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सहायक शिक्षक भर्ती में नियुक्ति पत्र की मांग कर रहे अभ्यर्थियों पर पुलिस ने जमकर भांजी लाठियां

Mon, 03 Sep 2018 08:52 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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लाठीचार्ज
राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए शिक्षा निदेशालय के अंदर रविवार को साक्षात्कार हो रहे थे, वहीं बाहर सहायक अध्यापक भर्ती में नियुक्ति पत्र की मांग कर रहे अभ्यर्थियों पर लाठियां भांजी जा रही थीं। लाठीचार्ज में कई अभ्यर्थियों को चोट लगी। इस दौरान कई राहगीर भी पिट गए। 
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लाठीचार्ज
सड़क जाम करने के बाद अभ्यर्थियों ने जमकर नारेबाजी की। लगातार नारेबाजी और पुलिस द्वारा जबरन उठाने के दौरान प्रभात सिंह, राहुल मिश्रा, सोनिया और गीतांजलि समेत दर्जन भर से ज्यादा अभ्यर्थी बेहोश हो गए।
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लाठी चार्ज
प्रशासन ने उन्हें एंबुलेंस से महानगर स्थित भाऊराव देवरस अस्पताल भेजा। इनमें से कई अभ्यर्थी हालत सामान्य होते ही दोबारा निदेशालय पहुंच गए। करीब चार घंटे तक चले घमासान और लाठीचार्ज के बाद धरना समाप्त हुआ। 

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लाठीचार्ज
राज्य सरकार हर साल पूरे प्रदेश भर के शिक्षकों में से अच्छा प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों को 5 सितंबर को शिक्षक दिवस पर सम्मानित करती है। इसके लिए कुल 150 आवेदन आए थे। इनमें से 40 शिक्षक शॉर्टलिस्ट किए गए थे। इनमें से अंतिम रूप से चयनित शिक्षकों को पांच सितंबर को सम्मानित किया जाएगा।
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लाठीचार्ज
आंखों में सरकारी नौकरी का ख्वाब संजोए युवाओं को जब कोई रास्ता नहीं दिखा तो उनके सब्र का बांध टूट गया। कई पुरुष और महिला अभ्यर्थी फूट-फूटकर रोने लगे। उनका कहना था कि शिक्षक भर्ती परीक्षा में सफल होने पर घर में खुशियां मनाई गईं। मोहल्ले व रिश्तेदारों में मिठाइयां बांटी गईं। अब उन्हें नौकरी नहीं मिलेगी, यह बात कैसे मान लें। आखिर क्या मुंह लेकर वे घर जाएं।
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लाठीचार्ज
निदेशालय पर धरना दे रहे कई अभ्यर्थियों में से एक ने निदेशालय के पास पड़े केबल को नीम के पेड़ पर डालकर फांसी लगाने की कोशिश की। सीओ महानगर संतोष कुमार सिंह ने उसे देखा तो हिरासत में लेकर थाने ले जाने का निर्देश दिया।
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लाठीचार्ज
पुलिस और प्रशासन ने अभ्यर्थियों को कार्यालय खाली करने के लिए दोपहर एक बजे तक का समय दिया था। इसके बाद यह अवधि आधा घंटा बढ़ाई गई। शिक्षा निदेशक से वार्ता के बाद दो बजे तक अंतिम बार के लिए यह अवधि बढ़ाई गई। हर बार जब पुलिस सख्ती करने की कोशिश करती तो अभ्यर्थी सामूहिक रूप से हाथ जोड़कर उनसे निदेशालय में जमे रहने की मनुहार करते।

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लाठीचार्ज
उनका कहना था कि एक बार यहां से हट गए तो फिर उनकी सुनवाई नहीं होगी। जब पुलिसकर्मियों ने उन्हें जबरन उठाना शुरू किया तो वे पहले हाथ जोड़कर और फिर पैरों में सिर रखकर न हटाने की मांग करने लगे। 

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लाठीचार्ज
पुलिस के आला अधिकारियों ने सभी पुलिस और पीएसी के जवानों को सख्त निर्देश दिया था कि किसी भी सूरत में उन्हें बल प्रयोग नहीं करना है। ऐसे में पुलिस वाले अभ्यर्थियों को समझा रहे थे कि अगर उनका नियुक्ति पत्र जारी न हो तो वे फिर कार्यालय आ सकते हैं। 

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लाठचार्ज
कई अभ्यर्थी वहां तैनात पुलिसकर्मियों के रिश्तेदार थे। उन्हें देख पुलिसकर्मियों की सहानुभूति भी अभ्यर्थियों के साथ थी, लेकिन फर्ज से बंधे होने की वजह से वे खुलकर उनका समर्थन नहीं कर पा रहे थे। वे अपने रिश्तेदार अभ्यर्थियों को वहां से चले जाने की सलाह दे रहे थे। हालांकि इसका कोई असर नहीं दिखा।   
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लाठीचार्ज
सहायक अध्यापक भर्ती में चयनित अभ्यर्थी शनिवार से शिक्षा निदेशालय पर धरना दे रहे थे। इनकी देखा-देखी बीटीसी प्रशिक्षुओं ने भी निदेशालय के सामने धरना शुरू कर दिया। पहले इनका धरना ईको गार्डन में चल रहा था। गुस्साए पुलिसकर्मियों ने बीटीसी प्रशिक्षुओं को भी लाठी भांजकर खदेड़ दिया। 
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