एक साल पहले हुए बिसाहड़ा कांड के जख्म भरने लगे थे। लोगों की जिंदगी पटरी पर लौट रही थी लेकिन इकलाख की हत्या के एक आरोपी युवक रवि उर्फ रोबिन की अचानक मौत से जख्म एक बार फिर ताजा हो गया है। सांप्रदायिक तनाव की स्थिति पैदा हो गई है। मामले की गंभीरता को देख गांव को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। संगीनों के साये में रहने से लोग परेशान आ चुके हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
गत वर्ष 28 सितंबर की रात गो हत्या की अफवाह पर बिसाहड़ा गांव निवासी इकलाख के घर पर कुछ असामाजित तत्वों ने हमला बोल दिया था। भीड़ ने इकलाख की पीट पीटकर हत्या कर दी गई थी, जबकि उसके बेटे दानिश को अधमरा कर दिया था। इस घटना ने साम्प्रदायिकता का रूप ले लिया था।
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बिसाहड़ा गांव लंबे समय तक सुर्खियों में रहा। समय बीतने के साथ धीरे- धीरे लोगों की जिंदगी पटरी पर आने लगी थी, हालांकि जेल में बंद इकलाख के हत्यारोपियों के परिजन कोर्ट के चक्कर लगा रहे हैं। 28 सितंबर की उस काली रात को भुलाकर लोग सांप्रदायिक सौहार्द कायम करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन मंगलवार को जेल में बंद रवि उर्फ रॉबिन की मौत से बिसाहड़ा कांड के जख्म एक बार फिर ताजा हो गए हैं।
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बिसाहड़ा में बवाल
- फोटो : अमर उजाला
बिसाहड़ा गांव एक बार फिर सुर्खियों में है। माहौल बिगडने से पुलिस प्रशासन के हाथ पांव फूल गए हैं। एक साल पहले जो नजारा था उसी तरह आज भी गांव छावनी में तब्दील हो गया है। गांव के पूर्व प्रधान भाग सिंह का कहना है कि इसकी काफी कीमती चुकानी पड़ी है। गांव के युवकों से कोई रिश्ते करने को तैयार नहीं है।
ग्रामीण राजेंद्र सिंह का कहना है कि यदि प्रदेश सरकार निष्पक्ष होकर काम करती तो बिसाहड़ा कांड इतना अधिक तूल न पकड़ता है। वोट की राजनीति ने सारा खेल बिगाड़ दिया है। उनका कहना है कि इससे पहले गांव में कभी भी इस तरह की घटना नहीं हुई।