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धुनुचि नृत्य से कर रहे मां की आराधना, लखनऊ में दिखी बंगाल की झलक, तस्वीरें

Wed, 27 Sep 2017 05:38 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
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रंग-बिरंगी रोशनी से जगमगाते दुर्गा पूजा पांडाल धूप व लोभान की खुशबू से महक रहे हैं। मंगलवार ढाकियों की थाप से देर रात तक गूंजते पंडालों में महाषष्ठी के साथ ही मां का पूजन शुरू हुआ। भोर में बंगाली क्लब में श्रद्धालुओं का घंटे भर तक चला चंडी पाठ, शाम को लोबान से महकती धुनुचि पर भक्त झूमे तो ढाक की गूंज ने अपने घर आई मां का नाद किया। पांडालों में कोलकाता से आए ढाकियों की ढाक पंडालों के बाहर रोड तक गूंजी तो बांग्लाभाषी को मां पूजने शाम को उमड़े। ढाक-धुनुचि संग दुर्गा पूजा पंडालों में बंगाल सा नजारा देखने को मिला।
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शहर के 100 से अधिक पांडालों में मां सोमवार को पंचमी पर ही विराज चुकी थीं, लेकिन मंगलवार से महाषष्ठी के पूजन शुरू हुए। पश्चिम बंगाल से ढाक बजाने आए ढाकियों की थाप पर दुर्गा पूजा की खुमारी में देर रात तक भक्तों ने थिरक कर मां की आराधना की। मॉडल हाउस, लाटूश रोड, हीवेट रोड, गोमतीनगर, भूतनाथ, इंदिरानगर, चारबाग, आलमबाग और आशियाना-कैसरबाग के तमाम दुर्गा पूजा पांडालों के आसपास का इलाका धुनुचि की लोबान की महक से गमक उठा।
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शाम को संध्यारति के बाद भक्तिगीत के अलावा सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी भक्त जुटे। इस सबके बीच भक्तों ने मां की लोबान से संध्यारति उतारी। षष्ठी को आह्वान के साथ ही सुबह से सजे-धजे दुर्गा पूजा पांडालों में मां का पूजन-अर्चन शुरू हुआ। पुरोहितों की मौजूदगी में आह्वान, अधिवास बोधन के बाद मां की आराधना हुई। शाम को पांडालों में मां को अस्त्र दिए गए।

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परंपरागत बंगाली रूप में विराजी मां
अपनी पूजा के 103वें साल पूरे कर रहा बंगाली क्लब में इस बार मां की साढ़े पांच हाथ की प्रतिमा को पारंपरिक बंगाली आसन (100 साल पुरानी लकड़ी पर) विराजा गया है। क्लब पदाधिकारियों ने बताया कि अपने बेटों गणेश और कार्तिक के साथ मायके आई मां के पांडाल में लाइट के काम के अलावा हर दिन शाम 6 बजे से सांस्कृतिक आयोजन होंगे। रोज ढाक वादन होगा। इस बार की थीम पं. ईश्वरचंद्र विद्यासागर के जीवन और उनके सामाजिक कार्यों को लेकर है। उनके स्लोगन दर्शाए गए हैं।
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संधि पूजा होगी खास
शहर के तमाम दुर्गा पूजा पांडालों में से एक रामकृष्ण मठ की संधि पूजा सबसे खास मानी जाती है। 28 सितंबर की रात होने वाली संधि पूजा के अलावा सुबह पांच वर्षीय कन्या का कुमारी पूजन भी होगा। हर दिन शाम को सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और भोग बंटेगा। आयोजन के दौरान सात खास पूजन होंगे।
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