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आईटी इंडस्ट्री से जुड़े लोगों को लॉकडाउन के दौरान खूब मिला काम, विशेषज्ञ बोले...

Mon, 07 Sep 2020 05:55 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव रोली खन्ना, अमर उजाला, लखनऊ
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मोहम्मद कैस मुजीब, लता रस्तोगी - फोटो : amar ujala
महामारी के दौरान घरों में बंद लोगों ने तकनीक को दोस्त बनाया और खुद को टेक्नो फ्रेंडली बनाने पर पूरा फोकस किया। इस दौरान लोगों ने छोटी-छोटी जरूरतों के लिए तकनीक का सहारा लिया। जो थोड़ा टेक्नो फ्रेंडली थे, उन्होंने ऑनलाइन सीखा और खुद को तैयार कर लिया, लेकिन जो तकनीक के जानकार नहीं थे उन्होंने डवलपर और तकनीक सलाहकार की मदद से अपने पैर जमाए। आईटी इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि जब किसी के पास काम नहीं था तो हमारे पास लखनऊ में बैठे-बैठे सिर्फ लखनऊ या उत्तर प्रदेश से ही नहीं बल्कि देश भर से काम आया। राजधानी में तकनीकी सेवाएं देने के काम से जुड़े लोगों से हमने बात की और जाना कि लॉकडाउन से अनलॉक तक उनके काम की क्या स्थिति रही और आने वाले समय में वे किस तरह की संभावनाएं देख रहे हैं।
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नमन चौधरी - फोटो : amar ujala
पहले काम न के बराबर था, पर कोरोना काल वरदान बन गया 
नमन चौधरी एक फ्रीलांसर डवलपर हे। साथ ही डिजिटल मार्केटिंग का काम करते हैं। इस काम में उनके सहयोगी हैं अभय गुप्ता। नमन बताते हैं कि हमने एक कंपनी बनाने की योजना बनाई थी, लेकिन कोरोना आते ही निराश हो गए थे। अचानक हमारे पास काम ही काम आ गया। इस दौरान मैंने पांच वेबसाइट बनाई, एक फाइव स्टार होटल का काम मिला। इसके अलावा डिजिटल मार्केटिंग ने आय का एक जरिया बना दिया। कुल मिलाकार जिस कंपनी की योजना को हमने स्थगित कर दिया था, उसके लिए 50 फीसदी काम हमारा आसान हो गया। 


 
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मोहम्मद कैस मुजीब - फोटो : amar ujala
नए क्लाइंट मिले, 50 फीसदी बढ़ा काम 
मोहम्मद कैस मुजीब एसेजेन कनसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड नाम से कंपनी चलाते हैं। कहते हैं कि शुरुआत में थोड़ी दिक्कत हुई, क्योंकि लॉकडाउन अचानक से आया, लेकिन थोड़े दिन बाद नए कस्टमर मिले हैं और 50 फीसदी काम बढ़ गया है। पिछले तीन महीने में ऑनलाइन स्टोर खोलने की दर में दस फीसदी की वृद्धि हुई है। टेली मार्केटिंग बंद हुई है और सोशल मीडिया मार्केटिंग बढ़ी है, क्योंकि इसमें यूजर के पास देखने या बाद में देखने का पावर होता है। इसके अलावा इस दौरान वीडियो बहुत देखे गए हैं। साथ ही वीडियो के बीच विज्ञापन जुड़ने लगे तो और काम बढ़ा। सबसे बड़ी चीज है कि ऑनलाइन लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम विकसित हो रहा है और आने वाले समय में आईटी कंसल्टेंट व डवलपर की मांग बढ़ेगी। 

 

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लता रस्तोगी - फोटो : amar ujala
लखनऊ, इंदौर जैसे शहर तकनीक को लेकर जागरूक हुए
न्यूजेन एप की सह संस्थापक लता रस्तोगी बताती हैं कि हम लोगों के पास पैन इंडिया काम बहुत था और है। कोविड के दौरान लखनऊ, इंदौर जैसे शहर के लोग जागरूक हुए या यूं कहिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने लगे हैं। कोविड के दौरान ई कॉमर्स स्टोर की बाढ़ आ गई है। इसके अलावा ऑनलाइन लर्निंग और होम डिलीवरी सिस्टम ने तकनीक को हर किसी की जरूरत बना दिया है। यह आईटी सेक्टर के लिए वरदान बन गया। मेरे हिसाब से 20 से 30 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। एक और बदलाव आया है। बड़ी फर्मों ने काम कम किया है, जबकि छोटी फर्मों ने काम बढ़ाया है। 

कुछ एसे बदलाव भी देखने को मिले
डिजिटल मार्केटिंग से जुड़ी कंपनी के शुभम व बल्लभ बताते हैं कि हर कोई डिजिटल तो होना चाह रहा है, लेकिन लोगों के पास पैसे नहीं हैं। भविष्य में भुगतान करने का कहकर लोग काम करवाना चाह रहे हैं। इसी तरह जो भुगतान कर रहे हैं, उन्होंने अपना बजट सीमित कर दिया है। कुछ लोग जोड़तोड़ से ही काम चलाना चाहते हैं।  
 
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जयंत कृष्णा - फोटो : amar ujala
विशेषज्ञ बोले- आईटी डवलपर की जिम्मेदारी बढ़ गई
लखनऊ में आईटी इंडस्ट्री में डवलपर की संख्या करीब 15000 हैं। इनमें से 10 हजार दो बड़ी कंपनियों में हैं, जबकि 5000 छोटी कंपनियों में और फ्रीलांसर हैं। यह संख्या 15 साल पहले करीब 200-250 थी। इसमें बीपीओ सेक्टर की संख्या शामिल नहीं है। महामारी के इस दौर में आईटी डवलपर की जिम्मेदारी बढ़ गई है। ऑनलाइन लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम एक अनिवार्य जरूरत बन गया है। - जयंत कृष्णा, पूर्व में टीसीएस और स्किल इंडिया मिशन से संबद्ध, वर्तमान में सेंटर फार स्ट्रेटिजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के सीनियर फेलो 
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