मेट्रो आधुनिकता के साथ लखनवी पहचान भी कॉमर्शियल रन शुरू होते ही दिखेगी। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (निफ्ट), रायबरेली इसके लिए कस्टमर रिलेशन असिस्टेंट्स (सीआरए) के लिए एक खास यूनिफार्म भी डिजाइन की है। रेड लाइन के प्राथमिकता सेक्शन के लिए 26 सीआरए की टीम में तीन युवतियां भी होंगी।
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लखनऊ मेट्रो
- फोटो : amar ujala
सीआरए टीम का हिस्सा और कॉमर्शियल रन में अहम जिम्मेदारी संभालने जा रही अमृता श्रीवास्तव का कहना है कि दिल्ली मेट्रो से अलग लखनऊ में ‘पहले आप’ की संस्कृति को बनाए रखना चुनौती होगी।
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मूलरूप से गोरखपुर निवासी और गाजियाबाद से बीटेक की पढ़ाई करने के बाद अमृता अब लखनऊ मेट्रो से जुड़ी हैं। अमृता का कहना है कि अपनी ट्रेनिंग के बाद मैं तैयार हूं कि लखनऊ के लोगों से कैसे व्यवहार करना है। आखिर लखनऊ मेट्रो के साथ लखनवी तहजीब भी अहम होगी।
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वहीं, बिहार निवासी और बीएचयू से अंग्रेजी में स्नातक मनीषा किरन का कहना था कि लखनवी तहजीब और भाषा ऐसी है कि इसके साथ लोगों की परेशानी सुन भी लो। आधा गुस्सा तो यात्री का वैसे ही कम हो जाता है। कैसे परेशानी आएंगी? इसके लिए हमारी ट्रेनिंग हुई है। अब उसे व्यवहार में लखनवी अंदाज में कैसे लाया जाए। इसकी प्रेक्टिस चल रही है। मुझे उम्मीद है, ‘नमस्कार सर, बताइए मैं आपकी क्या मदद कर सकती हूं।’, के शब्द लखनऊवासियों को परेशानी से निकालने में मददगार होंगे।
एमडी कुमार केशव का कहना है कि मेट्रो के कंट्रोलर्स फ्लाइट्स के पायलट की तरह तैयार किए गए हैं। उनका पहनावा दिखावा सब उसी तरह तैयार कराया गया है। सीआरए बहुत महत्वपूर्ण होंगे क्योंकि वही सीधे यात्रियों से रूबरू होंगे। ऐसे में उनकी बोलचाल और यूनिफार्म दोनों को लखनवी तहजीब से जोड़ा गया। सीआरए का बंद गले का कोट और ट्राउजर्स दोनों लखनवी अंदाज से रूबरू कराएंगे। निफ्ट ने यह यूनिफार्म डिजाइन की है।