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मलिन बस्तियों में शिक्षा का उजियारा फैला रहे हैं लखनऊ यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स, देते हैं ये सीख भी

Fri, 20 Sep 2019 03:51 PM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
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मलिन बस्ती के बच्चों के साथ दुर्गेश त्रिपाठी - फोटो : amar ujala
भागदौड़ भरी जिंदगी में जहां हर आदमी अपने कामों में व्यस्त है, वहीं लखनऊ विश्वविद्यालय की एकल छात्र परिषद के सदस्य मलिन बस्तियों में शिक्षा का उजियारा फैला रहे हैं। दुर्गेश त्रिपाठी के नेतृत्व में परिषद सदस्य मलिन बस्तियों में जाकर बच्चों को पढ़ा रहे हैं साथ ही उनकी शैक्षिक जरूरतों को भी अपनी जेब से पूरा कर रहे हैं। इतना ही नहीं गांवों में जाकर लोगों को सेहत के प्रति जागरूक कर रहे हैं...
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बच्चों को पढ़ाते एलयू के छात्र - फोटो : amar ujala
लखनऊ विश्वविद्यालय से एमए डिफेंस स्टडीज में टॉप करने के बाद दुर्गेश त्रिपाठी को मेधावी छात्र परिषद का अध्यक्ष बना दिया गया। परिषद का अध्यक्ष बनने के बाद दुर्गेश ने मलिन बस्ती के बच्चों को शिक्षित करने के उद्देश्य से एकल छात्र परिषद का गठन किया। दुर्गेश बताते हैं कि  एक  वर्ष पहले जब उन्होंने देखा कि कक्षाओं के बीच में काफी समय होता है और उस खाली समय छात्र इधर-उधर या फिर कैंटीन में बैठकर बर्बाद कर देते हैं, ऐसे छात्रों से संपर्क कर एक टीम का गठन किया और एकल छात्र परिषद की नींव रखी।
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बच्चों के संग एलयू के छात्र - फोटो : amar ujala
आज यह समूह मलिन बस्तियों के बच्चों को प्राथमिक शिक्षा देकर उनका भविष्य संवार रहा है।समूह में छात्राएं भी शामिल हैं। उन्होंने बताया 12 छात्रों से शुरू हुए समूह में आज 150 से अधिक छात्र-छात्राएं हैं, जिनको 30-30 के समूह में बांटा गया है। हर समूह में से एक छात्र रोजाना आसपास की मलिन बस्तियों में जाकर बच्चों को एकत्रित कर पढ़ाता है।

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बच्चों के संग एलयू के छात्र - फोटो : amar ujala
यही नहीं छात्रों को अपने संसाधन से कॉपी-किताबें और स्टेशनरी भी मुहैया कराता है। पढ़ाई के अलावा इन छात्रों को विभिन्न खेल भी खिलाए जाते हैं। सारा खर्च छात्र मिलकर अपनी जेब से वहन करते हैं। इसके अलावा समूह के छात्र किसी न किसी गांव में जाते हैं और बच्चों को पढ़ाने के साथ विभिन्न खेल प्रतियोगिताएं भी कराते हैं।
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मलिन बस्ती के बच्चों के साथ दुर्गेश त्रिपाठी - फोटो : amar ujala
पर्यावरण के प्रति भी लोगों को कर रहे जागरूक 
मलिन बस्तियों में जाकर वे उनकी स्थिति का जायजा लेते हैं। उनको स्वच्छता की सीख देते हैं। यही नहीं अभियान के तहत पर्यावरण संरक्षण की सीख देते हुए जिन बुजुर्गों का निधन हो चुका है उनके नाम से पौधा रोपण कराते हैं। साथ ही देखरेख करने को भी कहते हैं। मलिन बस्तियों में जाकर अपना जन्मदिन मनाते हैं। उनके बीच वस्त्र, मिठाइयां आदि बांटते हैं। दिवाली पर सभी छात्र समूह बस्तियों में जाकर उनके साथ मिलकर दीये जलाते हैं। यह परंपरा गत दीपावली से शुरू की। यही नहीं मलिन बस्तियों के बीच वे नया साल भी मनाते हैं। कोई भी त्यौहार व उत्सव मनाने के पीछे उनका खास सामाजिक सरोकार होता है। इसके जरिए वे किसी न किसी अभियान को अंजाम देते हैं।

 
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मलिन बस्ती के बच्चों को पढातीं एलयू की छात्र - फोटो : amar ujala
छात्राएं रखती हैं महिलाओं की सेहत का ध्यान
समूह की छात्राएं मलिन बस्तियों की महिलाओं और बालिकाओं को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करती हैं। उनको स्वच्छ रहने की सीख देती हैं। सैनिटरी पैड वितरित करती हैं। महिलाओं और बालिकाओं से संबंधित बीमारियों के बारे में जागरूक करती हैं। उन्होंने बताया कि मलिन बस्तियों के बच्चों की हालत बेहद खराब है। इनके अभिभावक इनके भविष्य को लेकर कुछ नहीं सोचते। वे उनको जागरूक करते हैं। बच्चों को बेसिक शिक्षा देकर उनका स्कूल में दाखिला कराते हैं। अभिभावकों को यह बताया जाता है कि किस तरह बच्चे अपने शिक्षा पूरी कर सकते हैं। सरकारी स्कूलों में उनको फीस नहीं देनी होती है। उन्होंने बताया कि जब तक हर बच्चा शिक्षा ग्रहण नहीं करेगा तब तक देश का उत्थान नहीं होगा।

 
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