रामनगरी के 791 पौराणिक स्थल जब बुधवार शाम आस्था के दिव्य प्रकाश से आलोकित हुए तो विराट अयोध्या के वैभव की झलक भी दिखी। हर कोई इस दिव्य-अलौकिक पल का साक्षी बनने के लिए बेसब्र दिख रहा था। दीपोत्सव जन-जन के मन में बस गया।
रामनगरी में आस्था की इंद्रधनुषी छटा बिखरी हुई है। राम सियाराम, सियाराम जय-जय राम...की धुन के बीच अयोध्या का कण-कण राममय हो चुका है। लंका विजय के बाद अयोध्या लौट रहे अपने राम के अभिनंदन में रामनगरी के 791 पौराणिक स्थल जब बुधवार शाम आस्था के दिव्य प्रकाश से आलोकित हुए तो विराट अयोध्या के वैभव की झलक भी दिखी। हर कोई इस दिव्य-अलौकिक पल का साक्षी बनने के लिए बेसब्र दिख रहा था। दीपोत्सव जन-जन के मन में बस गया। देश-दुनिया के करोड़ों लोग इस दीपोत्सव के साक्षी बने। इस बार के दीपोत्सव में 14 वर्ष बाद वन से लौटे राम, सिया और लखन को अपने बीच देखने-मिलने का उत्साह तो भक्तों में दिखा ही, बल्कि कलियुग में पांच सदी के दर्द भरे इंतजार के बाद कोशलचंद्र दशरथनंदन राम का भव्य राममंदिर निर्माण शुरू होने का आनंद जन-जन में छाया हुआ था। अभी तक जो अयोध्या की पहचान थी, वो सबसे बड़े विवाद के रूप में थी। अब दीपोत्सव जैसे आयोजन अयोध्या की गरिमा-महिमा को पुर्नस्थापित कर रहे हैं।
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अयोध्या में दीपोत्सव
- फोटो : अमर उजाला
योगी सरकार द्वारा 2017 में शुरू किया गया खुशी, उल्लास व विजय का पर्व दीपोत्सव अब जन-जन का उत्सव बन गया है। जगद्गुरु रामदिनेशाचार्य ने कहा कि सीता राम दरस रस बरसे, जैसे सावन की घड़ी... इतनी खुशी है कि, त्रेतायुग की तरह सजी अयोध्या रामायणकालीन युग का अहसास करा रही है। महंत रामभूषण दास कृपालु बोले कि श्रीराम की विरासत को शिखर पर प्रतिष्ठित होते देखना निश्चित रूप से ही गौरवबोध का विषय है। वह समय जल्द ही आएगा जब दीपोत्सव में पांच देशों के नहीं बल्कि 105 देशों के अतिथि आएंगे।
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सरयू की आरती करते सीएम योगी
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वरिष्ठ साहित्यकार डॉ.रामानंद शुक्ल ने कहा कि यह दृश्य देखकर यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि त्रेतायुग की अयोध्या कुछ इसी तरह से अलौकिक रहेगी। हनुमान जयंती का संयोग और राममंदिर निर्माण से दीपोत्सव की आभा बढ़ गयी है। दीपोत्सव जन-जन का उत्सव बन गया है। रामकथा पार्क में रामराज्याभिषेक उत्सव के अवसर पर पर्यटन मंत्री नीलकंठ तिवारी ने दीपोत्सव को ग्लोबल बताते हुए कहा कि कई देशों के लोगों की ओर से उनके पास दीपोत्सव का अलग से बधाई संदेश आया है, यह दीपोत्सव के वैश्विक पहचान का ही संकेत है।
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अयोध्या में दीपोत्सव
- फोटो : अमर उजाला
दीपोत्सव की भव्यता व आकर्षण का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब प्रभु श्रीराम हेलीकॉप्टर रूपी पुष्पक विमान से माता सीता व अनुज लक्ष्मण के साथ रामकथा पार्क पर उतरे तो इस ऐतिहासिक पल को संजोने को हर कोई बेताब दिखा। छोटे बच्चों से लेकर महिलाएं व बुजुर्ग भी इस पल के साक्षी बनने के लिए मौजूद थे। 74 वर्षीय रामनंदन दास व 67 वर्षीय संतदास भी अपने राम के राज्याभिषेक का साक्षी बनने के लिए मौजूद थे। वे इस दृश्य को देखकर भावुक नजर आए। जो रामकथा पार्क तक नहीं पहुंच पाए उनके लिए प्रशासन द्वारा 50 स्थानों पर लाइव प्रसारण की व्यवस्था की गई थी।
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अयोध्या में दीपोत्सव
- फोटो : अमर उजाला
दीपोत्सव के मुख्य पर्व की अद्भुत छटा बुधवार को देखने के लिए शहर से देहात तक लोग टीवी के सामने डटे रहे। अयोध्या न जा पाने की कसक तो लोगों के दिलों में जरूर रही लेकिन इसकी काफी हद तक भरपाई कार्यक्रम के लाइव प्रसारण ने कर दिया। छोटी दीपावली होने के बावजूद अयोध्या में श्रीराम का राज्याभिषेक और उसके बाद आसमान में सतरंगी आतिशबाजी का लुत्फ लेते रहे।
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अयोध्या में दीपोत्सव
- फोटो : अमर उजाला
आयोजन सुबह झांकी के साथ ही शुरू हो गया है। छोटी दीपावली पर लोगों को खरीदारी का दिन था लेकिन अयोध्या के ऐतिहासिक दीपोत्सव को देखने की ललक मन में हिलोरे ले रही थी। बंदिशें राम की नगरी जाने से रोक रही थीं। कई दशक तक आंदोलन देखने वाले अब दीपोत्सव का आनंद भी लेना चाहते थे। बाजार के बजाए उनके पैर घर पर ही ठहर गए। टीवी और मोबाइल फोन पर अयोध्या के दीपोत्सव के लाइव पर नजर टिकी तो आकर्षण बढ़ता गया।
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अयोध्या में दीपोत्सव
- फोटो : अमर उजाला
पुष्पक विमान से अयोध्या के आराध्य श्रीराम, सीता और लक्ष्मण के उतरने। आरती उतारे जाने के साथ राम राज्याभिषेक को लेकर नजरें टिकी रही। नौ लाख दिए जलाने से दीपों के जगमगाने के रिकॉर्ड के बाद आतिशबाजी मनमोहक रही। नाका क्षेत्र के रहने वाले रवीश चंद्र पांडेय बताते हैं कि अयोध्या में दीपोत्सव को देखने की इच्छा थी लेकिन बंदिशों के चलते जा नहीं पाए। घर पर ही टेलीविजन पर कार्यक्रम को देखते रहे।
सोहावल के ओम प्रकाश सिंह बताते हैं कि अयोध्या के दीपोत्सव में न जाने पाने की कसक थी लेकिन मोबाइल फोन के जरिए ही वहां के आयोजन का आनंद लिया। रिकाबगंज के रहने वाले यश कुमार सिंह बताते हैं कि पांचवें दीपोत्सव की छटा अद्भुत थी। निकट से देखते तो आनंद आता, लेकिन घर से ही देखते रहे।