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पीसीएस - 2017 में शहर का परचम लहराने वाले सफल अभ्यथियों ने बताए कामयाबी के गुर

Fri, 11 Oct 2019 05:11 PM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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पीसीएस-2017 - फोटो : amar ujala
लोक सेवा आयोग ने पीसीएस 2017 का परिणाम बृहस्पतिवार देर शाम को जारी कर दिया। राजधानी के कई अभ्यर्थियों ने सफलता का स्वाद चखा है। ज्यादातर सफल अभ्यर्थी पहले से ही किसी न किसी प्रशासनिक पद पर कार्यरत हैं। सफल अभ्यर्थियों ने बताया कि इंटरनेट से पढ़ाई का चलन बढ़ गया है, लेकिन कितना पढ़ना है, इसको समझना बेहद जरूरी है। ज्यादा नहीं पर फोकस होकर पढ़ाई करें। साथ ही किताबों और पेपर का साथ न छोड़ें।
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आशुतोष मिश्रा, डिप्टी एसपी - फोटो : amar ujala
पती-पत्नी दोनों पीसीएस अधिकारी
आशुतोष मिश्रा, डिप्टी एसपी

आशुतोष मिश्रा ने बताया कि वर्ष 2016 मैंने और मेरी पत्नी जयजीत मिश्रा ने पीसीएस क्वालीफाई किया। वो एसडीएम के पद पर सेलेक्ट हुईं और मैं असिस्टेंट कमिश्नर के पद पर। मैंने दोबारा में इस बार डिप्टी एसपी के पद पर सेलेक्ट हुआ हूं। इसमें मेरी पांचवी रैंक आई है। हम दोनों पति-पत्नी ने बीटेक और एमबीए किया। दोनों ने साथ मुंबई में नौकरी भी की। वर्ष 2015 में दोनों ने शादी कर ली उसके बाद नौकरी छोड़ प्रशासनिक सेवा में जाने का निर्णय लिया। पिता एसएस मिश्रा एडिशनल कमिशनर, सेल्स टैक्स से सेवानिवृत्त हैं। मेरी बहन पूजा मिश्रा 2011 बैच की पीसीएस अधिकारी हैं। मां अनुप्रिया गृहणी हैं। पिता और बहन पहले से ही अधिकारी रहे, इसलिए उनसे काफी प्रोत्साहन मिला। सफलता का श्रेय परिवार को देता हूं।
टिप्स- लेखन कौशल पर ज्यादा ध्यान दें। ऑनलाइन में कंटेंट का भंडार बहुत है। जरूरत के अनुसार लिमिट कंटेंट की पढ़ाई करें।
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रितेश त्रिपाठी- डीएसपी, प्रज्ञा त्रिपाठी- जिला रोजगार अधिकारी - फोटो : amar ujala
भाई-बहन ने एक साथ पाई सफलता
रितेश त्रिपाठी- डीएसपी, प्रज्ञा त्रिपाठी- जिला रोजगार अधिकारी

रितेश त्रिपाठी बताते हैं कि मैं डीएसपी और मेरी बहन प्रज्ञा त्रिपाठी का जिला रोजगार अधिकारी केपद पर चयन हुआ है। इससे पहले मेरा कॉमर्शियल टैक्स ऑफिसर के पद पर सेलेक्शन हो चुका है। मैंने नोएडा से बीटेक किया और दो साल टीसीएस में नौकरी के बाद तैयारी में लग गया। पिता मोहन चंद्र त्रिपाठी भी पीसीएस अधिकारी थे। वर्ष 2012 में उनकी कैंसर से मृत्यु हो गई। इसके बाद हम भाई-बहन ने पीसीएस अधिकारी बनने की ठानी। मां सावित्री गृहणी हैं। प्रज्ञा बताती हैं कि मैंने लखनऊ विवि से एमए किया। दूसरे प्रयास में सफलता मिली। सफलता का श्रेय मां को देते हैं।
टिप्स- हम दोनों ने सेल्फ स्टडी पर भरोसा किया। खुद के नोट्स बनाएं। करेंट अफेयर्स के लिए रोज अखबार पढ़ें।

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विनय कुमार सिंह - फोटो : amar ujala
नकारात्मक विचारों से दूर ही रहें
विनय कुमार सिंह

इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (आईईटी) से 2011 बैच में बीटेक कर असिस्टेंट कमिश्नर सेल्स टैक्स के रूप में काम करते हुए किसान नरेंद्र सिंह के बेटे विनय सिंह ने अपने दूसरे ही प्रयास में एसडीएम पद प्राप्त कर लिया। विनय ने कहा कि मेरा फोकस आईएएस पर था इसलिए कॉन्सेप्ट काफी क्लीयर था। नकारात्मक विचारों से दूर होकर पढ़ाई करने से सफलता जरूर मिलती है।
टिप्स- कंटेंट बहुत है, क्या पढ़ना है, यह चुनना पड़ेगा। असफलता से डरें नहीं, नियमित तैयारी करें।
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प्रियंका बाजपई - फोटो : amar ujala
बेसिक मजबूत करें, सफलता मिलेगी
प्रियंका बाजपेई

आईटी कॉलेज से स्नातक और लखनऊ विवि से पब्लिक एड में पीजी करने वाली प्रियंका बाजपेई ने अपने तीसरे प्रयास में डिप्टी एसपी का पद प्राप्त किया। प्रियंका कानपुर में एक्साइज इंस्पेक्टर के पद पर तैनात हैं। वे कहती हैं कि प्रतियोगी परीक्षा में सफलता के लिए अपना बेसिक मजबूत करना जरूरी है। जो पढ़ा मन लगाकर पढ़ा। पिता राकेश बाजपेई बिजनेसमैन और मां आशा गृहणी हैं।
टिप्स- असफलता पर घबराएं नहीं, निरंतर प्रयास करते रहें।
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संगम प्रजापति - फोटो : amar ujala
दूसरे प्रयास में बने डिप्टी एसपी
संगम कुमार प्रजापति

सीतापुर में प्राइमरी शिक्षक संगम कुमार प्रजापति ने नियमित तैयारी से अपने दूसरे इंटरव्यू में ही डिप्टी एसपी पद पा लिया। इंटर तक राजधानी के यूनिवर्सल पब्लिक स्कूल से पढ़ाई करने वाले संगम ने राजधानी में रहकर पीसीएस की तैयारी की। पिता पंजाबी राम प्रजापति सेवानिवृत्त सब इंस्पेक्टर थे। संगम को उनसे भी आगे बढ़ने की काफी प्रेरणा मिली।
टिप्स- नियमित अभ्यास से सफलता मिलती है, इसका कोई शार्टकट नहीं। आजकल ऑनलाइन काफी कंटेंट है, उसका बेहतर प्रयोग करें।
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अंकिता मिश्रा - फोटो : amar ujala
जॉब के साथ की छह घंटे पढ़ाई
अंकिता मिश्रा

आईटी कॉलेज से बीएससी और लखनऊ विवि से एमएससी करने के बाद अलीगंज निवासी अंकिता मिश्रा ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू की और 2014 में कॉमर्शियल टैक्स ऑफीसर के पद पर तैनात हुईं। अंकिता कहती हैं कि सेल्फ स्टडी पर मेरा जोर रहा। मैं अपनी जॉब के साथ लगभग छह घंटे तैयारी करती थी। रात दो बजे तक पढ़ती थी। इंटरनेट ने काफी सहयोग किया। इससे सूचनाएं व इनोवेटिव जानकारी मिली जिसने सफलता दिलाई। पिता आशुतोष मिश्रा रियल एस्टेट कारोबारी हैं और मां सरोज गृहणी।
टिप्स- धैर्य के साथ तैयारी करें और लगातार प्रयास करें। रिवीजन से चीजें जल्द याद होती हैं। अपने नोट्स पर विश्वास करें।

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अजीत कुमार यादव - फोटो : amar ujala
किताबों पर भरोसा, ऑनलाइन कंटेंट पर कम
अजीत कुमार यादव, पद- बीडीओ

अजीत कुमार यादव बताते हैं कि यह मेरा चौथा प्रयास था। हर बार मेंस तक पहुंच जाता था। इस बार साक्षात्कार के लिए बुलावा आया और चयन हो गया। मूल रूप से मैं जौनपुर का हूं। पिता अशोक  यादव वहां खेती करते हैं और एक कॉलेज के प्रबंधक हैं। मां निर्मला गृहणी हैं। बीडीओ पद पर जॉइनिंग के बाद भी पीसीएस दूंगा। लखनऊ विवि से पढ़ाई करने का काफी फायदा मिला। मैंने तैयारी मुख्य रूप से किताबों से ही की। ऑनलाइन कंटेंट पर कम ध्यान दिया। करेंट अफेयर्स के लिए रोज अखबार पढ़ा। साक्षात्कार से पहले मॉक टेस्ट ने तैयारी में मदद की।
टिप्स- सतत पढ़ाई जरूरी है। हर विषय की अच्छी किताबें पढ़ें। लगातार तैयारी से सफलता जरूरी मिलेगी।

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आशीष भाष्कर - फोटो : amar ujala
आईएएस की तैयारी ने की काफी मदद
आशीष भास्कर, पद- वित्त एवं लेखाधिकारी

लखनऊ विवि से बीए और दिल्ली से एलएलबी करने वाले आशीष भास्कर ने बताया कि मैं 2016 से आगरा में सब रजिस्ट्रार पद पर तैनात हूं। उसके बाद दोबारा पीसीएस दिया और सेलेक्ट हो गया। मैंने आईएएस के लिए तैयारी की जिससे मेरी तैयारी मजबूत रही। करेंट अफेयर्स व साक्षात्कार के लिए अलग से फोकस किया। ऑनलाइन कंटेंट से नोट्स तैयार किए। आईएएस की तैयारी करता रहूंगा। पिता विजय शंकर मिश्रा सेवानिवृत्त शिक्षक व मां विमला गृहणी हैं। सफलता का श्रेय शिक्षकों व माता-पिता को देता हूं।
टिप्स- असफलता से घबराएं नहीं। लगन से तैयारी करें। किताबों के साथ ऑनलाइन का भी सहारा लें।
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सुरेंद्र सिंह राणा - फोटो : amar ujala
छह से सात घंटे की तैयारी दिलाएगी कामयाबी
सुरेंद्र सिंह राणा

इंदिरा नगर निवासी सुरेंद्र सिंह राणा ने लखनऊ विवि से स्नातक के साथ ही प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी। यहां से परास्नातक करने के बाद पीसीएस परीक्षा में शामिल हुए। एक-दो प्रयास में असफलता मिली तो निराश नहीं हुए। इस दौरान सुरेंद्र इलाहाबाद राज्य विवि में 2017 में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर तैनात हुए। इसके बाद भी तैयारी जारी रखी। विवि से लौटने के बाद 6-7 घंटे पढ़ाई करते थे। सोशल प्लेटफॉर्म का भी प्रयोग किया। पिता स्व. एमएस राणा एलआईसी ऑफीसर थे और मां दीपा गृहणी हैं।
टिप्स- फोकस से तैयारी करें, हिम्मत न हारें। सफलता जरूर मिलेगी। देश-विदेश की घटनाओं पर नजर रखें।
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