यूपी की राजधानी लखनऊ के ट्रांसपोर्टनगर में शनिवार शाम एक तीन मंजिला इमारत भरभराकर गिर गई। मलबे में दबने से आठ लोगों की मौत हो गई, जबकि 24 घायल हैं। कई लोगों के दबे होने की आशंका है। ट्रांसपोर्टनगर में जिस बिल्डिंग के ढहने से लोगों की जान गई है, उसके निर्माण में घटिया सामग्री इस्तेमाल की गई थी। इसलिए वह बहुत कम समय में जर्जर हो गई। ढहने का यही मुख्य कारण है। कमाई के फेर में अनदेखी की गई। ये दावे पुलिस की ओर से दर्ज कराए गए एफआईआर में किए गए हैं। जिन लोगों की मौत हुई है, उनके परिवार में कोहराम मचा है।
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Lucknow Building Collapse
- फोटो : अमर उजाला
हादसे में दवा कारोबारी की मौत भी हुई है। बताया जा रहा है कि इमारत गिरने से पहले दवा कारोबारी जसमीत बिल्डिंग से बाहर आ गए थे। वह कहीं जाने वाले थे, लेकिन तभी उनको याद आया कि वह लैपटॉप भूल गए हैं। वह वापस बिल्डिंग के भीतर पहुंचे तभी वह जमींदोज हो गई और जसमीत की जान चली गई। हादसे ने उनके परिजनों को स्तब्ध कर दिया है।
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कुछ वक्त पहले साथ बैठे थे, फिर आई मौत की खबर
जसमीत के भाई डॉ. सनमीत रोते बिलखते बोले कि शनिवार दोपहर मैं और भाई दोनों एक साथ बैठे थे। थोड़ी देर बाद वह गोदाम पर चले गए थे। कुछ देर बाद भाई की मौत की खबर आई। समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें। अब एफआईआर हो या कुछ भी किया जाए, उससे क्या फर्क पड़ता है, मेरा भाई तो चला गया। जसमीत के परिवार में पत्नी, दो बच्चे और पिता गुरमीत साहनी हैं।
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पिछले महीने पहले हुई थी सगाई, नवंबर में थी शादी
हादसे में जान गंवाने वाले नटखेड़ा आलमबाग निवासी 28 वर्षीय अरुण सोनकर की पिछले महीने ही सगाई हुई थी। नवंबर में शादी थी, जिसकी तैयारियां चल रही थीं। घर में खुशियों का माहौल था, लेकिन हादसे ने सबकुछ बदल दिया। खुशियां मातम में तब्दील हो गईं। अरुण सोनकर दवा कारोबारी जसमीत की कंपनी में बिलिंग का काम करते थे। उनकी मौत से भाई ऋषभ, मां रेनू और पिता संजय सदमे में हैं।
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अपनों की मौत ने दिया जिंदगी भर का गम
जुनाबगंज निवासी धीरज गुप्ता की भी हादसे में जान गई। वह कंपनी में चालक के तौर पर काम करते थे। परिवार में पिता महादेव, पत्नी कविता, दो बच्चे नव्या व अर्नब और भाई गौरव हैं। वहीं, राकेश कुमार कंपनी में सुपरवाइजर थे। परिवार में पत्नी सुमन और बेटा नितिन है। बेटी नम्रमा की शादी हो चुकी है। इसके अलावा हादसे में रजनीखंड निवासी पंकज तिवारी की भी मौत हुई। वह डाला चालक थे। परिवार में मां पुत्तन तिवारी, दो बच्चे व तीन भाई हैं। पिता का निधन हो चुका है। इन सभी के अपनों को हादसे ने जिंदगी भर का गम दे दिया।
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लखनऊ में बारिश के दौरान तीन मंजिला इमारत ढही, आठ की मौत, 24 घायल
आपको बता दें कि लखनऊ के ट्रांसपोर्टनगर में शनिवार शाम बारिश के दौरान शहीद पथ किनारे स्थित एक तीन मंजिला इमारत भरभराकर गिर गई। हादसे में एक कारोबारी समेत आठ लोगों की मौत हो गई, जबकि मलबे में दबे 24 लोगों को निकालकर राजधानी के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
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इनमें तीन लोगों की हालत गंभीर है, जिनका ट्रामा सेंटर में इलाज चल रहा है। मलबे में अभी कई और लोगों के दबे होने की आशंका है। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, दमकल और पुलिस की टीमें राहत-बचाव कार्य में देर रात तक जुटी रहीं।
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आशियाना निवासी राकेश सिंघल का हरमिलाप (ग्राउंड प्लस 2) टावर था। टावर के ग्राउंड फ्लोर पर आशियाना निवासी जसमीत साहनी का मोबिल ऑयल और दूसरी मंजिल पर दवा का गोदाम था। पहली मंजिल पर मनचंदा का गिफ्ट सेंटर का गोदाम था।
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शनिवार दोपहर करीब साढ़े तीन बजे तेज बारिश शुरू हुई। आधे घंटे बाद अचानक पूरी बिल्डिंग ढह गई। इससे आसपास भगदड़ मच गई। सबसे पहले पुलिस मौके पर पहुंची। इसके बाद दमकल, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें पहुंचीं और राहत-बचाव शुरू किया। एक-एक कर 32 लोगों को निकाला गया।
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इसमें से कारोबारी जसमीत सिंह साहनी (45), पंकज तिवारी (40), धीरेंद्र गुप्ता उर्फ धीरज (48), अरुण सोनकर (28), राजकिशोर (27) और राकेश कुमार (32), जगरूप (24) और इंजीनियर रूद्र यादव (25) की मौत हो गई। घायलों का इलाज जारी है।
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टावर का जरा सा हिस्सा बचा
टावर का करीब 90 फीसदी हिस्सा जमींदोज हुआ है। एक हिस्सा अब भी खड़ा है। जिसका छज्जा और सीढ़ी दायीं तरफ लटक रबी है। इससे रेस्क्यू करने में भी खतरा है। एहतियात बरतते हुए रेस्क्यू टीमें मलबा हटाकर लोगों को निकालने में जुटी रहीं।
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देखते ही पता चल जाता है...निर्माण घटिया था
आरोप है कि बिल्डिंग मालिक ने किरायेदारों को बरगलाया। उनकी जान जोखिम में डाली। लोगों ने बिल्डिंग मालिक पर भरोसा करके किराये पर ले ली थी। एफआईआर में कहा गया है कि प्रथमदृष्टया ही पता चल जाता है कि निर्माण में घटिया सामग्री इस्तेमाल की गई थी। बाकी इसकी पुष्टि जांच में होगी। पुलिस उस जांच रिपोर्ट को अपनी विवेचना में भी शामिल करेगी।
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मालिक पत्नी, केस पति पर
जो बिल्डिंग धराशायी हुई वह आशियाना निवासी कुमकुम सिंघल के नाम पर है। उनके ही नाम पर नक्शा पास हुआ था। हालांकि एफआईआर उनके पति राकेश सिंघल पर दर्ज हुई है। सूत्रों के मुताबिक हादसे के बाद जब पुलिस ने जानकारी जुटाई, तो राकेश सिंघल का नाम सामने आया था, क्योंकि बिल्डिंग का पूरा काम वही देखते थे।
पुलिस ने उसी सूचना के आधार पर केस दर्ज किया। अब पुलिस जब केस की विवेचना करेगी तो साक्ष्यों के आधार पर संभव है कि कुमकुम को आरोपी बनाए। अगर ऐसा होता है तो कुमकुम पर कार्रवाई होगी।