उसी तरह उन्होंने आज रामलला के सामने जब साष्टांग दंडवत, दर्शन, पुजारियों व संतों के प्रति सम्मान, आरती से लेकर कोदंड राम की मूर्ति हाथों में लेते समय व डाक टिकट जारी करते समय पर जिस तरह का भाव दिखाया उससे वह 500 वर्षों की प्रतीक्षा को साकार करते हुए भविष्य के प्रसाद का भी प्रबंध कर गए। मोदी की मुद्राओं ने आस्था व संविधान दोनों में संतुलन बनाने और आलोचकों को मुंह बंद करने के लिए मुखरता से ज्यादा मौन का सहारा लिया।