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‘पैरों में पड़ गए छाले, न जाने कब पहुंचेंगे घर...’ अपना दर्द बयां करते फूट-फूटकर रो पड़े मजदूर

Fri, 08 May 2020 05:20 PM IST
ishwar ashish मनीष मिश्र/अमर उजाला, लखनऊ
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पैदल चलने से श्रमिकों के पैरों में छाले पड़ गए हैं। - फोटो : amar ujala
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‘न जाने हमें किस गुनाह की सजा मिल रही है, पैदल चलते-चलते पैरों में छाले पड़ गए हैं लेकिन पता नहीं घर कब तक पहुंच पाएंगे’। इतना कहते ही हरियाणा के सोनीपत से पैदल चलकर लखनऊ पहुंचे श्रमिक फूट-फूटकर रोने लगते हैं।

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पीजीआई के समीप से गुजर रहे सौखान, एजाज, नजरुल, सुहेब, शहजाद और उनके अन्य साथी कई दिनों तक पैदल चलने के बाद गुरुवार को यहां पहुंचे। इन सभी को गोरखपुर जाना है।

नजरुल अपनी व्यथा बताते हुए पैरों के छाले दिखाने लगता है। कहता है 24 घंटे बीत गए, पेट में दाना नहीं गया है। छालों की वजह से अब चला नहीं जा रहा है, पता नहीं कौन सा पाप किया था जो यह सजा मिल रही है।
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एजाज, सुहेब ने बताया वह सभी लोग सोनीपत में मजदूरी करने के लिए गए थे। वहां चार पैसे मिलते थे तो घर पर बूढ़े मां-बाप को देते थे और किसी तरह रोटी चल रही थी लेकिन लॉकडाउन के बाद जब उम्मीद टूट गई और घर आने के लिए कोई साधन नहीं मिला तो पैदल ही निकल पड़े।

सुहेब ने बताया पांच दिन पहले उन्हें मथुरा के पास 24 घंटे के लिए रोका गया था, वहां पर चिकित्सा जांच हुई। इसके बाद भी वहां से कोई साधन नहीं दिया गया और पैदल ही रवाना कर दिया गया। 

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