प्रदेश में अगले वर्ष होने वाले पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव विधानसभा चुनाव की मतदाता सूची से नहीं होंगे। राज्य निर्वाचन आयोग पंचायत चुनाव 2015 की मतदाता सूची से ही कराएगा। मतदाता सूची के पुनरीक्षण कार्यक्रम फरवरी 2020 के बाद शुरू किया जाएगा।
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पंचायत चुनाव
दरअसल, राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रदेश की 75 जिला पंचायतों, 821 क्षेत्र पंचायतों और 58,758 ग्राम पंचायतों में विधानसभा चुनाव की मतदाता सूची से चुनाव कराने का प्रस्ताव प्रदेश सरकार को भेजा था। प्रदेश सरकार ने आयोग के प्रस्ताव का कोई जवाब नहीं दिया। आयोग ने सरकार को स्मरण पत्र भी भेजे, लेकिन सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं आया। चुनाव में समय कम बचने से आयोग ने अब पंचायत चुनाव 2015 की मतदाता सूची से ही कराने का निर्णय किया है।
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आयोग का तर्क
अपर निर्वाचन आयुक्त वेद प्रकाश ने कहा कि आयोग की मतदाता सूची सर्वश्रेष्ठ है। पंचायत चुनाव की मतदाता सूची के पुनरीक्षण कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधि व जनता बढ़-चढ़ कर शामिल होते हैं। 2015 में आयोग की ही सूची से शांतिपूर्ण 77 फीसदी मतदान हुआ था। सूची को लेकर कोई शिकायत या आपत्ति नहीं मिली थी।
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पंचायत चुनाव (फाइल फोटो)
फरवरी में शुरू होगा पुनरीक्षण
पंचायत चुनाव की मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण कार्यक्रम फरवरी में शुरू किया जाएगा। ऐसा भारत निर्वाचन आयोग के विधानसभा की मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण कार्यक्रम को 14 फरवरी तक बढ़ाने के चलते होगा। आयोग ने फरवरी के अंतिम सप्ताह से पंचायत चुनाव की मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्यक्रम शुरू करने का फैसला किया है। अप्रैल अंत तक मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाशन कराने की योजना है।
अपर निर्वाचन आयुक्त ने बताया कि पंचायत चुनाव के लिए उन्हीं ग्राम पंचायतों का परिसीमन किया जाएगा जिनका कुछ क्षेत्र नगर निकाय सीमा में चला गया है। शासन ने 31 जनवरी तक परिसीमन का काम पूरा कर रिपोर्ट पेश करने को कहा है।