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मायावती ने दी सफाई, जूते-चप्पल उतारकर उनके सामने क्यों आया मुख्तार परिवार

Sun, 29 Jan 2017 02:41 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
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मायावती ने मुख्तार अंसारी के परिवार के बसपा में शामिल होने के वक्त उनके अलावा अन्य सभी नेताओं के जूते-चप्पल निकालकर खड़े होने पर सफाई भी दी। शनिवार को उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि संस्कृति व सभ्यता को लेकर लोग मंदिर-मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारे के प्रति जिस तरह आस्था रखते हैं, उसी तरह यह स्थान उनका घर होने के साथ-साथ दलित संतों, महापुरुषों व बसपा संस्थापक कांशीराम का संग्रहालय स्थल भी है। इसे लोग पवित्र स्थल मानते हैं। उन्होंने कहा कि यहां कोई भी जूता-चप्पल पहनकर नहीं जाता।
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खुद के सैंडिल पहने होने का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि वे अंदर वाली सैंडिल बाहर और बाहर वाली अंदर प्रयोग नहीं करती हैं। ऐसे में इस तरह की सोच अच्छी नहीं है। इस तरह की खबर दिखाने वाले उनकी नजर से गिर गए हैं। भविष्य में लोगों को ऐसी गलती नहीं करनी चाहिए।
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ऐसे लोगों को मीडिया के चौथे स्तंभ की गरिमा बनाए रखनी चाहिए। हालांकि वह यह बताते समय शायद भूल गईं कि कुछ माह पहले वह उसी हाल में दो प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुकी हैं जहां वे महापुरुषों के म्यूरल का संकेत कर रही थीं। उस समय वहां जूता-चप्पल पहन कर जाने को लेकर कोई रोक-टोक नहीं थी।

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मायावती भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह पर शनिवार को जमकर बरसीं। उन्होंने कहा कि भाजपा अध्यक्ष बसपा पर आपराधिक छवि के लोगों को संरक्षण देने का आरोप लगाते हैं। पहले उन्हें अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। उनके व उनकी पार्टी के दामन पर कितने दाग हैं। शाह खुद कितने मामले में फंसे और किस तरह छूटे, इसे उन्हें देखना चाहिए। मायावती ने कहा कि जो जिस मानसिकता का आदमी होता है, वह वैसे ही प्रोत्साहन देता है।
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राम मंदिर निर्माण को लेकर शाह के बयान पर पूछे सवाल के जवाब में मायावती ने कहा कि शाह कोई नई बात नहीं कर रहे हैं। वह घुमा-फिराकर वही बात कर रहे हैं, जो करते आए हैं। उन्हें पता होना चाहिए कि यह मामला सुप्रीमकोर्ट में है। जब तक वहां से कोई फैसला नहीं हो जाता, जनता और सुप्रीमकोर्ट इन्हें कोई गलत काम नहीं करने देगी।
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उन्होंने कहा कि वे दूसरे दलों की तरह चुनावी वादे नहीं करती हैं। जो कहतीं हैं, उसे करके दिखाती हैं। एक फरवरी से चुनावी रैलियां शुरू करने जा रही हूं। जनता के बीच में जो बातें कहूंगी, सत्ता में आने पर उसे पूरा करूंगी। उन्होंने सपा के घोषणापत्र को भी हवाई बताया। कहा कि पांच साल तक सत्ता में रही सरकार को वादे करने का अधिकार नहीं है। वह जनता को नासमझ न समझें।
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