(बहराइच/उर्रा)। कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के ककरहा रेंज में गुरुवार को खेत की मेड़ के निकट घोंसलानुमा गड्ढे में मगरमच्छ के 35 बच्चे मिले हैं। इनमें 34 स्वस्थ हैं।
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सूचना पर वनाधिकारियों ने उन्हें गेरुआ नदी में सुरक्षित छोड़ दिया है। खेत में मगरमच्छ द्वारा घोंसला बनाने और बच्चे निकलने से ग्रामीणों के साथ वनाधिकारी भी अचंभित हैं।
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हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि कभी-कभार विशेष परिस्थितियों में मादा मगरमच्छ तालाब, नदी और नहर से सटे बलुई मिट्टी में भी घोंसला बनाकर अंडे सहेज देती हैं।
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ककरहा रेंज के जंगल से सटे गंगापुर और जंगल के बीच उगरहना चरागाह तालाब है। इससे सटकर सरयू नहर बहती है।
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गुरुवार सुबह खेतों में काम कर रहे ग्रामीणों ने तालाब के निकट मेड़ के पास से अजीब सी आवाज सुनी। मौके पर पहुंचे तो विशालकाय मादा मगरमच्छ तालाब की ओर जा रही थी। मेड़ के पास गड्ढेनुमा घोंसले में नन्हें मगरमच्छ का झुंड था। यह देख ग्रामीण सकते में आ गए।
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ग्रामीणों ने ककरहा वन क्षेत्राधिकारी कार्यालय को सूचना दी। डिप्टी रेंजर एसपी सिंह, वन दरोगा रामकुमार, वन्यजीव रक्षक रूप नरायन मौके पर पहुंचे। उन्होंने झाड़ियों में खोजबीन की लेकिन मादा मगरमच्छ नहीं मिली।
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वनकर्मियों ने ग्रामीणों से भगोना, बाल्टी आदि मंगाकर नन्हें मगरमच्छों को पानी भरकर सहेजा और रेंज कार्यालय ले गए।
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वन क्षेत्राधिकारी विकास अस्थाना ने बताया कि पवन कुमार के खेत की मेड़ में बने घोंसले से 35 मगरमच्छ निकले थे उनमें 34 जीवित मिले हैं। मगरमच्छ के जीवित बच्चों को कतर्नियाघाट के गेरुआ नदी में छोड़ दिया गया है।
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दो बार आ चुकी है मादा
गंगापुर के ग्रामीणों ने बताया कि मादा मगरमच्छ तालाब से निकलकर दो बार झाड़ियों तक आ चुकी है।