सेना द्वारा पीओके में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक किए जाने के बाद सियासी स्ट्राइक का दौर शुरू हो गया है। हर कोई इस मुद्दे पर केंद्र को घेरने व खुद को सेना का पक्षकार दिखाने की मुहिम में जुट गया है।
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इस पर राहुल गांधी ने केंद्र को जमकर घेरा और भाजपा नेताओं के अनुसार तो उन्होंने हदें पार कर दी। राहुल ने दिल्ली में अपने भाषण में मोदी सरकार को घेरते हुए कहा था कि जिन जवानों ने खून दिया, सर्जिकल स्ट्राइक किया, उनके खून के पीछे छुपकर आप दलाली कर रहे हो।
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वहीं, राहुल के बयान पर बचाव करने की जगह कांग्रेसी और ज्यादा आक्रामक हो गए। लखनऊ में पार्टी के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर ने कहा कि राहुल गांधी के बयान में दलाली शब्द का प्रयोग अलंकार की तरह है। बोफोर्स की दलाली की बात भी खूब होती थी, लेकिन इसी तोप से निकले गोलों की बदौलत आज विजय दिवस मनाते हैं।
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इस मामले पर बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी भाजपा व प्रधानमंत्री मोदी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भाजपा सेना के अत्यंत सफ ल ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ को राजनीतिक तौर पर भुनाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने इसकी निंदा करते हुए कहा कि इस सफलता के लिए अभिनंदन व जय-जयकार तो सिर्फ सेना की होनी चाहिए, किसी नेता, रक्षा मंत्री या प्रधानमंत्री की नहीं।
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इससे पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बयान पर तो बखेड़ा ही खड़ा हो चुका है। केजरीवाल के बयान पर पाक मीडिया ने उन्हें हीरो की तरह पेश किया। जारी किए गए एक वीडियो में केजरीवाल ने प्रधानमंत्री से अपील की थी कि उन्हें पाकिस्तान द्वारा मीडिया में फैलाए जा रहे दुष्प्रचार का जवाब देना चाहिए।
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हालांकि, देश भर में केजरीवाल के इस वीडियो की आलोचना के बाद उन्हें सफाई देनी पड़ी थी कि उनका मकसद जवाब मांगना नहीं बल्कि पाकिस्तान के दुष्प्रचार को गलत साबित करना था।
इसके अलावा हमेशा ही चीन व पाकिस्तान के मुद्दों पर मुखर होकर अपना पक्ष रखने वाले सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने सर्जिकल स्ट्राइक पर सेना की बहादुरी की तारीफ की थी और कहा था कि अब वक्त आ गया है कि भारत अब पीओके पर भी कब्जा कर ले। कुल मिलाकर सेना की सर्जिकल स्ट्राइक पर सियासत तेज है और यूपी के आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए इसके और भी तेज होने के पूरे आसार है।