौने तीन घंटे रही अफरातफरी
महानगर पुलिस शव नदी से निकालने के लिए करीब दो घंटे तक असहाय खड़ी रही। काफी देर तक तो रस्सी का ही इंतजाम नहीं हो सका। हड़बड़ी में गोताखोरों ने शव की गर्दन पर रस्सी बांध दी जबकि पेट या कमर पर रस्सी लपेटी जानी चाहिए थी। दोपहर करीब पौने एक बजे शव बाहर निकाला जा सका।