गोसाईंगंज इलाके में बृहस्पतिवार देरशाम घर से निकले प्रेमी युगल ने तीन किमी. दूर ट्रेन के आगे कूदकर जान दे दी। की-मैन ने शुक्रवार सुबह ट्रैक पर युवती का क्षत-विक्षत शव देखकर पुलिस को कॉल किया। करीब सवा दो सौ मीटर दूर युवक का शव मिला। दोनों के परिवारीजनों ने प्रेम प्रसंग की जानकारी से इन्कार किया। पुलिस सजातीय व हम उम्र जोड़े की खुदकुशी की वजह तलाश रही है।
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मृतक प्रीति और संजय की फाइल फोटो
- फोटो : amar ujala
एसओ गोसाईंगंज अरविंद पांडेय ने बताया कि गांव कबीरपुर में रेलवे फाटक के की-मैन नंदकिशोर ने शुक्रवार सुबह केबिन से 20 मीटर दूर सुल्तानपुर ट्रैक पर युवती का क्षत-विक्षत शव देखकर पुलिस को सूचना दी। केबिन से दो सौ मीटर दूर लखनऊ ट्रैक पर युवक का शव व ट्रैक के किनारे मोबाइल मिला। दोनों की शिनाख्त गांव सेंगटा निवासी संजय रावत (20) व प्रीति रावत (18) के रूप में हुई।
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जांच करती पुलिस
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मौके पर पहुंचे परिवारीजनों ने बताया कि प्रीति खाना बनाने के बाद शाम 7 बजे घर से निकली थी। देर तक न लौटने पर तलाश शुरू की तो संजय के भी लापता होने की जानकारी हुई। दोनों के एक साथ लापता होने से सशंकित परिवारीजनों ने गांव में संभावित ठिकानों पर ढूंढ रहे थे। इस बीच दोनों की मौत की खबर मिली। दोनों परिवारों ने सजातीय, समान हैसियत व हम उम्र संजय और प्रीति के प्रेम प्रसंग की जानकारी से इन्कार किया।
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प्रेमी-प्रेमिका ने दी जान
- फोटो : amar ujala
घिसटती चली गई प्रीति
मौके पर छानबीन कर रहे पुलिसकर्मियों का मानना है कि कबीरपुर रेलवे फाटक से दो सौ मीटर दूर पश्चिम में लखनऊ-सुल्तानपुर रेल ट्रैक पर जा रही ट्रेन के आगे दोनों ने एक साथ छलांग लगाई। जोरदार टक्कर लगने से ट्रैक पर गिरे संजय की मौके पर ही कटकर मौत हो गई, जबकि प्रीति ट्रेन में फंसकर करीब सवा दो सौ मीटर घिसटने के बाद ट्रैक पर गिरी। इससे उसका शव बुरी तरह क्षतविक्षत हो गया।
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प्रेमी-प्रेमिका ने दी जान
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बताते तो शादी करा देते
प्रीति की मौत पर बिलख रही मां लक्ष्मी देवी व पिता जगदीश ने कहा कि दोनों के एकसाथ लापता होने से प्रेम प्रसंग का अंदेशा हुआ। खूब ढूंढा और दोनों की शादी का इरादा बना डाला था लेकिन दोनों जान दे चुके थे। दंपती ने कहा कि प्रीति बताती तो संजय से उसकी शादी करा देते। इसी तरह संजय की मौत पर रो रहे पिता राजाराम व मां राजरानी ने भी प्रेम प्रसंग की जानकारी से इन्कार किया।
पहेली बनी खुदकुशी
एसओ अरविंद पांडेय ने बताया कि प्रीति ने इंटरमीडिएट की परीक्षा दी थी, जबकि संजय आठवीं के बाद पढ़ाई छोड़कर पुताई का काम करने लगा था। दोनों के आसपास मकान हैं। प्रीति तीन भाई व दो बहनों में दूसरे नंबर पर थी और संजय चार भाइयों में दूसरे नंबर पर था। प्रीति का पिता जगदीश मजदूरी करता है और संजय का पिता राजाराम पुताई का काम करके घर का खर्च चलाता है। दोनों की खुदकुशी की वजह जानने के लिए परिवारीजन व ग्रामीणों से तहकीकात के साथ संजय का मोबाइल खंगाला जा रहा है।