मणिपुर में आतंकी हमले में शहीद हुए रामप्रसाद का पार्थिव शरीर जब उनके पैतृक गांव पहुंचा तो कोहराम मच गया। ये तस्वीरें देखकर आपकी भी आंखें नम हो जाएंगी। वह अपने बच्चों से 7 जून को घर वापस आने का वादा करके गए थे उसी दिन उनकी लाश घर पहुंची।
विज्ञापन
7 जून था घर आने का वादा, उसी दिन पहुंची शहीद की लाश
2 of 10
मणिपुर की राजधानी इम्फाल से करीब 80 किलोमीटर दूर तेंगनौपाल-न्यू समताल रोड पर पेट्रोलिंग के दौरान गुरुवार सुबह सेना की टुकड़ी पर हुए उग्रवादी हमले में शहीद 20 जवानों में एक फैजाबाद के रामप्रसाद यादव भी थे। शहीद राम प्रसाद 7 जून को घर आने वाले थे।
विज्ञापन
7 जून था घर आने का वादा, उसी दिन पहुंची शहीद की लाश
3 of 10
बीते गुरुवार दोपहर करीब ढाई बजे जैसे ही उसकी शहादत की सूचना परिवारीजनों को मिली तो घर में कोहराम मच गया। शहीद जवान के रिश्तेदारों व परिवारीजनों ने बताया कि वह पहले ही प्रयास में ही सेना में भर्ती हो गए थे।
7 जून था घर आने का वादा, उसी दिन पहुंची शहीद की लाश
4 of 10
पापा के सात जून को घर आने को लेकर सभी बच्चे मन में कई ख्वाब संजोए थे। कोई पापा के साथ घूमने को लेकर तो कोई नए कपड़े खरीदने को लेकर खुश था। शहीद जवान के घर में उनकी पत्नी जानकी देवी (38) के अलावा दो बेटी सविता (18) व अदिति (8) तथा तीन बेटे रामपाल (17), विकास (14) व विवेक (12) हैं।
विज्ञापन
7 जून था घर आने का वादा, उसी दिन पहुंची शहीद की लाश
5 of 10
पिता के शहीद हो जाने की सूचना से बड़ी बेटी सविता व बड़े बेटे रामपाल का रो-रोकर बुरा हाल था। उनका शव देख पत्नी और बच्चे होश खो बैठे। शव आते ही पूरे गांव में मातम पसर गया।
विज्ञापन
7 जून था घर आने का वादा, उसी दिन पहुंची शहीद की लाश
6 of 10
इस बार शहीद की बड़ी बेटी सविता के लिए रिश्ता देखा जाने वाला था। भतीजे अशोक यादव ने बताया कि चाचा के आगमन का सब बेसब्री से इंतजार कर रहे थे।
विज्ञापन
7 जून था घर आने का वादा, उसी दिन पहुंची शहीद की लाश
7 of 10
सहादतगंज स्थित सालारपुर मोहल्ले का रहने वाला रामप्रसाद यादव (42) पुत्र स्व. श्रीराम यादव सेना में 1999 में सिपाही पद पर भर्ती हुआ था। पहली पोस्टिंग जम्मू में मिली थी। वर्तमान में वह 6, डोगरा रेजीमेंट मणिपुर में लांस नायक पद पर तैनात थे।
7 जून था घर आने का वादा, उसी दिन पहुंची शहीद की लाश
8 of 10
उनके रिटायरमेंट में पांच साल का समय बचा था। पिता स्व. श्रीराम यादव व माता स्व. तिलका की पांच संतानों में वह तीसरे नंबर पर थे। शव के गांव पहुंचते ही लोगों की भीड़ लग गई और भरी दोपहर में लोग छतों पर जा पहुंचे।
7 जून था घर आने का वादा, उसी दिन पहुंची शहीद की लाश
9 of 10
जवान रामप्रसाद के पिछले साल अक्टूबर में ड्यूटी पर जाने के बाद सब लोग उसके सात जून की वापसी का इंतजार कर रहे थे और आज के दिन ही उनकी लाश गांव पहुंची।
7 जून था घर आने का वादा, उसी दिन पहुंची शहीद की लाश
10 of 10
परिजनों ने बताया कि गुरुवार को जब मणिपुर के इम्फाल में सुबह हमला हुआ तो उसके बाद शहीद राम प्रसाद की इकलौती बहन मीरा के लड़के विनोद यादव के मोबाइल पर वहीं से एक मेजर ने हमले में शहीद होने की सूचना दी। रविवार को पूरे सम्मान के साथ उनके शरीर गांव लाया और उनकी चिता को आग दी गई।