केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में शनिवार शाम आग की लपटें और धुआं फैलते ही हर तरफ अफरातफरी मच गई। दहशत के मारे तीमारदार मरीजों को लेकर भागने लगे। कोई स्ट्रेचर खींच रहा था तो कोई मरीजों को गोद में लेकर बाहर की तरफ भाग रहा था। तीमारदारों के मुताबिक आग की लपटों के साथ दो धमाके हुए। माना जा रहा है कि ये धमाके आग का सिलेंडर फटने से हुए।
विज्ञापन
2 of 13
सीतापुर के आरपी सिंह ने बताया कि उनके परिवार केलोग बाहर खाना पका रहे थे। तभी आग लग गई। जब लोग भागने लगे तो वह बेटे को लेकर भागने की कोशिश की तो स्ट्रेचर नहीं मिला। तो वह गोद में लेकर ही बाहर भागे। बीच रास्ते में कुछ अन्य लोगों ने मदद की तो वह निकल सके।
विज्ञापन
3 of 13
हर कोई अपनों को ढूंढ रहा था
इस बीच अग्निकांड की खबर शहर में आग की तरह फैल गई। देखते ही देखते नाते-रिश्तेदारों के ट्रॉमा सेंटर पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। बदहवास होकर हर कोई अपनों को ढूंढने में लगा हुआ था। दिनेश ने बताया कि उनका मरीज तीसरे तल पर भर्ती था। शाम का वक्त था तो बाहर चले आए थे। तब तक उनको आग की सूचना मिली तो पैरों तले की जमीन खिसक गई। वह बदहवासी की हालत में तीसरे फ्लोर की ओर भागे।
4 of 13
चारों तरफ धुआं भर गया था। तीसरे फ्लोर पर जाने के बाद उनका मरीज वहां था ही नहीं। किसी से पूछने पर कोई बता नहीं पा रहा था। अपने साथ के दूसरे लोगों का फोन नहीं लग रहा था। वह भागकर चौथे पर गए तो वहां भी उनका मरीज नहीं मिला। इस दौरान धुएं के कारण उनकी सांस फूलती जा रही थी। तभी उनके एक साथी ने उन्हें फोन पर बताया कि उनकेमरीज को सुरक्षित नीचे पहुंचाया जा चुका है। तब जाकर जान में जान आई।
विज्ञापन
5 of 13
सड़क पर इलाज, तीमारदारों की भी तबीयत बिगड़ी
ट्रॉमा सेंटर से सुरक्षित बाहर निकलने के बाद मरीजों को शताब्दी, लॉरी कॉर्डियोलॉजी, गांधी वार्ड सहित सभी वार्डों में भेजा जाने लगा था। हालांकि इन वार्डों में पहले से ही मरीज थे। इसके कारण सबको जगह नहीं मिल पाई थी। कई मरीजों को वार्डों के बाहर रखकर इलाज किया जाने लगा।
विज्ञापन
6 of 13
ट्रॉमा के बाहर सड़कों पर भी लोग पड़े रहे। कई मरीजों को स्ट्रेचर नहीं मिली तो उनको जमीन पर लिटा दिया गया था। मरीजों के साथ तीमारदारों की भी तबीयत खराब होने लगी थी।
विज्ञापन
7 of 13
ट्रॉमा सेंटर के द्वितीय तल पर शॉर्ट सर्किट से भीषण आग लगी। चारों तरफ धुआं फैला। पर, न तो फायर सेफ्टी अलार्म बजा और न ही एमसीवी गिरा। सर्वे रिपोर्ट के बावजूद ट्रॉमा प्रशासन सुरक्षा के प्रति लापरवाह बना था।
8 of 13
ट्रॉमा सेंटर के दूसरे तल पर लपटें उठने के साथ चीखपुकार मची और तीसरे व चौथे तल तक धुआं फैलने पर मरीज और तीमारदारों को खतरे में फंसे होने का अहसास हुआ। भगदड़ मच गई लेकिन फायर सेफ्टी अलार्म नहीं बजा, न ही एमसीवी गिरी। बिजली सप्लाई जारी रहने से तारों में आग भड़कती रही।
9 of 13
ललितपुर के सुखदीन, बाराबंकी के नागेंद्र समेत अनेक तीमारदारों ने मौके पर पहुंचे डीएम-एसएसपी से लापरवाही की शिकायत की। अफसरों ने तीमारदारों का गुस्सा शांत कराने के साथ मरीजों को केजीएमयू व अन्य अस्पतालों में शिफ्ट कराया।
10 of 13
पलक झपकते ही निकलने लगीं लपटें
तीसरी मंजिल पर भर्ती मरीज की तीमारदार आतिया परवीन देर रात तक दहशत में रहीं। वे बताती हैं-धुएं के साथ चिंगारी निकली और पलक झपकते ही वार्ड में आग की तेज लपटें उठने लगीं। जब तक कर्मचारियों को सूचना देते पूरा वार्ड धुएं से भर गया। कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। किसी तरह अपने मरीज को लेकर नीचे की ओर भागी।
11 of 13
लोग एक-दूसरे को धक्का देने लगे
तीमारदार सबा ने बताया कि चिंगारी सेमिनार रूम से निकली थी। इसकी सूचना गार्डों को दी। अंदर काफी अंधेरा छा गया। लोग निकलने के लिए एक-दूसरे को धक्का देने लगे। जिसको जहां जगह मिली वहीं से निकलने की कोशिश करने लगा। हर तरफ चीख थी।
12 of 13
दो घंटे लग गए चौथी मंजिल की खिड़कियों के शीशे तोड़ने में
इमारत से धुआं निकालने के लिए कर्मचारियों और फायर ब्रिगेड के कर्मियों ने खिड़कियों के शीशे तोड़ने शुरू कर दिए। कर्मचारी आशीष ने बताया कि उसने और उसके साथियों ने करीब 50 लोगों को सुरक्षित जगह पहुंचाया। धुएं के कारण हम लोगों का सांस लेना दूभर हो रहा था। करीब दो घंटे में चौथे मंजिल तक के शीशे तोड़े गए।
बिखरी दवाइयां...छूटे चप्पल... बता रही दहशत की कहानी
फर्श पर बिखरी दवाइयां, बेड के पास गिरे झोले व सामान, पानी की बोतलें और सीढ़ियों पर छूटे हुए चप्पल दहशत की कहानी कह रहे थे। आग की लपटों और धुएं से खुद को बचाने के लिए भगदड़ मच गई। चिंता सिर्फ इस बात की थी कि कैसे अपनी और मरीज की जान बचाई जाए।